बाल साहित्य रचना

हम नन्हे बच्चे हैं | बाल साहित्य रचना

बाल साहित्य रचना

( Bal Sahitya Rachna )

 

हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं
तुतलाती तुतलाती बोली मन के सच्चे हैं

बढ़  जाएंगे  कदम  हमारे  खुले आसमान में
अच्छे काम करेंगे हम भी भारत मां की शान में

तूफानों  से  टकराना  तो  खूब  मन को भाता है
आगे बढ़ना और संभलना यह भी हमको आता है

वीर तिलक करे माटी का सदा रक्त का नाता है
हम हैं कर्मवीर भारत के धरती भारत माता है

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

सनातन नववर्ष | Sanatan nav varsh par kavita

Similar Posts

  • चिड़िया रानी | Kavita Chidiya Rani

    चिड़िया रानी ( Chidiya Rani )   चिड़िया रानी चिड़िया रानी क्यो करती इतना मनमानी! रोज सवेरे तुम हो आती आकर पुन:कहां हो जाती !! चाहूं साथ खेलना तेरे क्या खेलोगी साथ तुम मेरे ! आना-जाना अब तुम छोड़ो खेलो साथ में मिलकर मेरे !! देखो फिर ना फुर हो जाना नये नये नित गीत…

  • आओ पेड़ लगाएं

    आओ पेड़ लगाएं बच्चो आओ पेड़ लगाएं।अच्छे से फिर हम उन्हें बचाए,पेड़ो को हम देखे भाले।समय समय पर पानी डालें, पेड़ो को हम खूब सजाएं।पेड़ो पर भी चित्र बनाएं,पेड़ो पर भी बच्चे खेले।उन पेड़ो पर झूला झू‌ले, पेड़ो पर हम खेले कूदे।झूला डाल कर झूला झू‌ले। असदुल्लाह एजाजकक्षा 6विद्यालय उच्च प्राथमिक विद्यालय बनकसही यह भी…

  • हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं | Bal Sahitya Rachna

    हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं ( Bal Sahitya Rachna )   हम हंसते गाते छोटे छोटे नन्हे बच्चे हैं तुतलाती तुतलाती बोली मन के सच्चे हैं   बढ़ जाएंगे कदम हमारे खुले आसमान में अच्छे काम करेंगे हम भी भारत मां की शान में   तूफानों से टकराना तो खूब मन को…

  • तितली रानी | बाल कविता

    तितली रानी ( Titli Rani ) तितली रानी ज़रा बताओ,कौन देश से आती हो।रस पी कर फूलों का सारा,भला कहाँ छिप जाती हो। इधर उधर उड़ती रहती तुम,मन को बड़ा लुभाती हो।अपने सुन्दर पंखों पर तुम,लगता है इठलाती हो। सब फूलों पर बैठ बैठ कर,अपनी कला दिखाती हो।पास मगर आने में सबके,तुम थोड़ा सकुचाती हो।…

  • महत्त्व समय का | Mahatva Samay ka

    महत्त्व समय का ( Mahatva samay ka )    सुनो सुनो प्यारे बच्चे, मन से सच्चे, अक्ल के कच्चे। आओ “समय की कहानी” सुनाऊं, बात पते की तुम्हें बताऊं। प्रातः समय से जो उठता है, सबसे आगे वो रहता है। काम वक्त से कर लेता है। नहीं समय जो खोता है। आलस्य की चादर ओढ़…

  • पिकनिक | वनभोज

    पिकनिक  ( Picnic ) जाता नहीं कोई रोज, मनाने को वनभोज, करते मुझे क्यों हो तंग, चलो पिकनिक हर रोज, बच्चों जरा पढ-लिख लो, खुल गई है स्कूल, फिर छुट्टी के दिन चलेंगे, करेंगे छुट्टी वसूल, बड़े-बूढ़े और बच्चे खुश, हो जाते हैं पिकनिक से, सारी चिंताएं वो भूल, वहीं हो जाते हैं मसगूल, जाते…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *