साहित्यिक शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होते हैं
शिक्षक कभी भी साधारण नहीं होता I प्रलय और निर्माण उसकी गोद में खेलते हैं, आचार्य चाणक्य के ये शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक हैंI तक्षिला के आचार्य चाणक्य ने किस तरह पूरे भारत के इतिहास को बदला था, ये सभी जानते हैंl श्रेष्ठ साहित्य किसी ज्ञानवान की ही कृति होती आई हैंl
भारत के प्राचीन ग्रंथों में आचार्य सुश्रुता से लेकर वाल्मीकि ऋषि द्वारा बनाये गए मानवता के लिए अद्भुत ज्ञान के उपहार उपलब्ध हैंl आज भी विश्व में लिखी जाने वाली अधिकतर पुस्तकों में अध्यापकों का सहयोग पाया जाता हैl ज्ञान के लिए दिन प्रति दिन बढ़नेवाली जिज्ञासा ही अध्यापकों को लिखने का सामर्थ्य और प्रेरणा देती हैl
अध्यापक ज्ञान की ज्योत जलाकर ने केवल बच्चों के भविष्य का निर्माण करता है बल्कि राष्ट्र निर्माता भी होता है। राष्ट्र का भविष्य बालक होते हैं और बालकों का भविष्य एक अध्यापक के हाथ में होता है। देश की असली संपत्ति तो बैंकों में नहीं स्कूलों में होती है।
जब कोई अध्यापक अपने शिष्य को कामयाबी के शिखर पर देखता है तो वह बहुत प्रफुल्लित होता है, उसे लगता है जैसे उसका जीवन सफल हो गया हो। यही कारण है कि हमारे साहित्य हो या अन्य धर्मग्रंथ हो उनमें गुरु का दर्जा बहुत ऊंचा बताया गया है। कहते हैं कि गुरु ही ब्रह्मा है गुरु ही विष्णु है, गुरु ही महेश्वर है।
कबीरदास जी भी कहते हैं :
“गुरु गोविंद दोऊ खड़े ,काके लागू पाय।”
अध्यापक समाज का एक ऐसा वर्ग है जो अपने जीवनकाल में उन पौधों का संरक्षण विकास करता है एवं उनकी परवरिश करता है जो पूरी सदी राष्ट्र रुपी उपवन को फल, फूल और सुगंध देते हैं।
जब कोई अध्यापक लेखन कार्य भी करता है तो पूरा समाज ही इसका शिष्य बन जाता है।
उसका दोहरा समर्पण उसके जीवन को ही सार्थक नहीं बनाता बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का निर्माता बन जाता है।
अध्यापक तो वैसे ही पूज्य होता है अगर वह साहित्यकार भी हो तो फिर उससे बड़ा भाग्यविधाता कौन हो सकता है।
जैसे सूर्य से ही सभी नक्षत्र दीप्यमान हैं,ऐसे ही शिक्षक शिल्पी यानी साहित्यकार भी सभी वर्गों, समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
हमने कई राज्यों के श्रेष्ठ शिक्षक और साहित्यकारों से संपर्क किया। उनकी रचनाएं विभिन्न मंचों से प्राप्त होती रहती हैं जो राष्ट्र और समाज को दिशा प्रदान करती हैं।
आइए इन महानुभाव महान शिक्षक शिल्पियों को आपसे मिलवाते हैं:
जो अध्यापक भी हैं और साहित्यकार भी है:
डॉ चंद्र दत्त शर्मा रोहतक, डॉ राम अवतार कौशिक, श्रीमती सीमा शर्मा रोहतक,,
अनिल खरब सोनीपत,
चंद्रावती दीक्षित घरौंडा ,
सुदेश कुमारी खांडा ,
डॉक्टर गौरी अरोड़ा ,
डॉ पुष्पा कुमारी ,
परीक्षित वत्स,
डॉ आशुतोष रोहतक ,
डॉ कपिल कौशिक रोहतक ,
डॉ मीनाक्षी कौशिक रोहतक ,
डॉक्टर सीमा वत्स रोहतक ,
डॉ राजकुमार जमदग्नि , डॉक्टर रेणुका खंडिया रोहतक,
डॉक्टर मंजीत भारतीय रोहतक,
डॉक्टर मंजीत खान मजीद भावड़िया सोनीपत,
डॉक्टर जोगेंद्र ,
पवन गहलोत रोहतक ,
आलोक अजनबी रोहतक,
जय सिंह जीत झज्जर,
डॉक्टर निधि राठी रोहतक ,
मनीष भारद्वाज द्विज सोनीपत,
कमलेश पालीवाल ,
श्रीनिवास एन ,
दिलीप कुमार शर्मा,
डॉक्टर प्रतिभा स्मृति,
डॉक्टर फूल कुमार राठी रोहतक ,
मास्टर जयभगवान यादव हिसार,
दयाराम शास्त्री ,
डॉक्टर विपिन गुप्ता रोहतक ,
डॉक्टर अंजना गर्ग,
डॉक्टर राजल गुप्ता रोहतक ,
डॉक्टर वेद प्रकाश श्योराण रोहतक,
श्री खेमचंद सहगल झज्जर,
राजीव पाराशर गोहाना,
कृष्ण कुमार निर्माण,
डॉक्टर रमाकांता रोहतक ,
प्रो शाम लाल कौशल रोहतक,
डॉक्टर मधुकांत रोहतक ,
बृजेश कुमार शर्मा सहारनपुर,
स्नेह विशेष रोहतक.
दिनेश चंद्र पाठक,
डॉक्टर गीतू धवन,
प्रो सुचेता यादव ,
मास्टर भूताराम राजस्थान ,
नरेश शर्मा,
नरेश कुमार नरवाल,
प्रो ज्योति राज,
शिशिर देसाई,.
राजबीर खोरड़ा,
रामधारी खटकड़,
सीमा यादव पटौदी,
डॉक्टर आशा कुमारी ,
पुष्प लता आर्या ,
रश्मि ,
श्रीपुरुषोत्तम,
श्रीनिवास शर्मा रोहतक,.
डॉक्टर संदीप,
डॉक्टर जशभाई पटेल गांधी नगर,
डॉक्टर इला जायसवाल,
रोशनी बलूनी,
महेंद्र सिंह सागर भिवानी,
प्रवीन पारीक,
कमलेश गोयत ,
बलबीर सिंह वर्मा वागीश,
विनोद सिल्ला टोहाना,
श्रीभगवान बव्वा,ममता शर्मा,
डॉक्टर कविता शर्मा रोहतक ,
डॉक्टर राजेंद्र कुमार अवस्थी।
ये साहित्यकार जो अध्यापन भी करते है, अपने छात्रों में साहित्य के बीज बो कर मानवता का बीज बो रहे है।

लेखक : डॉक्टर चंद्रदत्त शर्मा चंद्रकवि रोहतक
9671559666
अध्यक्ष शैली साहित्यिक मंच भारत, हिंदी प्रवक्ता।
हरियाणवी साहित्य मंच
अखिल भारतीय राष्टभाषा मंच।
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