Holiya me Hole

होलिया में होले छेड़खानी | Holiya me Hole

होलिया में होले छेड़खानी

 

रगड़ा न गलवा हमार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया।
रगड़ा न गलवा हमार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया।
कोरी बा चुनरिया हो,कोरी बा चुनरिया,
कोरी बा चुनरिया हो,कोरी बा चुनरिया,
रगड़ा न गलवा हमार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया।

लाले-लाले होंठवा कै हमरी ललइया,
बनके भंवरवा न लूटा ई मलइया।
न लूटा ई मलइया हो,न लूटा ई मलइया,
न लूटा ई मलइया हो,न लूटा ई मलइया।
समझा न हमके गँवार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया।
रगड़ा न गलवा हमार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया। ( 2)

रंगवाँ लगाउब जहाँ-जहाँ अच्छा लागी,
केतना सपनवाँ में तोहरे हम जागी।
केतना हम जागी हो, केतना हम जागी,
केतना हम जागी हो,केतना हम जागी।
डलबू तू एके का अचार ?
अबहिन कोरी बा चुनरिया।
रगड़ा न गलवा हमार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया। ( 2)

करा बरजोरी नाहीं देखा मोर तलवा,
केहू कै अमानत बाटी उहै छुई गलवा।
उहै छुई गलवा हो, उहै छुई गलवा,
उहै छुई गलवा हो, उहै छुई गलवा,
करा न तू हमके लाचार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया।
रगड़ा न गलवा हमार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया। ( 2)

हर जगह होलिया में होले छेड़खानी,
तू हूँ लूटा मजवा ई चढ़ल जवानी।
चढ़ल जवानी हो, चढ़ल जवानी,
चढ़ल जवानी हो, चढ़ल जवानी,
रोका पिचकरिया कै धार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया।
रगड़ा न गलवा हमार,
अबहिन कोरी बा चुनरिया।

रामकेश एम यादव (कवि, साहित्यकार)
( मुंबई )

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