प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी की कविताएं | Prabhat Sanatani Poetry
वादे पे वादा
अब वो वादा तो करती है पर भूल जाती है,
अब उसे मैं नहीं कोई और याद आता है।
उसकी मुस्कान अब हम पर मुस्कराने लगी है,
उसके मुस्कान में अब और कोई नजर आता है।।
अब वो बात नहीं रही हमारे और उसके बीच में,
जो हमेशा मुझे ही हर पल याद किया करती थी।
उसकी निगाहों ने किसी और को बसा रखा है अब,
जो कभी मुझसे मिलने के लिए फरियाद करती थी।।
वो जानती है कि इसे कुछ नहीं मालूम है हमारे बारे में,
मैं तेरा प्यार हूं तेरी नजरों को देखकर भांप लेता हूं।
तेरे बारे में सब कुछ मालूम है पर इजहार नहीं करता,
दिल टूट जाएगा तेरा इसलिए अपना मुंह मोड़ लेता हूं।।
दुनिया में सब कुछ झूठा नजर आता है,
जो अपना था वही रूठा नजर आता है।
जो हमेशा मेरे दिलों से खेला करती थी,
वही आज किसी और का नजर आता है।।
मेरा दिल हमेशा जिद करता है तुझे याद करने के लिए,
तुझे दूसरा मिल गया तूने मुझे याद तक नहीं किया।
हजारों हसीनाओं को देखती है मेरी नज़रें रोज-रोज,
पर मेरा दिल तेरे सिवा किसी से फरियाद नहीं किया।।
बहुत से चेहरे हमें मिल जाएंगे साथ निभाने के लिए,
बहुत सी नजरे मिल जाएगी साथ आंसू बहाने के लिए।
मगर दिल मेरा मेरे दिल से तेरे लिए जिद करता है बस,
मिल जाएंगे मेरे सर को अपने दामन में छुपाने के लिए।।
जानता हूं तुम अब हमसे बहुत इतराने लगी हो,
देखकर मुझे तुम अपनी नज़रे चुराने लगी हो।
तेरे सिवा कोई नहीं है मेरा ये जानती हो तुम,
इसीलिए तुम हम पर घमंड दिखाने लगी हो।।
चाहत है मुझमें छोड़ नहीं सकता तुझे मैं कभी,
और तुम अब इतना करो चलने लगी हो।
लूट लिया मेरा घर बार प्यार में धोखे से तूने,
तुम किसी और के लिए अब बदलने लगी हो।।
जितना मैं चाहता हूं तुझे,उतना कोई तुझे चाहा न होगा,
सर आंखों पर बिठाकर तुझे मैं रोज याद करता हूं।
तेरी ख्वाहिश है हमें छोड़ जाने की तो छोड़ दो प्यार से,
तू भूल जाए मुझे बस यही मैं भी रब से फरियाद करता हूं।।
तुझ पर हक था पर अब नहीं रहा,
तुम किसी और के अब हो चुके हो।
तुम मेरी हो ये थी मेरी गलतफहमी,
अब तुम दिल से निकल चुके हो।।
हार गया मैं प्यार में बाजी तुझको जीत मिली,
मैं नफरत करता था उससे तुझको प्रीति मिली।
चेहरे को पढ़ा था तुमने दिल भी गर पर लेती मेरा,
मैं बदनाम हो गया प्यार में तुझको क्रीति मिली।
तू भी बदली और तेरे वादे भी बदल गए,
तेरी मीठी बातें बदली इरादे भी बदल गए।
मैं तेरी मोहब्बत का भूखा था बदलूंगा नहीं,
साथ देने की बात कहके और भी बदल गए।।
शेर प्रभात के तीन
ये धड़कनें तेरी है मुझे संभाल कर रखना,
धड़कनें रुकते ही कयामत आ जाएगी।
मेरी नहीं तो किसी की भी नहीं हो पाओगी,
मेरी मौत भी तुझको मेरी एहसास कराएगी।।
आ चुकी है याद उसकी,अब उसका आना बाकी है,
दस्तक भी दस्तक से पूछे क्या समझाना बाकी है।
आहट को मैं गले लगाकर हरदम जिंदा रहता हूं,
मरघट पर मैं आ गया हूं अब जल जाना बाकी है।।
मैं गलतफहमी में जी रहा था कि वो बस हमारी है,
हमें क्या मालूम था कि वो सिर्फ इस्तेमाल करती हैं।
उसे मालूम है कि हमें कुछ नहीं मालूम उसके बारे में,
सच क्या कहूं वो भी मेरे जिंदगी में क़माल करती है।।
वो बात तो करती है पर वो मन से नहीं करती,
शायद कोई और आ गया है उसकी जिंदगी में।
जो कभी मेरे संदेश के बगैर नहीं रह सकती थी,
संदेश न आए तो मैं लगा रहता हूं उसकी बंदगी में।।
तुम बदल गई अच्छी बात है,
बेवफाई तुममें है सच्ची बात है।
तुमने सोचा था पलट कर देखूंगा मैं,
एक यही तो है जो हमने अच्छी बात है।।
मैं समझ गया हूं तुम्हारी हकीकत को अब,
नजर मानती है मगर मेरा दिल मानता नहीं।
कुछ तो अपने लहजे में छुपाकर रखा होगा तूने,
जो दिल है तेरे शिवा किसी को पहचानता नहीं।।
जब से वह हमसे दूरियां बढ़ने लगी है,
हमें रोज हिचकियां समझने लगी है।
उसकी याद तो आती है पर वो नहीं आती,
अब थोड़ा ही प्यार तुझे जताने लगी है।।
जिंदगी का सफर हमसफर रखता है,
क्योंकि वो अपनों से कभी गद्दारी नहीं करता।
ऐसे तो बहुत मिलते हैं दिल लगाने वाले,
चलते राहों का प्यार वफादारी नहीं करता।।
हमने अपने दिल को बार-बार समझाया,
प्यार हैं या नहीं है मैं समझ नहीं पाया।
जब भी प्यार आया बेहिसाब आया,बस
हमें हंसना नहीं आया उसे रोना नहीं आया।।
शायद अब उसे मेरी जरूरत नहीं रही,
पहले तो हर वक्त याद किया करती थी।
लगता है वो अब पहले से ज्यादा खुश है,
पहले मेरी यादें उसे परेशान किया करती थी।।
देखा है वो अपनी दुनिया में खुश है अब,
ये देखकर मेरे मन को सुकून मिल गया।
शायद मैं उसे बहुत परेशान करता था,
मैं उसके लिए कांटा था,कांटा निकल गया।।
उसके पास अब वक्त नहीं रहा हमारे लिए,
तो अब हमने उसे परेशान करना भी छोड़ दिया।
हो सकता है हमसे अच्छा मिल गया होगा उसे,
जिस राह से आती थी उस राह पर जाना छोड़ दिया।।
अब वो अपने प्यार की दुनिया में खुश है,
अब उसको हमारी जरूरत नहीं रही।
क्यों परेशान करूं उसे खुश है तो अब वो,
अब तो खुद से कोई शिकायत नहीं रही।।
आज कितनी खुश है वो मुझसे न बात करके,
मैं भी फकीर हूं घर-घर से तेरा प्यार मांगूंगा।
तेरे बात न करने से मेरी मोहब्बत कम नहीं होगी,
तू बिछड़ने की और मैं मिलने की दुआ मांगूंगा।।
जितना तड़पाना है तड़पा ले मुझे तू,
अब गुरुर तुझे इश्क का हो गया है।
जब तू देखने के लिए आतुर होगी,
नहीं देखूंगा सोचोगी कहां गया है।।
इश्क की कातिल नज़रों से बचता कौन है,
आती है और अपना हमराह बना लेती है।
शांति तन को मिलती है पर मन को नहीं,
नजरें ढूंढती हैं किसी और को अपना लेती है।।
तू कहती थी मैं तुम्हारी हूं फिर भी हमको रोना पड़ रहा है,
जब भी तेरी याद आती है आंखों को भिगोना पड़ रहा है।
ऐसी मोहब्बत की जरूरत अब नहीं रही हमें, नकारता हूं,
अपनी ही आंखों को अपने ही आंखों से धोना पड़ रहा है।।
तेरे पास रहने से और न रहने से कुछ नहीं होगा हमारा,
तू यही सोचती है न तेरे बिना अब नहीं होगा मेरा गुजारा।
तूने हमें अपने दिल से निकाला और हमने दिलों दिमाग से,
न कभी मैं तुम्हारा था और न तू कभी बन सकती हमारा।।
गुरु पूर्णिमा
गुरु ही हमारा जीवन है, गुरु ही उपवन है, गुरु महान है,
गुरु से ही हमारी कीर्ति है और जग में गुरु का सम्मान है।
बिना गुरु या शिक्षक के हमें ज्ञान मिल ही नहीं सकता है,
हमारा गुरु ही है जो इस जगत का,सबका स्वाभिमान है।।
गुरु के बिना सबका जीवन अधूरा है, सूना संसार है,
गुरु का मार्गदर्शन करके चलना ही हमारा संस्कार है।
गुरु हमको कभी हमारे पथ से विचलित नहीं होने देते,
गुरु के दिए हुए संस्कारों से ही बनता हमारा व्यवहार है।।
गुरु हमारी अज्ञानता को भी ज्ञान में परिवर्तित करता है,
गुरु अंधकार रूपी अज्ञान को ज्ञान में परिवर्तित करता है।
गुरु को हम अपने जीवन में अध्यापक बना हुआ पाते हैं,
गुरु ही हमारे जीवन को अच्छाई में परिवर्तित करता है।।
गुरु के बगैर ये सारा संसार बस अंधकारमय लगता है,
गुरु के बगैर मानव अच्छे पथ पर नहीं चल सकता है।
गुरु को ब्रह्मा,विष्णु और महेश के रूप में बताया गया है,
केवल गुरु ही तो है जो हमारे भाग्य को बदल सकता है।।
हमारा परम कर्तव्य है कि गुरुओं का सम्मान करना चाहिए,
गुरु को नित्य प्रणाम कर अपने जीवन को बदलना चाहिए।
गुरु ही तो है जो अज्ञानी को भी ज्ञानी बनाकर छोड़ता है,
हमें गुरु और शिक्षक के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिए।।
योग
योग करोगे निरोग रहोगे, तेरी होगी सुंदर काया,
किया योग मानव का मन न विचलित कर पाया।
योग शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक है,
किया योग जिसने वही अपना सामंजस्य बनाया।।
हठयोग मन को शुद्ध कर कुंडलिनी को जगाता है,
राजयोग अष्टांग है जो उच्च चेतना को लाता है।
कर्म योग बंधन मुक्त कर आध्यात्मिक ज्ञान का सागर,
भक्ति योग भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति जगाता है।।
ज्ञान योग आत्मसाक्षात्कार सत्य की पहचान कराता है,
तंत्र योग शक्ति और परिवर्तन मेरे जीवन में लाता है।
लय योग ध्यान और एकाग्रता पर केंद्रित बिंदु करता,
योग करने से ही हमारा ज्ञान भी प्रखर हो जाता है।।
योग के आठ अंग प्रिया हैं महर्षि द्वारा समझाए गए हैं,
पतंजलि योग सूत्र की रचना के जनक बताए गए हैं।
यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा,
ध्यान, समाधि, चेतना शक्ति ये सब हममें समाए हुए हैं।।
योग मुख्य कुल चौरासी आसन ही तो माने जाते हैं,
योग का मतलब जोड़ना, दोहन करना भी कहाते हैं।
पतंजलि ने कहा चित्त की वृत्तियों का निरोध ही योग है,
योग वाशिष्ठ के अनुसार योग से हम मुक्ति भी पाते हैं।।
आओ मिलकर पेड़ लगाएं।
धरती को हरा-भरा बनाएं,
फूलों की खुशबू से महकाएं।
धरा को हम भी स्वच्छ बनाएं,
आओ मिलकर पेड़ लगाएं।।
पेड़ ही है हमारे जीवन दाता,
पेड़ ही है हमारे भाग्य-विधाता।
मन मोहकता सांस की खुशबू,
पेड़ पौधे ही हैं जीवन प्रदाता।।
पेड़ पौधों से बादल बनते,
बादल बनकर बारिश करते।
सूखी धरती भी लहराती,
बावड़ी कुएं से पानी भरते।।
पेड़ पौधों की छाया निराली,
यही तो करते मन की हरियाली।
घास पर बैठकर खुशी मनाते,
पेड़-पौधों से आई होठों पे लाली।।
आओ मिलकर अभियान चलाएं,
हर मानव का जीवन स्वस्थ बनाएं।
पेड़ लगाकर करें मानसून आमंत्रण,
सूखी धरती में भी फूल खिलाए।।
वीर प्रतापी महाराणा प्रताप सिंह जी
आज महाराणा प्रताप के गौरव-गाथा का गान करूं,
वीरवरी क्षत्राणी मां के चरणों का मैं गुणगान करूं।
देकर जन्म मां ने इतिहास में अमर बना दिया पुत्र को,
ऐसे वीर,धीर,गंभीर पुरुष पर,मैं अभियान करता हूं।।
जिसकी गर्जना को सुन करके दुश्मन भी थर्राता था,
चेतन के टापों को सुनकर कुनबा भी डर जाता था।
तलवारों की चमक देखकर दुश्मन भी चकाचौंध हुआ,
जिसके मार को सुनते ही अकबर भी घबराता था।।
अपने आत्मसम्मान के खातिर घास की रोटी खाई थी,
सशक्त,ओजस्वी,वीर-धीर,धैर्य के घर भी सामत आई थी।
डरे नहीं,पथ पर डटे रहे और दुश्मनों के छक्के छुड़ा दिए,
एकलिंग का सहारा,पराक्रम देख शमशीर भी मुस्कुराई थी।।
हल्दीघाटी का युद्ध देखकर अकबर बहुत घबराया था,
बहलोल खान समेत घोड़े को दो टुकड़ों में काट गिराया था।
मानसिंह का मान चूर हो गया द्वंद-युद्ध को देख करके,
चेतन समेत महाराणा प्रताप को,दुश्मन भांप न पाया था।।
तलवारों की चमक निराली, तोपें भी आग उगलती थी,
यह देखकर मुगल शासकों की राजसी बहुत सुलगती थी।
रणक्षेत्र में उतरे हुए प्रताप को भला कौन रोक सकता है,
हाथी चिंघारे घोड़े हिनहिनाते, जब-जब तोपें चलती थी।।
वट सावित्री व्रत
सनातन धर्म जग में सबसे महान है,
संस्कृति, सभ्यता का रखता ज्ञान है।
वट सावित्री व्रत भी एक पूजा है,
सुहागिन महिलाएं का व्रत सम्मान है।।
महिलाएं व्रत रखकर पति की लंबी उम्र मांगती हैं,
खुशहाल रहे जीवन यही कामना करती हैं।
अखंड सौभाग्य रहे उनका, कभी खंड न हो,
ऐसी देवी मां से महिलाएं प्रार्थना करती हैं।।
यह व्रत स्त्री, सती सावित्री को समर्पित करती हैं,
ज्येष्ठ के कृष्ण पक्ष में श्रद्धा सुमन अर्पण करती हैं।
सती सावित्री ने यमराज से पति के प्राण बचाए थे,
विधि-विधान से महिलाएं पूजन-अर्चन करती हैं।।
मद्र देश के राजा अश्वपति को कोई संतान न थी,
संतान प्राप्ति के लिए राजा ने यज्ञ करवाई थी।
शुभफल से कुछ समय बाद एक कन्या ने जन्म लिया,
यही कन्या बड़ी होकर सती सावित्री कहलाई थी।।
सत्यवान को मृत्यु से बचाया सावित्री ने,
यमराज के घमंड का मर्दन किया सावित्री ने।
सत्यवान के माता-पिता की आंखें भी ठीक हो गई,
सारे जहां में अपनी कीर्ति फैलाई सावित्री ने ।।
बुद्ध पूर्णिमा
ज्ञान प्राप्त करके आपने जग को ज्ञान दिया,
इसी दिन आपने महापरिनिर्वाण किया।।
भगवान बुद्ध को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई,
सारे जग में बुद्ध की ही ख्याति हुई।।
बोधगया धर्मावलंबियों का तीर्थ स्थान,
सत्य की खोज की जहां प्राप्त किया ज्ञान।।
आपको भगवान विष्णु का नौंवे अवतार बताते हैं,
सभी धर्मावलंबी अपने घरों में दीपक जलाते हैं।।
आपने जग को चार आर्य सत्य दिए,
आपने जग को अष्टांगिक मार्ग दिए।।
जीवन में दुःख का आना बहुत अनिवार्य होता है,
जो दुःख-सुख को समान समझे वही बुद्ध होता है।।
सही दृष्टि,सही संकल्प ही आपको महान बनाता है,
सही वाणी,सही कर्म ही आपको स्थान दिलाता है।।
मां
बताओ, भला मां को शब्दों में कौन बंया कर सकता है,
बताओ, भला मां के बगैर क्या बच्चा कहीं रह सकता है।
भोली-भाली मां ने ही हमें तो इस संसार को दिखाया है,
हमको मां के चरणों में ही सब तीर्थ धाम मिल सकता है।।
मां हमारे अंधियारे जीवन में नया सवेरा लेकर आती है,
मां हमारे अंधियारे जीवन की विधुलेखा बनकर आती है।
मां ही हमारे लिए जगत की सबसे बड़ी गीतकार होती है,
मां मुझको विहाग सुनाकर प्रभात को अभिराम बनाती है।।
मां से ही तो इस वसुंधरा का गुणगान जगत कर रहा है,
मां के अनमोल वचनों से ही तो मेरा जीवन निखर रहा है।
मां का चरित्र और राष्ट्र को देखकर हर कोई इज्जत करेगा,
मां के आशीर्वाद से ही तो हम सबका जीवन बदल रहा है।।
मां सर्वोपरि है, मां ही दूरदर्शी है, मेरी मां ही अधिनायक है,
माही अरूणोदय है, मां ही अंतर्यामी मां ही परिचायक है।
मां के उत्साहयुक्त चेहरे को देखकर मन खुश हो जाता है,
मां ही तो है जो सर्व विधि में, जगत में पूजने के लायक है।।
मां अपनी एषणाओं को मार कर मुझे दयावान बनाती है,
मां भूखी रहती है और झूठ बोलकर मुझे खाना खिलाती है।
मां मुझे फरखती रहती है हमेशा मेरा भी आकलन करती है,
मां मुझे एच्छिक रहना और हृदय में मानवता सिखाती है।।
रविन्द्र नाथ टैगोर
सब मिलकर आज हम गुरुदेव का नमन वंदन करते हैं,
गुरुदेव जी के चरणरज का हम माथे पर चंदन करते हैं।
एक नए युग के प्रवर्तक के रूप में आए हमारे बीच में,
पुनः भारत भूमि पर गुरुजी का हम अभिनंदन करते हैं।।
भारतीय सांस्कृतिक चेतना की अलख जगाने वाले थे,
युगदृष्टा गुरू बनकर हम सबमें जान फूंकने वाले थे।
जन-गण-मन अधिनायक गाकर देव ने देश को संवारा,
गुरुदेव ही तो थे जो देश का इतिहास बदलने वाले थे।।
७ मई १८६१ को वसुंधरा पर आपका अवतरण हुआ था,
पिता देवेंद्रनाथजी थे,माता शारदादेवी ने जन्म दिया था।
आपकी आरंभिक शिक्षा प्रतिष्ठित सेंट जेवियर स्कूल में हुई,
हमारे देश को ज्ञानार्जन कराने, आपने अवतार लिया था।।
देश को ज्ञान का मार्ग दिया और जगत को भी सिखाया,
गुरुदेव बनकर आपने हर घर में धर्म का ध्वज फहराया।
एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति आप हैं,
आपने हमको अपने से बड़ों का सम्मान करना सिखाया।।
अक्षय तृतीया
अक्षय तृतीया सनातनधर्मी का प्रमुख त्यौहार है,
इस त्योहार से सनातनियों को रहता बहुत प्यार है।
आखातीज के नाम से भी जानता हैं इसे सारा जगत,
इस त्यौहार का आना ही जग के लिए उपहार है।।
भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में अवतार लिया था,
सहस्त्रार्जुन जैसे अधर्मी राक्षस का वध भी किया था।
इस पर्व पर किया गया पूजा, जप,तप छय नहीं होता,
भगवान परशुराम जी अखंड रहने का वरदान दिया था।।
वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को इसे मानते हैं,
सारा जनमानस पुण्य,दान जप,अनुष्ठान करते कराते हैं।
सतयुग के प्रारंभ की तिथि भी मानते हैं हम सब इसे,
कृतयुगादि के नाम से भी इसे हम सब पुकारते हैं।।
इस दिन दीन दुखियों की सच्चे मन से सेवा करनी चाहिए,
इस दिन पवित्रता भी सभी लोगों को धारण करना चाहिए।
दुर्भाग्य को सौभाग्य में परिवर्तित करता है ये सच्चा व्रत,
हमें ईश्वर का गुणगान कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।।
ये दिन और तिथि को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है,
सारे मांगलिक कार्यों का इसी दिन प्रारंभ किया जाता है।
शुभ फलदायक बन जाता हमारा दुर्भाग्यपूर्ण जीवन भी,
इस दिन हमारे सारे संकट का निवारण भी हो जाता है।।
परशुराम
पिता जमदग्नि,माता रेणुका का पुत्र प्यारा,
परशुराम नाम लेकर बने जगत का सहारा।।
पृथ्वी से बुराई का नाश करने के लिए आए,
साहसी, वीर, पराक्रमी था भगवान हमारा।।
परशुराम जी विष्णु जी के छठे अवतार हैं,
आप अपराधियों का करने वाले संहार हैं।
क्षत्रिय वर्ग में जन्म लेकर धर्म को बचाया,
परशुरामजी का पराक्रम ही उनकी पहचान है।।
परशुराम जी बहुत शक्तिशाली वीर हुए,
सारे दुश्मन परशुरामजी के अधीन हुए।
अनेकों बार क्षत्रियों का विनाश किया,
जो भीष्म,द्रोणाचार्य और कर्ण के गुरु हुए।।
जिसने शारंग नामक धनुष और सुदर्शन अपनाया,
अपनी वीरता से पूरे ब्रह्मांड में धर्म ध्वज फहराया।
दुश्मन कांपते थे परशुराम जी का नाम सुनकर,
परशुराम जी चिरंजीवी होने का वरदान भी पाया ।।
अनंत कान्हेरे
नमन करूं देश के महान क्रांतिवीर को,
देश के शिरोमणि, देशभक्ति रणधीर को।
मातृभूमि को आजाद कराने के खातिर,
देश के लिए न्यौछावर कर दिए सीस को।।
अनंत कान्हेरे आपको नमन जग करता है,
सारा जग आपका तहेदिल से वंदन करता है।
देशभक्ति की चिंगारी भरी युवाओं में आपने,
आ जाओ आप, ये प्रभात अभिनंदन करता है।।
मातृभूमि की रक्षा खातिर जग को जगाया होगा,
चल करके युवाओं को आपने समझाया होगा।
तेरी मातृभूमि के प्रति कर्मनिष्ठा देखकर करके,
मातृभूमि ने भी आपको सीने से लगाया होगा।।
सावरकर जी ने अभिनव भारत का सदस्य था बनाया,
आपने अपने युवा क्रांतिकारी का जीवन ही अपनाया।
नाशिक कलेक्टर ए एम टी जैक्सन को मारा था आपने,
अंग्रेजों ने १९ अप्रैल १९१० आपको फांसी पर लटकाया।।
पत्नी
वो तो हमेशा तेरी नज़र का वार चाहती है,
जिंदगी रहे मुकम्मल बस प्यार चाहती है।
मुस्कान हो चेहरे पर बस मुस्कराते हुए रहो,
बस वो एक अच्छा सा परिवार चाहती है।।
वो हमारी धरोहर को संजोकर रखना चाहती है,
वो एक घर को घर बनाकर रखना चाहती है।
बस दो वक्त की रोटी और एक वसन चाहिए उसे,
वो खुद आपके परिवार में ढलना चाहती है।।
वो मुझे और मेरे परिवार को खुशियां देना चाहती है,
बस वो मुझे संसार की सारी खुशियां देना चाहती है।
घर का सारा काम करती पर थकती नहीं है कभी भी,
वो मेरे साथ परिवार के साथ उम्र भर चलना चाहती है।।
जीवनसाथी बनकर जीवन को आकार देती है,
वो मेरे परिवार को एक नया परिवार देती है।
सब कुछ सहन करना जानती है वो सह लेती है ,
जीवन साथी मुझे जीने का आधार देती है।।
जलियांवाला बाग
१३ अप्रैल १९१९ का दिन कौन भूल सकता है,
अंग्रेजों के क्रूर अत्याचारों को कौन भूल सकता है।
निर्दोष लोगों की हत्या हुई थी जलियांवाला बाग में,
अंग्रेजी शासकों की निर्दयता को कौन भूल सकता है।।
सभी लोग मिलकर बैसाखी का पर्व मना रहे थे,
सभी लोग प्यार से एक दूसरे को गले लगा रहे थे।
क्या पता था कि यह खुशियां मेरी चंद क्षणों की है,
लोग मिलकर के नाच गानकर उत्सव मना रहे थे।।
अचानक क्या हो गया किसी को पता नहीं चला,
तभी ब्रिगेडियर रेजीनॉल्ड डायर वहां पर आ गया।
निहत्थे लोगों पर गोलियां चलानी शुरू कर दी उसने,
यह दृश्य देखकर धरती मां का भी सीन थर्रा गया।।
जलियांवाला बाग का कुआं लासों से पट गया था,
ये दृश्य को देखकर भारतीयों का सीन फट गया था।
उधमजी को गोली लगी उन्होंने बदला लेने की ठानी थी,
१३ मार्च १९४० को उधमजी ने लंदन में मार दिया था।।
वीर हनुमान
सारी विपदा मिटा के जाओ,
मुझको भी तो ज्ञान बताओ।
हे महावीर, बजरंगबली हनुमान,
अब मेरे भी घर तो आ जाओ।।
राम की भक्ति करने वाले,
जग के दुखड़े हरने वाले।
नाम से तेरे शत्रु है कांपे,
राम नाम के हो मतवाले।।
भूत पिशाच का नाश करो तुम,
जग का सारे संताप हारो तुम।
ऐसी विपदा जो आप न टालें,
बस रामचरण में रहे परो तुम।।
केसरी पुत्र अंजना के लाला हो तुम,
मेहंदीपुर के प्यारे बाला हो तुम।
परेशान अगर कभी नर हो जावे,
नाम लेवे प्रगट तत्काला हो तुम।।
सच लिखना हमने छोड़ दिया
झूठें की खीर पकाते हैं, झूठी ही जनता खाती है,
बस चर्चा होता है कुत्तों का, घुन पानी पी जाती है।
ज्ञानपीठ बन बैठा है अनुशासन को खुद भूल गया,
करके वादे देखो यारो उसने भी तो अब तोड़ दिया।।
दशा देखकर लोगों की,सच लिखना हमने छोड़ दिया।।
एम.ए.,एम.एसी. करके हमने,कूड़े में फारम डाल दिया,
शर्म आई थी हमें पूछने मुस्काकर उसको टाल दिया।
चिंता की कोई बात नहीं है हम भी किस्मत आजमाते हैं,
प्रधान बनूंगा मैं भी इक दिन,नौकरी का आशा छोड़ दिया।।
दशा देखकर लोगों का,सच लिखना हमने छोड़ दिया।।
सबसे महंगी गाड़ी होगी, परफ्यूम विदेशी वालों का,
सुधरेगी घर की बिगड़ी हालत,दिल भी होगा मतवालों का।
अब गरीब बना कर छोडूंगा, अंग्रेजी सभ्यता ला करके,
विश्वविद्यालय जाने का मन था संसद की ओर जोर दिया।।
दशा देखकर लोगों का, सच लिखना हमने छोड़ा है।।
बहुत तजुरबे मिले हैं जग से झूठ बोलकर माहिर बन,
लालसा है तुम्हें देखने की तो जनता को कर जाहिर तन।
चापलूस तो बहुत मिलेंगे बस खाने पीने के खातिर,
बोल रही है जनता हमसे, तूने अपना वादा तोड़ दिया।।
दशा देखकर लोगों की,सच लिखना हमने छोड़ दिया।।
झूठ बोलना सीख जग से, करती जनता प्यार है,
झूठ बोलने वालो को ही तो जग से मिलते उपहार है।
कर्तव्य भूला, पथ भी भूल, भूल गया मानवता भी,
इस पाखंडी दुनिया में ऐसे जीवन जीना छोड़ दिया।।
दशा देखकर लोगों की,सच लिखना हमने छोड़ दिया।।
कुष्मांडा
मां का चौथा रूप सारे जग से सबसे निराला है,
सृष्टि की उत्पत्ति, आदि शक्ति जग में आला है।
उनकी आठ भुजाएं जग को सम्मोहित करती हैं,
सवारी सिंह की है,कर में कमल पुष्प का प्याला है।।
अपनी मंद मुस्कान से मां जग को हंसाती है,
जगत जननी मां जगदंबे चौथे रूप में आती है,
स्वरूप बहुत तेज है,सूर्य के समान मां का,
मां का चौथा स्वरूप कूष्मांडा रूप दर्शाती है।।
सृष्टि नहीं थी चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था,
अंधकार को नष्ट करने के लिए मां ने किया प्रहार था।
तब देवी ने अपनी ईषत हास्य से ब्रह्मांड की रचना की,
मां की अनुकंपा से धरा पर सज गया मां का दरबार था।।
मां की आठ भुजाएं हैं जो सारे जगत को न्यारी लगती हैं,
कमंडल,धनुष-बाण,कमल पुष्प से सुसज्जित रहती हैं।
अमृत पूर्ण कलश,चक्र तथा गदा से राक्षसों का मर्दन किया,
सूर्य लोक में रहने की शक्ति जग को इन्हीं मां से मिलती है।।
कुम्हड़े का बलि कुष्मांडा मां को बहुत प्रिय लगता है,
कुम्हड़े की वजह से मां को कुष्मांडा कहा जाता है।
मां की कांति और प्रभा से सूर्य भी दैदीप्यमान है,
मां के तेज से दसों दिशाओं को भी बल मिलता है।।
चंद्रघंटा
चंद्रघंटा मां को मां का तीसरा रूप मानते हैं,
चंद्र के समान सुंदर है मां,सब लोग जानते हैं।
मां के रूप में दिव्य सुगंध का आभास होता है,
चंद्रघंटा मां के आलौकिक गुणों को बखानते हैं।।
मां का यह स्वरूप शांति दायक कल्याणकारी है,
मां की कृपा से तकदीर सजाती संवरती हमारी है।
मां इहलोक और परलोक दोनों का कल्याण करती है,
मां की ममता के आगे झुकती दुनिया सारी है।।
मां के मस्तक पर घंटे के आकार का आधा चंद्र है,
यह चंद्र निराला है और सारे जगत को बहुत पसंद है।
मां के दस हाथ है जो खड़क और अस्त्र से विभूषित हैं,
मां का रुप देखकर राक्षसों की धड़कनें हो जाती मंद हैं।।
घंटे की करकस व भयानक धुन सुनकर शत्रु कांपते हैं,
इस धुन को सुनकर अत्याचारी दानव, दैत्य भागते हैं।
मां की कृपा से सड़क अलौकिक वस्तु के दर्शन होते हैं,
मां चंद्रघंटा के श्री चरणों को सारा जगत प्रणाम करते हैं।।
मां चंद्रघंटा की आराधना से हमको वीरता प्राप्त होता है,
सौम्यता, विनम्रता और निर्भयता हमको प्राप्त होता है।
परिशुद्ध,पवित्र करके मां की उपासना करनी चाहिए हमें,
मां की कृपा से सारे कष्ट कटते हैं,परम पद प्राप्त होता है।।
शैलपुत्री
शैलपुत्री को मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप हम मानते हैं,
पर्वत की बेटी या पहाड़ों की बेटी कहते सब जानते हैं।
मां का हर स्वरूप माता सती के आत्मदाह से जुड़ा है,
आज प्रथम दिवस पर मां शैलपुत्री का गुण बखानते हैं।।
मां शैलपुत्री शांति और सौभाग्य प्रदान करती है,
मां का रूप मनोरम है कमल और त्रिशूल धारती है।
मां का वाहन वृषभ है,बृषारुढ़ा है मां, मेरी नवदुर्गा मां,
पौराणिक भी मां दुर्गा के चरित्र का गुणगान करती है।।
नहीं सुन सकी पति का अपमान आत्मदाह कर लिया,
भगवान शिव उन्माद करने लगे कैलाश श्रीहीन कर दिया।
देवताओं ने त्रस्त होकर आदि शक्ति अम्बा का ध्यान किया,
प्रकट हो देवी शक्ति ने तब देवताओं को आश्वस्त किया।।
देवर्षि के कहने पर जगदंबिका तपस्या करने लगी,
अघोरी जटाधारी शिव का मन से ध्यान धरने लगी।
भक्ति और प्रेम देखकर सप्तऋषि भी घबराने लगे ,
शिव और गिरिजा के विवाह की शुभ लग्न बनने लगी।।
माता रानी का जन्म हिमवान के प्यारे महल में हुआ,
मां का नाम पार्वती,शैलपुत्री, दुर्गा, देवी,गिरिजा हुआ।
महादेव को बचपन से ही अपना सर्वस्व मानने लगी,
शैलपुत्री का विवाह औघड़ दानी शिवजी के साथ हुआ।।
ब्रह्मचारिणी
ब्रह्मचारिणी को मां का दुर्गा का दूसरा रूप मानते हैं,
तप की चारिणी है मां ये तो सभी लोग जानते हैं।
मां वेदस्तत्व मां का ब्रह्म स्वरुप है का रुप सबसे प्यारा,
द्वितीय दिवस पर मां ब्रह्मचारिणी का गुण बखानते हैं।।
भगवान शिव को पाने के लिए मां ने घोर तपस्या किया,
घोर तपस्या को देखकर ब्रह्मचारिणी नाम दिया।
मां स्वरूपा भक्तों को सिद्धि और अनंत फल देती है,
मां ब्रह्मचारिणी के चरणों का अमृतपान जगत ने किया।।
ज्योतिर्मय और भव्य स्वरूप है देवी मां के,
दाएं हाथ में जप की माला रहती है मां के।
मां संयम की वृद्धि, वैराग्य और सदाचार देती है,
बाएं हाथ में कमंडल धारण रहता है मां के।।
कठिन तपस्या की एक हजार केवल फल फूल खाए,
सौ वर्षों तक जमीन पर रही शाक खाकर दिन बीताए।
कई हजार वर्षों तक निराहार रही मां ब्रह्मचारिणी,
तब जाकर मां ने एक और अपर्णा नाम पाए।।
ब्रह्मचारिणी की कृपा से सर्व सिद्धि प्राप्त होता है,
अहंकार नष्ट करती है मां जिसमें अहंकार व्याप्त होता है।
जीवन के कठिन राहों पर मन विचलित नहीं होने देती,
मां की उपासना से भक्तों को सब कुछ प्राप्त होता है।।
स्कंदमाता
मां का पांचवा रूप बहुत उत्तम और सरल है,
स्कंद माता का प्रिया आसान प्यारा कमाल है।
मां की चार भुजाएं जग को मोहित करती हैं,
मां की भक्ति से भक्त को मिलता आत्म बल है।।
पहाड़ों में रहकर सांसारिक जीवन में नव-चेतन जगाती है,
मां भक्तों पर कृपा करके मूढ़ को ज्ञानी-ध्यानी बनती है।
स्कंद,कार्तिकेय की मां के कारण स्कंद माता कहते हैं,
मां के विग्रह में भगवान स्कंद बाल रूप में विराजित हैं।।
स्कंद मां का पूजन करने से मोछ मिलता है,
सूर्य मंडल की तरह भक्त का चेहरा खिलता है।
मां भक्त को अलौकिक शक्ति प्रदान करती है,
साधक कभी भी मझधार में नहीं फंसता है।।
स्कंद माता हमारे जीवन को खुशहाल करती है,
मोछ का मार्ग सुलभ और आसान करती है।
मन को एकाग्रता प्रदान करती है मां हमें ,
मां अपने भक्तों पर बहुत दया और प्यार करती है।।
मां की ममता से कुशल जीवन हो जाता है,
जब भक्त मां की भक्ति में राम जाता है।
सारे दुःखों का नाश करती है स्कंदमाता,
हमारे जीवन से अंधकार मिट जाता है।।
कालरात्रि
मां का सप्तम स्वरूप मां कालरात्रि जिनका शरीर काला है,
मां का सप्तम स्वरूप सारे जग का अंधेरा हरने वाला है।
मां का सप्तम स्वरूप अत्यंत दयालु और कृपालु है,
मां का यह स्वरूप समस्त विकारों को हारने वाला है।।
मां कालरात्रि सभी जगत को विजय दिलाने वाली है,
मां कालरात्रि मस्तिष्क के विकारों को मिटाने वाली है।
मां कालरात्रि की ममता सभी भक्तों को प्राप्त होती है,
मां कालरात्रि का स्वरूप जगत की पीड़ा हरने वाली है।।
मां कालरात्रि के रूप भयानक और बिखरे हुए बाल हैं,
मां के गले में विद्युत की तरह चमकने वाले माल हैं।
अंधकार से प्रकाश की तरफ लाती है मां अपने भक्तों को,
मां दुष्टों के लिए दुष्ट और कालों को हरने वाली काल है।।
मां कालरात्रि भक्तों को मनवांछित फल देता है,
मां कालरात्रि उपासक को शक्ति प्रदान करती है।
मां कालरात्रि का वाहन गर्दभ है जगत में सबसे प्यारा,
मां कालरात्रि अपने भक्तों के सारे दुखड़े हर लेती है।।
मधु कैटभ को मारकर, मां ने जगत का उद्धार किया,
जो भक्त अव्यवस्थित था उसका साक्षात्कार किया।
मां कालरात्रि ने भगवान विष्णु के योग निद्रा का रूप है,
मां कालरात्रि ने सारे जगत को अभय वरदान दिया।।
कात्यायनी
मां का छठा रूप बहुत प्यारा मां कात्यायनी है,
मां कात्यायनी ही जगत की जीवन दाहिनी है।
मां की उपासना से भक्तों को मोछ प्राप्त होता है,
मां अपने भक्तों तथा जग का दुःख निवारिणि है।।
महर्षि कात्यायन ने भगवती जगदंबा की उपासना किया,
कात्यायन ने घोर तपस्या करके मां की भक्ति प्राप्त किया।
कात्यायन के घर जन्म लेकर कात्यायनी कहलाई मां मेरी,
मां कात्यायनी ने जगत में अपना अधिपत्य स्थापित किया।।
मां कात्यायनी की कृपा से सारा भवन सजा रहता है,
वैज्ञानिक युग में भी मां का महत्व ज्यादा रहता है।
मां कात्यायनी की कृपा से सारे कार्य सिद्ध हो जाते हैं,
मां की कृपा से हमेशा मन का कमल खिला रहता है।।
मां कात्यायनी भक्तों को अमोघ फल देने वाली है,
मां ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री हैं जो जग में निराली है।
मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्या है,
इनकी चार भुजाएं जगत की पीड़ा हरने वाली है।।
मां कात्यायनी समस्त पापों को नाश करती है,
मां कात्यायनी सारे जगत का कल्याण करती है।
मां की कृपा से रोग-दोष,संताप सब नष्ट हो जाते हैं,
मां की असीम अनुपम कृपा भक्तों पर बरसती है।।
सिद्धिदात्री
मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों की,मनोकामना पूर्ण करती है,
मां सिद्धिदात्री अपने भक्तों के सभी दुखड़ों को हरती है।
जो भक्त मां सिद्धिदात्री को सच्चे मन से याद करता है,
मां अपने भक्तों को धन,बल,यश-कीर्ति प्रदान करती है।।
मां सिद्धिदात्री सभी पापों का नाश करने वाली है,
मां सिद्धिदात्री की ज्योति जग में सबसे निराली है।
मां सिद्धिदात्री कमल पुष्प पर विराजमान रहती हैं,
मां की मंद-मंद मुस्कान जग की पीड़ा हरने वाली है।।
मां की कृपा से कठिन कार्य भी आसान हो जाता है,
मां की ममता से जग में यश-वैभव,सम्मान पाता है।
मां सिद्धिदात्री की कृपा से भय-रोगों का नाश होता है,
मां सिद्धिदात्री की कृपा से भक्त मनवांछित फल पाता है।।
जो भी सच्चे मन से मन से धरती की आरती गाते हैं,
वो भोग-विलास,आवागमन के बंधन से मुक्ति पा जाते हैं।
मां का ऋतु फल के साथ हलवा पुड़ी का भोग लगाएं,
मां सिद्धिदात्री के भक्त को परम पद प्राप्त हो जाते हैं।।
मां सिद्धिदात्री का वाहन सिंह है जगत में सबसे प्यारा है,
मां सिद्धिदात्री की कृपा से जीवन उज्जवल होता हमारा है।
मां सिद्धिदात्री हमेशा हम जैसे भक्तों पर कृपा बरसाती है,
मां सिद्धिदात्री आपकी आंचल में आया ये भक्त तुम्हारा है।।
महागौरी
मां महागौरी का अष्टम रूप शक्ति प्रदान करती है,
मां महागौरी अपने भक्तों के सभी कष्टों को हरती है।
मां महागौरी की कृपा से सभी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं,
मां महागौरी अपने भक्तों पर विशेष कृपा करती है।।
मां महागौरी के उपवास से जीवन में कष्ट नहीं होता,
मां महागौरी के उपासक का कभी धर्म भ्रष्ट नहीं होता।
मां महागौरी अमोघ फल प्रदान करती है अपने भक्तों को,
मां महागौरी की कृपा से भक्तों की शक्ति नष्ट नहीं होता।।
मां का रूप पूर्णता गौरव वर्ण और तेजमय है,
उपमा शंख,चंद्र और कुंद के फूल एक लय है।
अष्टवर्षा मां, जगत का कल्याण करती है,
मां महागौरी की कृपा से ही स्वर,ताल लय है।।
मां महागौरी श्वेतांबर धारण करने वाली है,
मां महागौरी जगत का कल्याण करने वाली है।
मां महागौरी को श्वेतांबरधरा भी कहा जाता है,
मां महागौरी की ज्योति जग में सबसे निराली है।।
मां महागौरी सभी पापों को नष्ट करने वाली है,
मां महागौरी की उपासना जगत कल्याणकारी है।
मां के पूजन से अलौकिक सिद्धियां प्राप्त होती हैं,
मां का कांति रूप जगत को मोहने वाली है।।
हे क्रांतिवीर प्रणाम तुझे
हे क्रांतिवीर प्रणाम तुझे,हे क्रांतिवीर प्रणाम तुझे।
बारंबार प्रणाम तुझे, हे क्रांतिवीर प्रणाम तुझे।।
जहां फांसी पर लटकाया था वह मिट्टी भी तो रोई होगी,
जिस रस्सी पर झूले होंगे वह भी आंख भिगोई होगी।
पर कायर दुश्मन की गद्दारी, होठों पर मुस्कान दिखी,
हे शहीद मिल गया अब तो,जग का चारों धाम तुझे।।
हे क्रांतिवीर प्रणाम तुझे।।
जो पुष्प खुश्बू देता हरदम, वो भी तो मुरझाया होगा,
सूर्य तरेरे नयन था अपना पड़ते नयन झुकाया होगा।
और सूर्य में गर्मी सिमट गई, निशा अंधेरी शाम दिखी,
सोया नहीं था क्षण भर भी मिल गया आज आराम तुझे।।
हे क्रांति वीर प्रणाम तुझे।।
मां की आंखें आंसू में बह गई, पापा का दिल टूट गया,
बहन बिछड़ गई देश के खातिर, भाई से नाता छूट गया।
वो फांसी का तख्ता भी तो खुद से नफरत करता होगा,
वो धिक्कारता है खुद को और करता है प्रणाम तुझे।।
हे क्रांति वीर प्रणाम तुझे।।
मातृभूमि भी धन्य हो गई, खुद में तुझे समा करके,
गर्व में झूम रही है माता, प्यारे लाल को अपना करके।
शमशान भी धन्य हो गया खुद वीरों की बलदानी पर,
हे भारत के लाल तुझ पर रहता है अभियान मुझे।।
हे क्रांतिवीर प्रणाम तुझे।।
शहीदों के प्रति प्रेम
२४ मार्च का वो दिन आज भी काला लगता है,
दुश्मन ने तुम्हें जलाकर किया उजाला लगता है।
मां बाबू को पता नहीं पर तेरे अन्तर्मन ने कहा होगा,
मातृभूमि तुम्हें प्रणाम मां शुकून हमें अब लगता है।।
मां के चरणों की सौगंध खा फांसी का फंदा चुम्मा था,
देख कर तेरे जज्बे को दुश्मन का सर भी घूमा था।
जला दिया दुश्मन ने तुमको रात अंधेरी तट सूना जो,
अधजले छोड़कर भागे दुश्मन का कुनबा झूमा था।।।
हमीं ने मातृभूमि को धोखा दिया अपनों से गद्दारी की,
हम पैसों के लालच में आकर दुश्मन से वफादारी की।
पर अड़े रहे आप मरते दम तक दुश्मन को ललकार रहे,
मिटा दिया गुरुर दुश्मन का ने हमें मिटाने की तैयारी की।।
आज भी छूकर धन्य हो गई,चिता ने तुमको किया नमन,
पावन हो गई वो धरती भी, धन्य हो गया सारा उपवन।
पत्ता-पत्ता भी नम हो गया होगा, तेरे धुएं की खुशबू से,
सूर्य भी किरणें धीमी कर ली आंसू में बह चला चमन।।
खुश थी मातृभूमि यही सोचकर अब आजाद हो जाऊंगी,
टूटेगी जंजीर गुलामी की मैं फिर से आबाद हो जाऊंगी।
अब नई कोपलें,नई दिशाएं, उमंग, नए सूर्य का युग होगा,
संग पवन के मिल करके जन-जन तक संदेश पहुंचाऊंगी।।
शहीद दिवस
नमन करता हूं तुम्हें, हे देश के महान क्रांतिकारी,
सदा जलती मसाले तेरी यादों में रहे दुनिया सारी।
खौफ तेरा देखकर अंग्रेजी दुश्मन भी थर्रा गया,
तेरे गले में फंदा था और चेहरे पर मुस्कान प्यारी।।
तेरे अदम्य, साहस, निष्ठा और बलिदान को प्रणाम है,
आर्यावर्त को नई सुबह देने वाले, आपको प्रणाम है।
किंचित भयभीत न हुए शत्रु से डटकर मुकाबला किया,
भगत, राजगुरु व सुखदेव आपको बारंबार प्रणाम है।।
शायद वो काला दिन था काली रात की भी शान थी,
फांसी पर चढ़ते देख दुश्मन के चेहरे पर मुस्कान थी।
हुकूमत भी देखकर तुझे, कैसे बिलबिलाने लगा था,
नाम शहीदों में सुनहरे अक्षरों में उभर कर महान थी।।
देश के लिए आपने अपने प्राण न्यौछावर कर दिया,
युवाओं के दिलों में भी देशभक्ति का जोश भर दिया।
हजारों युवा सड़क पर आ गए देश की रक्षा के लिए,
आप हंसते हुए देश के खातिर प्राण न्यौछावर कर दिया।।
पिता की हालत खराब हुई,मां का सीन धड़का होगा,
देखकर दशा तेरी, तेरे भाई का बांह भी फड़का होगा।
उन गद्दारों की ओछी सोच और कायरता पर थू है,
एक बार फांसी का फंदा भी तुझे देख सरका होगा।।
गौरैया दिवस
उड़कर रोज छत की मुंडेर पर बैठना,
देखकर तुझे वातावरण का चहकना।
मन को मोह लेती है ये प्यारी गौरैया,
मन करता है इसकी सुंदरता देखना।।
पर्यावरण को सुंदर बनाती है गौरैया,
पर्यावरण को ध्वनि से बुलाती है गौरैया।
गौरैया को लक्ष्मी के रूप में देखते हैं हम,
सारे जगत के मन को भाती है गौरैया।।
हमें मिलकर गौरैया को बचाना है,
हमें मिलकर गौरैया संरक्षण चलाना है।
मोहम्मद दिलावर को नमन करता हूं,
जिसने शुरू किया गौरैया बचाना है।।
गौरैया सुरक्षा और सौभाग्य का प्रतीक है,
पक्षी हमारे देश के सम्मान,शान का प्रतीक है।
गौरैया हमारे लिए साथ आशीर्वाद लाती है,
गौरैया बुरी आत्मा को दूर भगाने का प्रतीक है।।
दुःख भरी होली
मैं कैसे बताऊं की होली हर घर में मनाते हैं,
कैसे कहूं कि हर घर में अबीर गुलाल उड़ाते हैं।
मैं आपको सारी सच्चाई बयां कर रहा हूं,
हर कोई ध्यान से पढ़ना मैं क्या लिख रहा हूं।।
पिता दारू पीकर चौराहे पर पड़ा हुआ है,
बेटा आंख में आंसू लेकर पास खड़ा हुआ है।
पिता चौराहे पर अपनी इज्जत उछाल रहा हैं,
बेटा नहीं समझ रहा, यह सब क्या चल रहा है।।
बरस में एक बार होली का त्यौहार आता है,
हर कोई होली का जश्न धूम-धाम से मनाता है।
पिता आज चौराहे पर दारू पीकर पड़ा है,
और बेटा आंख में आंसू लेकर पास में खड़ा है।।
मां ने सोचा था शाम को अच्छे-अच्छे पकवान बनाऊंगी,
परिवार के साथ बैठकर अपने बच्चों को खिलाऊंगी।।
हम सब मिलकर बड़े प्यार से होली मनाएंगे,
अपने जीवन में खुशियों की धूम मचाएंगे।।
पर अफसोस मां का सोचा सब गलत हो गया,
क्योंकि उसका पति आज बेवड़ा हो गया।।
घर पर बच्चे रो रहे हैं बिलबिल रहे हैं,
छोटे-छोटे बच्चे हैं बहुत घबरा रहे हैं।।
पिता के चेहरे पर पानी छिड़क रहे हैं,
लगता है पापा चिरनिद्रा में सो रहे हैं।।
पत्नी बदहवास होकर बेहोश हो जाती है,
होली के दिन ही घर की खुशी छिन जाती है।।
तुरंत सारी खुशियां मातम में बदल जाती है,
होली के दिन शाम को मां रंग नहीं लगती है।।
यह जो नशा है,किसी की मांग का सिंदूर उजाड़ देता है,
परिवार एकजुट था उसमें भी खलल डाल देता है।।
चौराहे पर सब लोग कोसते-कोसते घर चले जाते हैं,
बच्चों के सामने हमेशा के लिए अंधेरा छा जाते हैं।।
क्या कहूं यह त्यौहार खुशियां लाता है कि गम देता है,
पल भर में ये सबकी खुशी को मातम में बदल देता है।।
सब लोग त्योहार मनाओ पर ध्यान रहे इतना,
किस परिवार पर किसका बोझ है कितना।।
ध्यान से त्यौहार मनाते रहो जिंदगी बचाते रहो,
खुद न पियो और दूसरों को भी पीने से बचाते रहो।।
यह संदेश मैं सारी समाज को दे रहा हूं,
बस अपनी कलम यहीं पर रोक रहा हूं।।
दुःख भरी होली
मैं कैसे बताऊं की होली हर घर में मनाते हैं,
कैसे कहूं कि हर घर में अबीर गुलाल उड़ाते हैं।
मैं आपको सारी सच्चाई बयां कर रहा हूं,
हर कोई ध्यान से पढ़ना मैं क्या लिख रहा हूं।।
पिता दारू पीकर चौराहे पर पड़ा हुआ है,
बेटा आंख में आंसू लेकर पास खड़ा हुआ है।
पिता चौराहे पर अपनी इज्जत उछाल रहा हैं,
बेटा नहीं समझ रहा, यह सब क्या चल रहा है।।
बरस में एक बार होली का त्यौहार आता है,
हर कोई होली का जश्न धूम-धाम से मनाता है।
पिता आज चौराहे पर दारू पीकर पड़ा है,
और बेटा आंख में आंसू लेकर पास में खड़ा है।।
मां ने सोचा था शाम को अच्छे-अच्छे पकवान बनाऊंगी,
परिवार के साथ बैठकर अपने बच्चों को खिलाऊंगी।।
हम सब मिलकर बड़े प्यार से होली मनाएंगे,
अपने जीवन में खुशियों की धूम मचाएंगे।।
पर अफसोस मां का सोचा सब गलत हो गया,
क्योंकि उसका पति आज बेवड़ा हो गया।।
घर पर बच्चे रो रहे हैं बिलबिल रहे हैं,
छोटे-छोटे बच्चे हैं बहुत घबरा रहे हैं।।
पिता के चेहरे पर पानी छिड़क रहे हैं,
लगता है पापा चिरनिद्रा में सो रहे हैं।।
पत्नी बदहवास होकर बेहोश हो जाती है,
होली के दिन ही घर की खुशी छिन जाती है।।
तुरंत सारी खुशियां मातम में बदल जाती है,
होली के दिन शाम को मां रंग नहीं लगती है।।
यह जो नशा है,किसी की मांग का सिंदूर उजाड़ देता है,
परिवार एकजुट था उसमें भी खलल डाल देता है।।
चौराहे पर सब लोग कोसते-कोसते घर चले जाते हैं,
बच्चों के सामने हमेशा के लिए अंधेरा छा जाते हैं।।
क्या कहूं यह त्यौहार खुशियां लाता है कि गम देता है,
पल भर में ये सबकी खुशी को मातम में बदल देता है।।
सब लोग त्योहार मनाओ पर ध्यान रहे इतना,
किस परिवार पर किसका बोझ है कितना।।
ध्यान से त्यौहार मनाते रहो जिंदगी बचाते रहो,
खुद न पियो और दूसरों को भी पीने से बचाते रहो।।
यह संदेश मैं सारी समाज को दे रहा हूं,
बस अपनी कलम यहीं पर रोक रहा हूं।।
होली विरह गीत
भींग जाई चुनरी,भींग जाई चुनरी,रहय देव देवर भींग जाई चुनरी।
पिया नाही आए जिया नाही लागै,मोरी बतिया से काहे गए मुकरी।।
रहय देव देवर…एक बरस पर होरी आवै, हां होरी आवै,
सबकै कंत पर मोर नाही आवै, हां मोर नाही आवै।
मोर फूटि भागि कुछ नाही लखावै, हां नाही लखावै।
मन नाही माने मोर सुध बुध बिसरी।।
रहय देव देवर भींग जाई चुनरी…….
देख फागुन कै हुड़दंग होली, हां हुड़दंग होली,
अईहौं कंत तव भिगी मोर चोली, हां भिगी मोर चोली।
बीस बरस से नयना निहारे, हां नयना निहारे।
लागत हय कंत का मिली हमसे सुघरी।।
रहय देव देवर भींग जाई चुनरी….
कहिन,अईतय फगुनवा मा सारी रंगईबै, हां सारी रंगईबै,
नया नया जोड़ा औ गहना गढै़यबै, हा गहना गढै़यबै।
तन से खुशी भई हां मन मा समानी, हां मन मा समानी,
जानि कै भूले या मोरि सुधि गई उतरी।
रहय देव देवर भींग जाई चुनरी।।…
कंत न आए न कोई खबरै आई, न खबरै आई,
सुनी सुनी चोलिया मा के रंग लगाई, के रंग लगाई।
ई फागुन बयरिया मोर मन तड़पावै, हां मन तड़पावै।
ई फाग चौताल न मन मोर सचरी।।।
रहय देव देवर भींग जाई चुनरी।।
बड़े जतन से पापड़ बनाएन, हां पापड़ बनाएन,
मेहनत से हम सेजिया सजाएन, हां सेजिया सजाएन।
अईहौं पिया तौ खूबै बतियैबै, हां खूबै बतियैबै,
अब के खाई मोर बनाई गई कचरी।।
रहय देव देवर भींग जाई चुनरी।।
होलिका दहन
होलिका दहन फागुन मास पूर्णिमा को मानते हैं,
एक दूसरे से गले मिलते और गुलाल उड़ाते हैं।
होलिका दहन के दिन होलिका की पूजा होती है,
हम प्यार से गुझिया खाते और अबीर लगाते हैं।।
राक्षसी होलिका को जलाकर खुशियां मनाते हैं,
गाली गलौज करते और हम त्योहार मनाते हैं।
दुःख भी प्रकट करते हैं होलिका को जलाकर,
फाग गाकर झूमकर हम यह त्यौहार मनाते हैं।।
होलिका को आग में न जलने का वरदान था,
उसी घर में एक भक्त हुआ नाम प्रह्लाद था।
हिरण्य कश्यप भगवान विष्णु का शत्रु बन गया,
होलिका ने जिसे जलाना चाहा वो भक्त प्रह्लाद था।।
होलिका दहन कर अपने अंदर की बुराई को जलाते हैं,
हम अपने आत्मा की शुद्धि करते मन पवित्र हो जाते हैं।
पवित्रता का ही प्रतीक है हमारा होलिका दहन करना,
ये त्यौहार हम सब लोग मिलकर खुशियों से मनाते हैं।।
प्रणाम है तुम्हें (महिला दिवस विशेष)
प्रणाम है तुम्हें, हे जननी प्रणाम है तुम्हें..
संवेदनाओं को समझने वाली,
प्यार का अनंत परवाह करने वाली,
हे मां, तेरा ही सबसे विशाल हृदय है,
हे मां,तू ही जगत का कल्याण करने वाली।।
प्रणाम है तुम्हें, हे जननी प्रणाम है तुम्हे…
मर्यादा में रहकर कर्तव्य निभाने वाली,
हे मां,अपने ही अधिकारों का दमन करने वाली।
पुत्र के प्रति तेरा कितना अनुराग है मां,
अपने बच्चों को आन का स्वाभिमान बताने वाली।।
प्रणाम है तुम्हें,हे जननी प्रणाम है तुम्हें…..
हे मां, तुम ही तो बच्चों के जीवन में अमृत घोलती हो,
बच्चों को सीखाने के लिए तोतली भाषा बोलती हो।
अंतत प्रेम का सागर बहता रहता है तेरे मन में,
पुत्र के लिए मर्यादा लांघती सारे रिश्ते-नाते तोड़ती हो।।
प्रणाम है तुम्हें, हे जननी प्रणाम है तुम्हें…..
होली
आया फागुन मन बौराया,
सारे जग का तन हर्षाया।
कामदेव की कृपा हो गई,
देवर भाभी से प्रीत लगाया।।
होली के हैं खेल निराले,
रंग-बिरंगे सब मतवाले।
धूम मच गई बस्ती में,
सारे हो गए रंग हवाले।।
भयो भोर भीगे सब रंग में,
भाभी नाचे देवरा संग में।
मार गुलाल अबीर पिचकारी,
जैसे लड़ रहे हों सब जंग में।।
देख पति संग भाभी लजानी,
पति की प्रीत है मन में समानी।
कोमल तन और कंचन माया,
पत्नी के हृदय की गति जानी।।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस
हम महान थे, महान है और महान रहेंगे,
हमारे साथ वैज्ञानिक और विज्ञान रहेंगे।
रामन प्रभाव की खोज करने वाले रमन जी,
28 फरवरी का दिन याद था और याद रहेंगे।।
भारत रत्न भौतिकी नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले,
आप ही ने तो लेनिन शांति पुरस्कार प्राप्त करने वाले।
ध्वनि कंपन और कार्यों का सिद्धांत भी दिया था आपने,
वाद्ययंत्रों की भौतिकी पर का लेख तैयार करने वाले।।
पढ़ाई के क्षेत्र में प्रकाश की क्रांति फैलाई आपने,
रामन प्रभाव से प्रकाश की ज्योति जलाई आपने।
पारद प्रकाश की तरंग लंबाई में परिवर्तित किया,
स्पेक्ट्रोस्कोप की बात जनजन तक पहुंचाई आपने।।
भारतीय गौरव बनकर देश की आप शान बने,
युवाओं के प्रेरणा स्रोत और सबका अभिमान बने।
आपकी योग्यता से हर कोई प्रभावित हो गया,
भारतीयों के हृदय के आप ही शिखर सम्मान बने।।
पुलवामा हमला
पुलवामा हमले को हम और राष्ट्र कैसे भूल सकते हैं,
उस पाकिस्तान की गद्दारी को हम कैसे भूल सकते हैं।
बस पर सवार जवानों पर वार करने वाले कायर,चौगले,
आदिल अहमद डार हत्यारे,तुम्हें हम कैसे भूल सकते हैं।।
भूल नहीं सकता है भारत हे लाल तेरी कुर्बानी को,
भूल नहीं सकता है भारत मां की आंख से बहते पानी को।
भूल नहीं सकता है भारत तेरे वीरता और पराक्रम को,
भूल नहीं सकता है भारत शहीदों की अमर कहानी को।।
तेरी वीरता की गाथा को लिखना बस की बात नहीं है,
तेरे सामने भिड़ जाए दुश्मन,ये दुश्मन की औकात नहीं है।
तेरे चाल की आहट पाते ही जब दुश्मन ही थर्राता हो,
सोते हुए कायरो पर, कभी वीर करते आघात नहीं है।।
वीर सपूतों को यह राष्ट्र समर्पित श्रद्धांजलि करता है,
बलिदान तुम्हारा व्यर्थ नहीं गया राष्ट्र अभिमान करता है।
उन कायरो को उन्हीं की भाषा में राष्ट्र ने पाठ पढ़ाया है,
बारम्बार भारत देश आपका वंदन व अभिनंदन करता है।।
मातृभूमि की रक्षा के खातिर तूने अपने प्राण गंवाए थे,
दुश्मन को दुश्मन की भाषा में ही दुश्मन को समझाए थे।
सो गए थे धरा पर मां का आंचल पकड़ कर चिर निद्रा में,
तेरे पराक्रम,शौर्य को देखकर दुश्मन तेरे पास न आए थे।।
संत रविदास
संत शिरोमणि, जगत संत गुरु बन सारे जग को भाए,
सतगुरु बनकर सारे जग में, रविदासीय पंथ अपनाए।
माघ पूर्णिमा दिन रविवार काशी की प्यारी वो भूमि,
आत्मज्ञान का मार्ग दिखा जात-पात का भेद मिटाए।।
संतोखदास था नाम पिता का, कलसांदेवी माता प्यारी,
संत रविदास को जन्म देकर हो गई सारे जग में न्यारी।
कुरीतियों को दूर भगाकर जग में किया ज्ञान का उजाला
विनम्रता तथा श्रेष्ठता की जग में जलती है ज्योति तुम्हारी।।
अंधविश्वास और आडंबर को गुरु तूने है दूर भगाया,
अज्ञानता को ज्ञान दिया और दानव को मानव बनाया।
सारे जनमानस को समझ करके नेक राह पर तुम लाए,
इंसानों को उनका मूल्य और कर्तव्यों को है बतलाया।।
आप बड़े दयालु, दानवीर थे जग को ज्ञान सिखाया,
सामाजिक एकता की ताकत है जन-जन को समझाया।
कोई ऊंच-नीच नहीं है इस जग में सबका मालिक एक है,
जनसाधारण की भाषा में कहकर सबका भ्रम मिटाया।।
पथ-प्रदर्शक
पथ तभी मेरा गुलजार होगा इस जमाने में,
क्या रखा है यारों झूठा ही सब दिखाने में।
मेरे गुरु की कृपा मुझ पर बनी रहे हमेशा,
नमन है गुरु आपको,जीवन सफल बनाने में।।
शिक्षक की हमारे पथ-प्रदर्शन है मेरे इस जीवन का,
शिक्षक ही प्रेरणा,आत्मविश्वास है मेरे इस उपवन का।
शिक्षक के चरणों में यह जीवन को समर्पित करता हूं,
शिक्षक ही निर्माता है मेरे इस प्यारे से वतन का।।
मेरी बुद्धि को प्रखर कर पथ को दिखलाने वाला,
अच्छा-बुरा,झूठा-सही का फर्क समझाने वाला।
मेरा गुरु ही तो है मेरे जीवन का आधार स्तंभ,
मेरे जीवन का अगुवा,मुझे मार्ग बतलाने वाला।।
मेरी हर इक गलती पर बार-बार टोकने वाला,
गलत पथ,गलत संगति से मुझको रोकने वाला।
मैं क्या हूं, मुझे क्या करना चाहिए क्या नहीं,
सारथी बन मेरे जीवन के रथ को हांकने वाला।।
मन में मानवता और भाई-चारा पैदा करने वाला,
मेरे मन में दूसरों के प्रति प्रेम का भाव भरने वाला।
मेरे गुरु, मेरे माता-पिता ही अच्छे पथ-प्रदर्शक हैं,
ये तीनों ही है,जो मेरे तीनों तापों को हरने वाला।।
मेरे अच्छे पथ-प्रदर्शक मेरे मां-बाप हैं,
मेरे पथ-प्रदर्शन मेरे गुरुजन आप हैं।
मेरे गुरु ने मेरे जीवन को सुंदर बनाया,
मेरे ऊपर मेरे गुरुजन का ही प्रताप है।।
सारी चुनौतियों से निपटना सिखलाया है,
सारी परेशानियों से टकराना सिखलाया है।
मुझे हिम्मत, ताकत और ढांढस भी दिया,
बुरे वक्त में नहीं घबराना,भी सिखलाया है।।
सशक्त बनाकर मुझे,मुझे नई राह बतलाया,
मेरे पथ-प्रदर्शक का तस्वीर सामने उभर आया।
मेरी जिम्मेदारियां क्या है,क्या है मेरी जिंदगी,
मेरे पथ-प्रदर्शक ने मुझे उससे अवगत कराया।।
मेरी छोटी सी काया को बड़ा और महान बनाया,
अपरिचित था मैं, मुझे जग से परिचय कराया।
स्वयं चलो राह पर किसी को न देखो गिरते हुए,
गुरु, पथ-प्रदर्शक बन कदम से कदम मिलाया।।
बनोगे कुछ, कुछ तुम हासिल तो कर ही लोगे,
सही ढंग से अपनी जिम्मेदारियों को ढो ही लोगे।
बस अब अच्छे पथ-प्रदर्शक की जरूरत है तुम्हें,
तुम एक दिन अपने देश की तस्वीर बदल ही दोगे।।

प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी
गोंडा,उत्तर प्रदेश
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