Category: भोजपुरी

  • गीत तिरंगा के | Geet Tiranga Ke

    गीत तिरंगा के ( Geet Tiranga Ke ) तीन रंग तिरंवा के शान बाटे गोरिया तीन रंग तिरंवा के शान बाटे गोरिया, हमार रंग आपन, जान बाटे गोरिया, हमार,,,,। तीन रंग तिरंगवा के दिहीं सलामी एतना सतवलस अंगरेजवा हरामी लागल एह में परान बाटे गोरिया, हमार,,,। खुदी शेखर के बा जोड़ी दिआइल ललना करेजवा के…

  • हे राजा हमके चौपाटी घुमाय द्या | Hey Raja

    हे! राजा हमके चौपाटी घुमाय द्या माया नगरिया कै चेहरा दिखाए द्या, हे! राजा हमके चौपाटी घुमाय द्या। (2) सोना और चाँदी जैसी मुंबई नगरिया, गम-गम-गमकै-गमकै लै रानी ई डगरिया। जुहू बीच कै भुट्टा तू पहिले खियाय द्या, हे! राजा हमके चौपाटी घुमाय द्या। माया नगरिया कै चेहरा दिखाए द्या, हे! राजा हमके चौपाटी घुमाय…

  • होलिया में होले छेड़खानी | Holiya me Hole

    होलिया में होले छेड़खानी   रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। कोरी बा चुनरिया हो,कोरी बा चुनरिया, कोरी बा चुनरिया हो,कोरी बा चुनरिया, रगड़ा न गलवा हमार, अबहिन कोरी बा चुनरिया। लाले-लाले होंठवा कै हमरी ललइया, बनके भंवरवा न लूटा ई मलइया। न लूटा ई…

  • उड़त बा रंगवाँ | Urat ba Rangwa

    उड़त बा रंगवाँ ( Urat ba Rangwa )    उठावा न साया घड़ी-घड़ी, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली, उड़त बा रंगवाँ गली-गली। (2) गमकत बा तोहरो ई फुलवा की क्यारी, लाल-लाल हुई मिट्टी,लाल हुई साड़ी। लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी, लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी। भरी पिचकारी…

  • हमरे देशवा कै दुनिया में मान बा | Hamre Deshwa

    हमरे देशवा कै दुनिया में मान बा! ( Hamre deshwa ke duniya me maan ba )    हमरे देशवा कै दुनिया में मान बा, हम सब कै जान बा ना। ( 2 ) आन -बान -शान इसकी अजब निराली, बहती जो नदिया ऊ अमृत कै प्याली। पूरी दुनिया में सबसे जवान बा, हम सब कै…

  • बारिश के चढ़ल बा पानी | Barish ke Chadhal ba Pani

    बारिश के चढ़ल बा पानी ! ( Barish ke chadhal ba pani )    अरे रामा! बारिश कै चढ़ल बा पानी, करत मनमानी ए हरी। ( 2) गाँव -शहर ऊ नदिया डूबल, मक्का,अरहर,धान ऊ डूबल। अरे रामा! देवरा करत छेड़खानी, चढ़ल बा पानी ए हरी। अरे रामा! बारिश कै चढ़ल बा पानी, करत मनमानी ए…

  • आयल फगुनवाँ घरे-घरे | Bhojpuri Holi Geet

    आयल फगुनवाँ घरे-घरे! ( Ayal fagunwa ghare – ghare )    आयल फगुनवाँ घरे -घरे, चोलिया भीगै तरे -तरे। (2) होली है…….. बाजै लै ढोल औ बाजै मृदंग, उड़े ग़ुलाल लोग पीते हैं भंग। कोई न होश, न कोई बेहोश, मारे पिचकारी खड़े -खड़े। आयल फगुनवाँ घरे -घरे, चोलिया भीगै तरे -तरे। (2) होली है…..…

  • बुढ़िया | Budhiya Bhojpuri Kavita

    बुढ़िया ( Budhiya )    दूर झोपड़ी में रहे, बहुत अन्हार। ओमे से आवत रहे, मरत दिया के प्रकाश! चारों ओर सन्नाटा ,कईले रहे प्रहार। लागत रहे पेड़ पौधा अउर सब के लागल बा बुखार ना कवनो पत्ता हीलत रहे,जाने कौन रहे बात? हवा भी मोड़ लेले रहे मुंह, चलत रहे समय इतना ऐतना खराब।…

  • दिया काहे बुझ गईल | Diya Kahe Bujh Gayeel Bhojpuri Kavita

    दिया काहे बुझ गईल ( Diya kahe bujh gayeel )    दिया काहे बुझ गईल तेल के कमी से, या पईसा के नमी से सब केहु कहे सुत गईल दिया काहे बुझ गईल न कवनो आवाज, न कवनो पता हिलेला चारो तरफ काहे अंधेरा ही अंधेरा दिखेला इ शहर में कईसन हावा चलेला चारो तरफ…

  • चेहरा | Chehra par Bhojpuri Kavita

    चेहरा ( Chehra )    कहाँ गेईल ऊ माटी पे से चेहरा टाटी पे रचल बतावे कुछ गहरा गांव देहत में लऊके सुनहारा मिट गईल बा ओपे पहरा   हर टाटी पे कुछ अलग गढ़ल रहे हिरण के पिछले बाघ दऊड़त रहे जिंदगी और मौऊत दूनो झलकत रहे अइशन रहस्य ओपे मढल रहत रहे  …