Urat ba Rangwa

उड़त बा रंगवाँ | Urat ba Rangwa

उड़त बा रंगवाँ

( Urat ba Rangwa ) 

 

उठावा न साया घड़ी-घड़ी,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली।
तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली। (2)

गमकत बा तोहरो ई फुलवा की क्यारी,
लाल-लाल हुई मिट्टी,लाल हुई साड़ी।
लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी,
लाल हुई साड़ी हो, लाल हुई साड़ी।
भरी पिचकारी न करा खड़ी,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली।
तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली।
उठावा न साया घड़ी-घड़ी,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली।

गोरे-गोरे गलवा पे रंगवा लगावा,
धीरे-धीरे धार पिचकारी कै बढ़ावा।
पिचकारी कै बढ़ावा हो,पिचकारी कै बढ़ावा,
पिचकारी कै बढ़ावा हो,पिचकारी कै बढ़ावा।
सम्भाला पिचकारी ई बहुत बड़ी,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली।
उठावा न साया घड़ी-घड़ी,
उड़त बा रंगवाँ गली -गली।
तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली,
उड़त बा रंगवाँ गली -गली।

सुधार के चलनिया बनावा रेकार्ड हो,
मिली देश-दुनिया से तोहके अवार्ड हो।
तोहके अवार्ड हो,तोहके अवार्ड,
तोहके अवार्ड हो,तोहके अवार्ड,।
बुराई से हर कोई तबै लड़ी,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली।
उठावा न साया घड़ी-घड़ी,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली।
तोड़ा न सिग्नल,न तोड़ा कली,
उड़त बा रंगवाँ गली-गली।

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )

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