भूतही | Bhoothi

आकांक्षा अक्सर बीमार रहा करती थी। लेकिन उसे जब किसी डॉक्टर को दिखाया जाता था वह कोई रोग नहीं बताता था। बस दर्द की गोली दे दिया करता। वह भी नहीं समझ पा रही थी कि आखिर उसे हो क्या गया है।

उसके परिवार में झांड फूंक अकसर होता रहता था। एक बार उसे उसकी दादी ने किसी के कहने पर एक मजार पर ले गए। जहां अक्सर वह बाल खोल करके झूमती , उटपटांग बोलतीं थीं। कभी कभी उसका पति उसे भूतही कहकर चिढ़ाता भी था। ऐसा कहने पर वह अपने पति से लडने लगती थी।

वर्तमान समय में देखा जाए तो पूरा समाज मजार दरगाह आदि की पूजा, भूत प्रेत , ओझाई सोखाई आदि जैसे अंधविश्वास में जकड़ा हुआ है । भोले भाले हिंदुओं की बहू बेटियां इनके चक्कर में फंसकर अपना दीन धर्म सब गंवा रही है।

यह सब बहकावे की बातें हैं कि किसी दरगाह, मजार आदि की पूजा से भूत प्रेत आदि ठीक होता है । आज जहां देखो वही मजार, दरगाह के साथ ही सड़क के किनारे कोई पीपल का वृक्ष हो तो वहां भी लोग लंगोट आदि बांध कर पूजना शुरू कर देते हैं ।

कभी नहीं जानने का प्रयास करते कि उनकी पूजा आदि से कुछ होता भी है या नहीं । बस भीड़ देखा नहीं की पूजा शुरू कर देते हैं। औरतें इसमें कुछ ज्यादा आगे होती हैं । भूत भी उनको ही ज्यादा पकड़ते हैं । सत्य तो यह है कि भूत नाम की दुनिया में कुछ नहीं होता जो मर गया वह क्या करेगा भूत बीते हुए समय को कहते हैं?

यह बातें आकांक्षा का पति उसे समझाने का प्रयास करता लेकिन उसके मन में जो वहां भर गया था वह निकल नहीं रहा था। उसने बहुत समझाने का प्रयास किया कि यह सब बेकार की बातें हैं ऐसा कुछ नहीं होता है। लेकिन आकांक्षा थी कि माननें को तैयार नहीं थी।

अक्सर देखा गया है कि कभी कोई स्त्री या पुरुष को जब भूत प्रेत आदि का इलाज कराने ले जाया जाता है तो यह तरह-तरह की क्रियाएं करते हैं और कुछ ना समझ में आए ऐसी बातें बोलते हैं। जो व्याधि ग्रस्त व्यक्ति को कुछ अजीब सा लगता है। या ताबीज आदि देते हैं।

या फिर कुछ राख भस्म लवंग आदि खिलाते हैं। इससे यदि व्याधिग्रस्त स्त्री के विचारधारा बदलती है तो ठीक नहीं तो कहते हैं की भूत बहुत बलवान है इसके लिए सवा मन आटा, घी, दूध, बकरा ,बकरी मुर्गा शराब देना पड़ेगा । इसको देने के बाद भी जब भूत ग्रस्त स्त्री नहीं ठीक होती है तो अन्य कोई बहाना बनाने लगते हैं ।

कई-कई स्त्रियों को भूत प्रेत कुछ पकड़ा रहता नहीं मात्र बहाने बाजी किया करती हैं । या फिर अपने घर परिवार, पति को परेशान करने के लिए नाटक करती है जो कि उनकी मानसिक समस्या है ।इसमें किसी भी भूत प्रेत आदि की कोई बात नहीं होती।

आकांक्षा को उसका पति समझाया करता कि सब मानसिक व्याधि है जिसका ठीक से उपचार किया जाए तो वह ठीक हो जाता है। उसका पति उसे कई बार दवाई लाकर दिया। लेकिन किसी ओझा ने उसे बता दिया था कि तुम दवाई खाओगी तो और बीमार पड़ जाओगी। अक्सर वह दवाई पति के न रहने पर फेंक दिया करती।

स्त्रियों के भूत आपकी समस्या का कारण प्रेम का भाव भी है। भूत का नाटक करके वह अपने पति और परिवार का प्रेम पाना चाहती है ।जिस स्त्री को भूत प्रेत आदि की समस्या हो हमें चाहिए उसे खूब प्रेम करें । उसकी दुख दर्द पीड़ा को समझने का प्रयास करें ।भूलकर भी किसी मजार दरगाह पर न जाए। किसी भी प्रकार कि ओझाई सुखाईं के चक्कर में ना फंसे।

शहरों की अपेक्षा गांव में आज भी यह समस्या बहुत विकराल रूप में जड़ जमाए हुए हैं। यह एक प्रकार का मानसिक रोग है। जब किसी आदमी को यह मालूम पड़ता है कि अमुक स्थान पर भूत रहता है और उसे उसी स्थान से गुजरना पड़ता है तो यह बात उसके दिमाग में बार-बार आने लगती है ।

उसका तंत्रिका तंत्र कमजोर पड़ जाता है । वह भूत के बारे में सोचने लगता है। उसका लंबा चौड़ा शरीर और डरावना चेहरा दिखाई पड़ने लगता है । उस आदमी का शरीर भय से रोमांचित हो जाता है । वह अपनी आंखों के सामने इस तरह का प्रतिबिंब देखता है जो उसके अपने ही दिमाग में मौजूद होता है।

वह सोचता है कि यह जो मुझे सामने दिखाई दे रहा अब जरूर मेरा गला दबा देगा । ऐसा सोचते ही उस प्रतिबिंब के नाखूनी पंजे का प्रतिबिंब उसकी ओर बढ़ने लगता है । तब वह आदमी अपनी रक्षा के लिए अपने पंजों से उस प्रतिबिंब रूबी पंजे को छुड़ाता है लेकिन वह छूट नहीं पाता है। इस प्रकार से वह जी जान लगाकर अपने ही नाखूनों से अपनी ही त्वचा को नोज डालता है और बेहोश हो जाता है । लोग कहते हैं उसे भूत ने नोच डाला है।

कभी-कभी रक्तचाप बढ़कर हृदय गति रुक जाती है और वह मर भी जाता है। तब कहा जाता है कि उसे भूत ने मार डाला। कई बार लोग भूत रूपी प्रतिबिंब से भिड़ जाते हैं । लड़ने के लिए जैसे ही हाथ पैर हिलाते हैं। उनका शरीर असंतुलित हो जाता है और वह गिर पड़ते हैं क्योंकि कोई भी प्रतिबिंब से नहीं लड़ सकता।

यह सुना गया है कि जब भूत पर डंडा चाकू या अन्य किसी घातक चीज से हमला किया जाता है तो उसका कोई नुकसान नहीं होता है। असल में प्रतिबिंब या छाया पर किसी हमले का कोई असर हो ही नहीं सकता। आकांक्षा का पति उसी विभिन्न प्रकार से समझाने का बहुत प्रयास करता लेकिन जिसके मन में भूत का भय बस चुका हो उसे समझाना थोड़ा कठिन होता है।

आकांक्षा जानती थी कि हमारा पति भूत प्रेत नहीं मानता इसलिए ऐसी क्रियाएं वह अपने मायके जाकर के किया करती थी। भूत प्रेत के चक्कर में वह अपना दिन धर्म सब गवा रही थी। एक बार जब वह मायके में थी उसे भयानक मासिक की समस्या हुई। ज्यादा खून बहने के कारण उसका शरीर सूखकर कांटा हो गया था।

फिर भी उसके मायके के लोगों ने उसे किसी अच्छे डॉक्टर को ना देख कर ओझाई सोखाई करते रहे। जिसके बीमारी घटने की जगह और बढ़ती ही जा रही थी। उसका पति उस समय अपनी नौकरी करने गया हुआ था। जब वह पूछता था तो वह झूठ बोल दिया करती थी की सब ठीक है।

अक्सर स्त्रियों में मायके का प्रभाव ज्यादा होता है। जैसा घर का संस्कार होता है उसी में बच्चे भी ढलने लगते हैं। महिलाओं में हिस्टीरिया रोग के कारण सिर में चक्कर आना , बेहोश हो जाना, या फिर बहकी बहकी बातें करना, अकारण हंसना या रोना आदि लक्षण पाए जाते हैं अशिक्षित लोग इन लक्षणों को भूत-प्रेत मान लेते हैं। बच्चे भी प्रायः भूत प्रेत आदि के डरावने स्वप्न देखते हैं ।

अशिक्षित माता-पिता बच्चों को प्राय डरवाते रहते हैं जिससे उनके मन में भय समा जाता है । अबोध बच्चों के मन में भूत प्रेत का भय माता-पिता ही भर देते हैं। इस प्रकार बच्चों के लिए शैतानों और राक्षसों के भयानक सपने देखना एक आम बात हो जाती है।

कभी-कभी भांग , धतूरा आदि कोई नशीला पदार्थ किसी व्यक्ति को चाय या प्रसाद आदि में मिलाकर खिला दिया जाता है । तब उसे मानसिक विकृति के कारण भूत प्रेत का भ्रम होने लगता है । ऐसे भूत वास्तव में नशा को उतारने के नाम पर ओझा सोखा उस व्यक्ति के परिजनों से खूब धन ऐंठा करते हैं।

आकांक्षा का पति जब घर आया तो उसकी हालत देखकर उसे बहुत गुस्सा आया। लेकिन वह बहुत समझदार था। वह यह बात अच्छी तरह से समझ चुका था कि आकांक्षा को भूत का भय बहुत गहराई के साथ उसके मन में समा चुका है। जिसे गुस्से से नहीं बहुत धैर्य और प्रेम के साथ समझाने की आवश्यकता है।

इसी बीच आकांक्षा गर्भवती हुई तो उसके मां-बाप किसी ना किसी बहाने बाबाओं के चक्कर लगवाते रहे। उसका पति डॉक्टरों की सलाह से दवाई भी लाकर देता। लेकिन भूत के भय ने उसे ऐसा ग्रसित कर लिया था कि वह अक्सर दवाइयों को फेंक दिया करती थी। उसने एक सुंदर बेटे को जन्म दिया। अब पति के ना रहने पर भी वह बच्चे की सेवा करते अपनी बीमारी भूल सी गई।

अब वह बीमार भी कम पड़ती थीं। इसी बीच कोरोना काल में उसके पति की नौकरी छूट गई। और वह घर पर आकर रहने लगा। पति के साथ रहते हुए वह भूल ही गई थी कि उसे कभी भूत प्रेत पकड़ा था। अब वह बहुत खुश रहा करती।
अक्सर देखा गया है कि जिन स्त्रियों के पति बाहर काम करते हैं वह बहुत उदास रहा करती हैं।

पति का सानिध्य मिलने के साथ है सारी उदासी खो जाती है। इसी बीच आकांक्षा फिर गर्भवती हुई और उसने एक सुंदर सी बच्ची को जन्म दिया। आकांक्षा के लिए अब दोनों बच्चे हैं उसके संसार बन गए थे। उसकी बीमारी कहां गायब हो गई उसे पता ही नहीं चला।

योगाचार्य धर्मचंद्र जी
नरई फूलपुर ( प्रयागराज )

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अंधविश्वास | Andhvishwas

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