Category: शेरो-शायरी
देखूँ हसीन शक्ल | Ghazal Dekhoon Haseen Shakal
देखूँ हसीन शक्ल ( Dekhoon Haseen Shakal ) तुम दहर में हसीन मुझे ही अज़ीज़ हो वो प्यार की मिठास भरी ख़ास चीज़ हो देखूँ हसीन शक्ल सनम की वो भला कैसे जब रोज़ दरमियान यहाँ तो दबीज़ हो चेहरे पे हो कशिश तो निगाहें हसीन भी उसपे सनम के चेहरे के आरिज़ लज़ीज़…
फुहार | Fuhaar
फुहार ( Fuhaar ) न देखा गया, दहकना तेरा तरसना यूं बूँद बूँद को कतरा कतरा बह जाना मेरा पल में काफी न था बुझाने को तिश्नगी तेरी . . . प्यासी जो रही तू कई सावन से…. #उमड़ताप्यारआस्मांका #धरातेरेलिये लेखिका :- Suneet Sood Grover अमृतसर ( पंजाब ) यह भी पढ़ें :- बरसात | Barsaat
क्या यही प्यार है | Kya Yahi Pyar hai
क्या यही प्यार है ( Kya yahi pyar hai ) मुझे उठते बैठते तेरा ही ख़्याल सताता है, सोते जागते दिल में यही सवाल आता है। देखता हूँ व्हाट्सएप मैसेज इंस्टाग्राम चैट, हर घड़ी बस बात करने को दिल चाहता है! नहीं लगता तेरे सिवाय कहीं भी मन मेरा, तड़पते दिल को सूकून भी…
आ सनम तू प्यार कर ले | Sanam Shayari
आ सनम तू प्यार कर ले ( Aa sanam tu pyar kar le ) राह में दीवार कर ले घर अलग तू यार कर ले यूं न कर इंकार उल्फ़त प्यार तू इक़रार कर ले मत छुपा बातें कोई भी बात तू इज़हार कर ले क्या पता कब फ़िर मिले हम दो घड़ी तू…
मोहब्बत की दरिया | Mohabbat ki Dariya
मोहब्बत की दरिया ( Mohabbat ki Dariya ) अदाओं का तेरा खजाना चाहता हूँ, जवानी का तेरा तराना चाहता हूँ। चलती जिधर फूल खिलते उधर ही, रजा चलके खुद जानना चाहता हूँ। दीवानगी कुछ चढ़ी इस कदर है, कदमों में आँखें बिछाना चाहता हूँ। भीगी-भीगी रातें जलाती हैं मुझको, लगी आग को मैं बुझाना…
मैं गुलशन का फूल नहीं हूँ | Gulshan ka Phool
मैं गुलशन का फूल नहीं हूँ ( Main gulashan ka phool nahin hoon ) मैं गुलशन का फूल नहीं हूँ लेकिन फ़िर भी बबूल नहीं हूँ तू जो करें किनारा मुझसे दिल से मैं तो शूल नहीं हूँ तू जो गले लगता नहीं है मैं ऐ यार बबूल नहीं हूँ फ़ेरे तू नज़रें क्यों…
दुष्यंत त्यागी हो गए | Dushyant Tyagi ho Gaye
दुष्यंत त्यागी हो गए ( Dushyant tyagi ho gaye) आत्मा आहत हुई तो शब्द बागी हो गए। कहते कहते हम ग़ज़ल दुष्यंत त्यागी हो गए। है सियासत कोठरी काजल की रखना एहतियात, अच्छे-अच्छे लोग इसमें जा के दागी हो गए। गेह-त्यागन और यह सन्यास धारण सब फ़रेब, ज़िन्दगी से हारने वाले विरागी…
उम्मीद मेरी | Ummeed Meri
उम्मीद मेरी ( Ummeed meri ) मफऊल मुफाईल मुफाईल फऊलुन उम्मीद मेरी आज इसी ज़िद पे अड़ी है हर बार तेरे दर पे मुझे लेके खड़ी है मिलने का किया वादा है महबूब ने कल का यह रात हरिक रात से लगती है बड़ी है मैं कैसे मिलूँ तुझसे बता अहले-ज़माना पैरों में मेरे…
मेरे अहसास | Mere Ehsaas
मेरे अहसास ( Mere ehsaas ) एक मुद्दत से उसने मेरा हाल नहीं पूछा कहते हैं लफ़्ज़ों की बरसात नहीं करता एक उम्र ही गुजर गई उससे मिले बगैर सुना है अब वो किसी से बात नही करता वो एक खिडकी जो सारे शहर में चर्चा थी कहते हैं अब परिंदा वहाँ ठिकाना नहीं…