ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी को दी श्रद्धांजलि

स्वतंत्रता सेनानी परिवार कल्याण महापरिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी के शरीर छोड़कर परमात्मा शिव की गोद लेने पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

आध्यात्म और रूहानियत के क्षेत्र में बड़ी शख्सियत राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने श्रीगोपाल नारसन की कई पुस्तकों का विमोचन विभिन्न अवसरों पर किया था।

गत वर्ष राजनीतिक विंग के सम्मेलन में उत्तराखंड के राज्य मंत्री स्तर श्यामवीर सैनी को जब दादी रतनमोहिनी से मिलाने उनके आवास पर लेकर गए तो बहुत ही अपनेपन से वह मिली थी और आते रहिये कहकर भविष्य में मधुबन आने का निमंत्रण भी उन्होंने दिया था।

श्रीगोपाल नारसन ने बताया कि दादी रतनमोहिनी वास्तव में सौगातो से झोली भर देती थी।मात्र 13 वर्ष की आयु में ब्रह्माकुमारीज से जुड़ी और ईश्वरीय सेवा में समर्पित हुई दादी रतनमोहिनी ने 101 वर्षों तक अपना सार्थक जीवन जिया।उन्होंने हाल ही में अपने जीवन के 102 वें वर्ष में प्रवेश किया था।

श्रीगोपाल नारसन ने दादी रतनमोहिनी द्वारा देश विदेश की गई गई सेवाओ का उल्लेख करते हुए उन्हें ब्रह्माकुमारीज संस्था का गौरव बताया तथा उनके प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट
पोस्ट बॉक्स 81,रुड़की,उत्तराखण्ड

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • यादों के बसेरों में कुछ भुला.. कुछ याद रहा

    1992 से अन्ना उभरने शुरू हुए थे.. अकोला में दंगे के बाद जैन समाज के कुछ वरिष्ठ लोग दंगाग्रस्त क्षेत्र का निरीक्षण करने आए थे तब साथ मे अन्ना भी थे और उनको तब मैं बहुत अधिक नही जानता था। हम सब लोग चल रहे थे तो मैने अन्ना जी को कहा कि आप उधर…

  • ओर अंततः मैने बिरयानी खा ही ली..

    यह मेरे लिए बड़ी परेशानी वाली बात थी कि कोयम्बटूर में शाकाहारी होटल नही के बराबर है.. ईक्का दुक्का होंगी भी तो मेरी नजरो से नही गुजरी.. रेलवे स्टेशन पर ही होटल हरिप्रिया में मेरा मुकाम था और यही एक शाकाहारी होटल थी जहाँ मैं दक्षणी भारत का भोजन करता था।        शुरुआती कुछ दिन…

  • शरीफभाई साडी वाले

    आज अचानक एक अजनबी चेहरे को देख मन में हलचल सी मची.. लगा की इस शख्स को कही देखा है.. वो साइकल पर जा रहे थे और मै अपने बेटे मनीष के साथ हिरोहोंडा पर.. काफी आगे बढ़ जाने बाद भी मन न माना और मै गाड़ी पलट उस शख्स की और बढ़ गया। मैने…

  • खेवनहार | Sansmaran Khevan Haar

    आज मैं एक विद्यालय में गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य जी सिगरेट के कस ले रहे थे। तब से दूसरे अध्यापक भी बीड़ी का बंडल निकाल कर बांटने लगते हैं। और फिर शुरू हो जाता है जाम का दौर। ऐसा लगता है कि भठ्ठे की चिमनी विद्यालय में लग गई हो। धुआं से पूरा प्रधानाचार्य कक्ष…

  • परवरिश | Parvarish

    परवरिश ( संस्मरण )   उस दिन भी सावन का ही महिना और सोमवार का दिन था । बाबूजी (ससुर जी )शिव के अनन्य भक्त । तो उस काल विषय में माँ का पत्नी होने के नाते अनुगामिनी होना निश्चित ही था । पूरा परिवार ताल वृक्ष एक तपो भूमि है़ जयपुर से अलवर जाने…

  • चाय

    जब मैं छोटा था, 12 वर्ष का रहा होऊंगा। मैंने तब चाय बनाना सीखा ही था। तब घर में कोई भी मेहमान आता, चाय मैं ही बनाता था। मुझे चाय बनाने में खुशी मिलती थी, बड़ा मजा आता था। इसी बहाने मुझे भी चाय पीने को मिल जाती थी। एक दिन घर पर सीताराम अंकल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *