Film script Hindi
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प्रीत हमारी बचपन की

( फिल्म स्क्रिप्ट )

 

{(अन्य नाम ->कब के बिछड़े,प्रीत हमारी बचपन की,बचपन की प्रेम कहानी,हम प्रेमी सात जनम के,बचपन से पचपन तक,कब के बिछड़े,सच्ची प्रीत,रीयल लव,फिर मिले,प्रेम हमारा,प्रीत हमारी,मिलन होगा,मिलना पड़ेगा इत्यादी ||)}

–>शुरू-> छोटे से एक गांव से निकली प्यार भरी कहानी हैं, सुदीश और मेघा की, गांव के मैदान मे खेलते बच्चे,तभी एक घर का समान लादे एक गाडी से मुस्कुराती झांकती एक छोटी सी न्नही बच्ची,गाडी सीधा गांव के एक डॉक्टर के घर,किराये से रहने पहुँचे |

गाडी रूकी,इस्पेक्टर महेन्द्र शर्मा अपनी न्नही बेटी मेघा और पत्नी रेखा के साथ उतरे,डॉक्टर समीर रजक ने अपनी पत्नी सुमन बेटा सुदीश और सगुन के साथ सबका स्वगत किया |बगल (या) ऊपर) एक और शर्मा परिवार हंसी खुशी रहने लगा |

समीर क्लीनिक,महेन्द्र पुलिस स्टेशन जाते,रेखा और सुमन घर का काम करती,और बच्चे खेलते खाते और पढते—(गाने के बीच)—बड़े हो रहे थे |

दोनो परिवार मिल के रहते,सुदीश और मेघा एक दूसरे के बिना बेचैन हो जाते |समीर अक्सर सुदीश को लापरवाही की बजह से डांटा करते, सुदीश अक्सर गलतियां करता,डांट सुनता,बेपरवाह था |

बच्चे बड़े हो गए,तो मेघा और सुदीश के प्यार के चर्चे होने लगे | मेघा को पता है,वो अक्सर छेडती रहती,मम्मी पापा से बोलने कह ब्लेक मेल कर अपना काम निकालती |

एक दिन क्लास रूम में मास्टर के आने से पहले सुदीश ने पेपर पर I LOVE YOU ❤️ लिख कर मेघा की ओर फेंका,मेघा उठाने को हुई, तभी मास्टर वरुण मिश्रा आ पहुँचे मेघा से पहले पेपर वरुण ने उठाया, पढा, और मेघा से कहा, तुम इंस्पेक्टर महेन्द्र शर्मा की बेटी हो ना ?

मेघा ने सिर हिलाया,बैठ गई | अगले दिन महेन्द्र के ऑफिस में वरुण ने कुछ बातें करते हुए वही कागज दिखाया, महेन्द्र तो पढ़ कर आपा खो कर कौन है पूँछा,वरुण ने समझाते हुए कहा,दिमाग से काम लो……एक दिन वरुण महेन्द्र से मिलने घर पहुँचा, मेघा कहाँ है, रेखा बोली, खेलने गई होगी और अन्दर गई तब वरुण ने बताया, की वो किसी के साथ जीने-मरने की कसमे खा रही है, फिर सारी बात बताई |

अगले दिन थाने पहुँच महेन्द्र ने दिमाग चलाया,और ट्रांसफर ले कर घर मे सामान पैक करने कहा, उसी वक्त वरुण ने फोन कर बताया की मेघा और सुदीश दोनो को फैल हो गई,रेखा और मेघा से बहस हुई, समीर से बड़े प्यार से ट्रांसफर की बात की |

सब बड़े दुखी हुए |सुदीश और मेघा की तो हाल बेहाल थे | अगले दिन गाडी मे सामान लादा,सबसे मिले और निकल गए, समीर का परिवार बहुत दुखी हुआ, ऊंहे बस ट्रांसफर का पता है, हकीकत से अंजान थे |

सुदीश को परेशान देख मेघा ने सुदीश से खुल कर बात की,माँ सुमन ने सुन समीर से कहा,समीर ने सुदीश को समझाया |

अब इस साल सुदीश ने बहुत मेहनत कर पास हुआ,अब उसे शहर पढ़ने जाना था | समीर सुदीश को ले शहर ऐडमीशन काराने गए, रहने खाने की व्यवस्था कर, समझा बुझा कर वापस आ गए |

अगले दिन सुदीश कोलेज गया,तो रतन नाम का गुंडा स्टूडेंट रैगिंग कर परेशान करता है | सुदीश अपने दोस्तों के साथ चुपचाप सहता हैं |

तभी पुलिस आ कर रतन को हिदायत दे रहा है,सुदीश ने दूसरे विद्यार्थियों से पूँछा,तो पता चला की किसी लडकी को रतन ने मारा था, वह होस्पिटल मे है, रतन उस शहर के गुंडे, छोटा भैया का बेटा है, इसलिए पुलिस भी ड़रती है |

अगले कुछ दिन मे एक लड़की गाडी से आई,पलटी तो मेघा,सुदीश ने पहचान कर मेघा से बात की |रतन के चमचों ने रतन को खबर दी, रतन आया, मेघा को छेडा, बातचीत बहस हुई, फिर मार पिटाई हुई,रतन को होस्पिटल ले जाना पडा |

…उधर….छोटा भैया को पता चला,वह आग बबूला हो कर मारने वाले को ढूंड लाने को था,चमचे निकले | मिला,कुछ कोमेडी हुई,फिर सुदीश को ले गए |

बंगले मे एंट्री हुई, सुदीश बड़ी हवेली को देख चमचों का दिमाग खा रहा है, छोटा भैया आग बबूला हो रहा था |…इधर….सुदीश के दोस्त पुलिस थाने रिपोर्ट लिखाने गए, वहां इंस्पेक्टर महेन्द्र से मुलाकात हुई महेन्द्र सौक, सुदीश के बारे में पूँछा,दोस्तों ने बताया, की उसे छोटा भैया के गुंडे ले गए हैं, उसी की रिपोर्ट लिखाने आए हैं |

…..उधर….जैसे ही दोनो का सामना हुआ,दोनो की पहचान निकल आई,सुदीश ने सब कुछ बताया और बेटे को ही गलत बोला,फिर सुदीश से सच जान,बेटे चमन को डांट मेघा से दूर रहने बोला, साथ ही मेघा को बहन मान मदद करने बोला और खुद भी सुदीश और मेघा के प्यार के बारे मे जान कर दोनो की शादी कराने का भी वादा किया |

रतन ने पहचान की बात पूँछी,तो बताया,की कुछ साल पहले जब मेरा एक्सीडेंट हुआ था(शीन में),तब इसी ने मुझे अपने होस्पिटल मे ले जा मेरी जान बचाई साथ ही तीन दिन तक मेरा ध्यान रखा |सच कहूँ तो मेरा जीवन इसी की देन है |

मेने वचन दिया,निभाऊंगा भी |….इधर….महेन्द्र ने कारण पूँछा तो बताया की जिस रतन ने मेघा को होस्पिटल पहुचाया,सुदीश ने उसे होस्पिटल पहुँचा दिया इसलिए |

महेन्द्र ने कुछ सोचा,और रिपोर्ट दर्ज कर दिलासा दिला,निकल गया | सब बाहर निकले,तभी सुदीश ने कॉल कर परेशान न होने कहा |

अगले दिन कोलेज मे,मेघा अपनी सहेलियों के साथ तभी रतन चमचों के साथ आया,मेघा देख दहसत मे,पर ये क्या,,,,,,रतन ने मेघा से माफी मांग कहा,बहन तुझे कोई भी परेशानी हो तो मुझे कहना |

सुनने वाले सब सौक””””””””””उसी वक्त सुदीश आया,तो रतन ने सलाम ठोका,मेघा मुस्कुराई —-(गाना हुआ)—-गाना समाप्त हुआ,मेघा और सुदीश गले लगे हुए हैं तभी सुदीश का फोन बजा,सुदीश ने बात की, पिता समीर ने हाल पूँछा, तो रतन की कहानी बताई, साथ ही छुट्टन/छोटे भैया की बात बताई |

समीर ने मेघा के लिए पूँछा तो सुदीश हडबडा गया,की कैसे पता फिर समीर ने कहा,बेटा,तू मेघा से प्यार करता है, पर मैने तुझे रोका था,पर(बदली आवाज से) आज मैं कहता हुँ, बेटा इस घर की बहू मेघा ही होनी चाहिए |

सुदीश ने पूँछा क्या हुआ,तो पिता समीर ने बताया,–[{शीन=>मेघा के पिता महेन्द्र गांव जा कर समीर को सारे लोगों के सामने दोनो के प्यार को लेकर बेईज्जत करता है,साथ ही जात-पात कर धमकी देता है की बेटे को समझा लेना,नहीं तो जान से जाएगा |}]

सुदीश का खून खौल उठा,पिता को वचन दिया की ऐसा ही होगा |…..उधर….. महेन्द्र ने घर पर पुलिस का पहरा लगा मेघा को डांटा,मिलने से मना कर घर में कैद कर निकल गया कुछ देर बाद घर का फोन बजा,बात हुई महेन्द्र का एक्सीडेंट हुआ है |

सब घबरा कर भागे,मौका देख सुदीश मेघा को आजाद कर सीधा छोटे भैया के बंगले ले गया |वरुण ने देख महेन्द्र को कॉल किया,महेन्द्र ने घर बात की,एक्सीडेंट की बात सुन सब को होस्पिटल मे मिले |

मेघा के बारे मे पूँछा,सबको डांटा……उधर…..शादी की तैयारी चल रही हैं,छोटा भैया दोनो की खुशी मे खुश होते हुए दोनो को बधाई देता है……इधर…… महेन्द्र पुलिस ले कर छोटा भैया के बंगले पहुंच बाहर से ही बिरोध करने लगा,बोला,भैया जी एक लडका मेरी बेटी को भगा कर यहीं लाया है |

डौन बोला,हाँ,और मै उन दोनो की शादी करा रहा हूँ |डौन ने खूब समझाया पर नहीं मना,तब डौन बोला,जो करना है कर ले,ये शादी तो हो कर रहेगी | तेरी भलाई इसी मे है,की दोनो को आशीर्वाद दे कर अपना लो |

छोटा भैया अन्दर गया,शादी सम्पन्न करा दूल्हा-दुल्हन को महेन्द्र के सामने ल खडा कर पूँछा,तुम दोनो खुश तो हो ना,दोनो ने मुस्कुरा कर हाँ कहा |

अब महेन्द्र के कटो तो खून नहीं,छोटा भैया बोला,देख इंसपेक्टर शादी तो हो गई,दोनो बालिग भी हैं,अब तो तुम्हारा कानून भी कुछ नहीं कर सकता |

तभी पीछे से मेघा आई,बोली पापा मैने आपका दिल दुखाया है,पर हमारा प्यार सच्चा है इसलिए एक बार बिछड कर हम फिर से मिल गए |

आपस मेरी शादी कहीं और तो कर देते,पर फिर मै सारी जिन्दगी आपको कोसती रहती,न मै खुश रहती ना ही सुदीश |

महेन्द्र भरी आँखो से आगे बढ दोनो को गले लगा लिया | सब मिल कर गाडी मे बैठ सुदीश के गांव निकले,डां.समीर से मिल माफी मांगी,घर पहुँच सुमन और सगुन को सरप्राइज दिया और एक मुस्कुराती हुई ग्रुप फोटो के साथ |

…………समाप्त………..

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फिल्म —- “प्रीत हमारी बचपन की”
लेखक—- सुदीश कुमार सोनी
गीत लेखक — सुदीश कुमार सोनी
सदस्य संख्या — 25830 (fwa- mumbai)

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लेखक:  सुदीश भारतवासी

Email: [email protected]

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