उनकी चाहत में

उनकी चाहत में | Unki Chahat Mein

उनकी चाहत में

( Unki Chahat Mein )

इश्क़ में जब से वो कबीर हुए
उनकी चाहत में हम सग़ीर हुए

कोई तुम सा नहीं है जाने जाँ
इश्क़ में तुम तो यूँ नज़ीर हुए

उठ के ताज़ीम अब वो करते हैं
जिनकी नज़रों में हम हक़ीर हुए

तिश्नगी मेरी बुझ न पाई कभी
चाहे कितने ही आब गीर हुए

आज से दिल तुम्हे ये सौंप दिया
इस रियासत के तुम वज़ीर हुए

बनके राँझा फ़िदा थे वो हम पर
और हम भी उन्हीं की हीर हुए

तय किया इश्क़ का सफ़र मीना
तब कहीं जा के हम मुशीर हुए

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • रंग ए हयात बाक़ी है | Rang e Hayat Baki Hai

    रंग ए हयात बाक़ी है ( Rang e Hayat Baki Hai ) अब भी रंग-ए-हयात बाक़ी हैहुस्न की इल्तिफ़ात बाक़ी है आ गये वो ग़रीबख़ाने तकउनमें पहले सी बात बाक़ी है चंद लम्हे अभी ठहर जाओऔर थोड़ी सी रात बाक़ी है तोड़ सकता नहीं वो दिल मेराउसमें इतनी सिफ़ात बाक़ी है हाँ यक़ी है मिलेंगे…

  • क्या समझे | Kya Samjhe

    क्या समझे ( Kya Samjhe ) क्या किया उसने और क्या समझे।बेवफ़ाई को हम वफ़ा समझे। ज़ह्न को उसके कोई क्या समझे।सर निगूं को जो सर फिरा समझे। क़ाफ़ले ग़र्क़ हो गए उन के।नाख़ुदाओं को जो ख़ुदा समझे। क्यों न पागल कहे उसे दुनिया।ज़ुल्फ़-ए-जानां को जो घटा समझे। ख़ुद को समझे वो ठीक है लेकिन।दूसरों…

  • अब क्या छोडूं | Ab Kya Chodu

    अब क्या छोडूं ( Ab Kya Chodu ) हॅंसना गाना बाल बनाना छोड़ दिया सब अब क्या छोडूं,दुनिया भर से बैर तुम्हें तो बोलो तो अब दुनिया छोडूॅं। अपनी सब आशाइश प्यारी सारे शौक अभी तक ज़िंदामुझसे है उम्मीद मगर ये हर ख्वाहिश हर सपना छोड़ूॅं। भॅंवरा सिफ़त तबीयत लेकर हर गुलशन में जाते लेकिन,चाह…

  • कल रात | Kal Raat

    कल रात ( Kal Raat ) ज़िन्दगी धूप सी लगी कल रातइस तरह बेबसी दिखी कल रात जिसको देखा नहीं सँवरते मैंवो भी सज-धज के तो मिली कल रात मिलने बेचैन हो गया दिल तोरात भी जो कटी नही कल रात ज़िन्दगी से जिन्हें शिकायत थीखुशियां उनमें मुझे दिखी कल रात ज़िन्दगी भर का साथ…

  • क़यामत कम नहीं होती | Qayamat Kam Nahi Hoti

    क़यामत कम नहीं होती ( Qayamat Kam Nahi Hoti ) निकलते जब वो सज-धज के तो आफ़त कम नहीं होतीजिगर पर तीर चलते हैं क़यामत कम नहीं होती मुहब्बत बाँटिए जग में ये बरकत कम नहीं होतीमिले ख़ुशियाँ ज़माने को मसर्रत कम नहीं होती कहाँ आता किसी को अब सलीक़े से यहाँ चलनाचले हम ग़र…

  • हमने अब स़ख़्त जान कर ली है

    हमने अब स़ख़्त जान कर ली है हमने अब स़ख़्त जान कर ली हैदूरी अब दरमियान कर ली है मिट गयी आन बान है सारीख़तरे में और जान कर ली है करने दीदार हमने हूरों काआस्माँ पे दुकान कर ली है इस परिंदे ने माँ से मिलने कोआज लंबी उड़ान कर ली है रोज़ कह…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *