प्रकृति का मानवीकरण

प्रकृति का मानवीकरण

प्रकृति का मानवीकरण

प्रकृति की गोद में हम रहते हैं,
उसकी सुंदरता से हमें प्रेरणा मिलती है,
की उसकी शक्ति से हमें जीवन मिलता है।

प्रकृति की हरियाली में हम खो जाते हैं,
उसकी ध्वनियों में हमें शांति मिलती है,
की उसकी सुंदरता में हमें आनंद मिलता है।

प्रकृति की शक्ति से हमें प्रेरणा मिलती है,
उसकी सुंदरता से हमें जीवन मिलता है,
की उसकी हरियाली में हमें शांति मिलती है।

प्रकृति की सुंदरता को हमें बचाना होगा,
उसकी शक्ति को हमें समझना होगा,
की उसकी हरियाली को हमें बढ़ाना होगा।

प्रकृति की गोद में हमें जीना होगा,
उसकी सुंदरता में हमें खोना होगा,
की उसकी शक्ति में हमें जीवन पाना होगा।

प्रकृति की हरियाली में हमें आनंद लेना होगा,
उसकी ध्वनियों में हमें शांति पानी होगी,
की उसकी सुंदरता में हमें जीवन जीना होगा।

बीएल भूरा भाबरा

जिला अलीराजपुर मध्यप्रदेश

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • ये बहके बहके से कदम | Kavita ye Behke Behke se Kadam

    ये बहके बहके से कदम ये बहके बहके से कदम थाम लो तुम जरा। लड़खड़ा ना जाए कहीं संभलना तुम जरा। चकाचौध की दुनिया चमक दमक लुभाती। भटक ना जाए तरुणाई चिंता यही सताती। मधुर मधुर रसधारो में छल छद्मों का डेरा है। डगर डगर पे चालाकियां अंधकार घनेरा है। झूठा आकर्षण झूठे वादे केवल…

  • कान्हा प्यारी छवि तेरी | Kanha kavita

    कान्हा प्यारी छवि तेरी ( Kanha pyari chhavi teri )   खुशियों से दामन भर जाए दीप जलाने लाया हूं। मुरली मोहन माधव प्यारे झोली फैलाये आया हूं।   मन मंदिर में बंसी केशव मधुर सुहानी तान लगे। कान्हा की प्यारी छवि मोहिनी मूरत श्याम लगे।   लेखनी की ज्योत ले माधव तुझे रिझाने आया…

  • रिश्तों की पहेली | Kavita rishton ki paheli

    रिश्तों की पहेली ( Rishton ki paheli )   कभी समझ ही ना पाये इन रिश्तो की पहैली को हम, जब जब जाते हे सुलझाने इसे खुद ही उलझ जाते है। कभी इतना अपनापन दे जाते है की आसमाँ पे होता है आलम खुशी का, कभी इक ही पल मे परायों सा अहसास दिलाकर जमीन…

  • अजनबी | Kavita Ajnabi

    अजनबी ( Ajnabi )   दौर कैसा आ गया, दूरियां लेकर यहां, अजनबी सी जिंदगी, छूप रहे चेहरे यहां।   सबको भय सता रहा, अजनबी बना रहा, रिश्तो के दीवानों को, क्या-क्या खेल दिखा रहा।   अपनेपन के भाव को, जाने क्या हवा लगी, अपनों से सब दूर हो, बन गए हैं अजनबी।   कोई…

  • आँसू | Aansoo par kavita

    आँसू! ( Aansoo )   हजारों किस्म के देखो होते हैं आँसू , जुदाई में भी देखो गिरते हैं आँसू। तरसते हैं जवाँ फूल छूने को होंठ, ऐसे हालात में भी टपकते हैं आँसू। बहुत याद आती है दुनिया में जिसकी, आँखों से तब छलक पड़ते हैं आंसू। तबाही का मंजर जब देखती हैं आँखें,…

  • प्रकृति | Prakriti par Kavita

    प्रकृति ( Prakriti )   इस प्रकृति की छटा है न्यारी, कहीं बंजर भू कहीं खिलती क्यारी, कल कल बहती नदियां देखो, कहीं आग उगलती अति कारी।   रूप अनोखा इस धरणी का, नीली चादर ओढ़े अम्बर, खलिहानों में लहलाती फसलें, पर्वत का ताज़ पहना हो सर पर।   झरनों के रूप में छलकता यौवन,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *