Category: बाल साहित्य

  • चंदा मामा दूर के | Chanda mama door ke

    देखो ना मां,आज मैं मामा से पहली बार मिला हूं,और जैसा तुमने कहा था मामा तो बिलकुल वैसे ही है, प्यारे प्यारे। जैसे ही मैं उनसे मिलने पहुंचा बाहें फैलाकर उन्होंने मुझे गले लगा लिया। मां अब चंदा मामा दूर के नहीं रहे।मामा बता रहे थे कि अब वो हमारे साथ ही रहेंगे।इसका मतलब मां…

  • चंदामामा | बाल मनुहार | पत्र

    प्रिय चंदा मामा सुनो ना, चंदा मामा! मां जब मैं आपसे मिलने की जिद करता हूं तो मुझे थाली में पानी भरकर तुम्हे दिखाती है। कहती है कि जैसे तुम्हारे पापा वीडियो कॉल करते है ना वैसे ही है । जब पूछता हूं चंदा मामा बोलते क्यू नही तो कहती है ‘ उन्हें बहुत से…

  • बाल कविता – सुबह की गुनगुन

    बाल कविता – सुबह की गुनगुन ( Bal Kavita – Subah ki gungun )    चिड़िया चहकी चूंँ चूंँ चुन सुबह हुई अब जागो तुम करो मातृभूमि,माँ-पिता को नमन कुछ प्रभु चरणों में ध्यान उसके बाद ही शुभ काम सुनो दादी की प्रार्थना धुन। क्यूँ न स्कूल जाने से पहले थोड़ा योग भी कर लो…

  • बाल दिवस पर विशेष बाल कविता | Bal diwas kavita

    बाल दिवस पर विशेष बाल कविता ( Bal diwas par vishesh bal kavita )      चाचा नेहरु न्यारे थें हम बच्चों के प्यारे थें चाचा फिर तुम आओ ना हमको गले लगाओ ना   दूर जहां तुम जाओगे बच्चों से मिल आओगे हमको साथ धुमाओ ना बच्चों से मिलवाओ ना,   गुब्बारे हम टांगेंगे…

  • बाल कविता | Hindi bal kavita

    बाल कविता ( Bal kavita )   अ से अनार,आ से आम, ये दोनो है फलों के नाम।   इ से इमली,ई से ईख, अच्छी बाते सदा सीख।   उ से उस्तरा,ऊ से उल्लू, पढ़ो लिखो बनो न उल्लू।   ए से एडी ऐ से बनी है ऐनक, टी वी कम देखो,नही लगेगी ऐनक  …

  • बाल कविता | Bal kavita

    चिड़िया रानी ( Chidiya rani ) चिड़िया रानी हमारे घर पर आई सब बच्चों के मन में खुशियां लाई। दूब फूंस इकट्ठा कर बनाया घोंसला, देख घोंसला खुशियां अपार है लाई। छत के अन्दर डाल घास और तिनके सुन्दर सुन्दर बना दिया करी चतुराई। अण्डे देती दो तीन देख रहे थे नजरभर, हाथ लगा कर…

  • हम नन्हे बच्चे हैं | बाल साहित्य रचना

    बाल साहित्य रचना ( Bal Sahitya Rachna )   हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं तुतलाती तुतलाती बोली मन के सच्चे हैं बढ़  जाएंगे  कदम  हमारे  खुले आसमान में अच्छे काम करेंगे हम भी भारत मां की शान में तूफानों  से  टकराना  तो  खूब  मन को भाता है आगे बढ़ना और संभलना यह…