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‘अश्लीलता’

शाम के समय पार्क में टहलते हुए, मेरी नजर अपने स्कूली मित्र उमेश पर पड़ी। उससे मेरी मुलाकात लगभग 4 वर्ष बाद हुई थी। उसके साथ उसकी दो खूबसूरत बेटियां थी, जिनकी उम्र लगभग 6 वर्ष और 4 वर्ष होगी। वह बच्चियों को पार्क में घुमाने लाया था।

मेरी उससे दुआ सलाम हुई। हम दोनों आपस में घर-परिवार, कैरियर इत्यादि को लेकर बातें करने लगे। उधर दोनों बच्चियां झूले पर झूलने में मस्त थी। वे भाग-भाग कर एक दूसरे से खूब मस्ती कर रही थी। तभी मेरी नजर उमेश के पीछे.. कुछ दूरी पर बैठी दो लड़कियों पर पड़ी। वे दोनों फोन पर किसी से हँस-हँसकर बात कर रही थी। जैसे ही मेरी नजर उन पर पड़ी, वे झेंप गई और दूसरी तरफ मुंह करके बातें करने लगी। उन दोनों की उम्र बमुश्किल 15 वर्ष रही होगी। लेकिन उनकी हरकतें बिल्कुल व्यस्क औरतों जैसी थी। मैंनें उमेश से पूछा-

“क्या ये दोनों तुम्हारे साथ हैं?”

“नहीं भाई, मुझे तो यहां बच्चों के साथ आए हुए लगभग एक घण्टा हो गया है। यह यहां मेरे आने के पहले से ही मौजूद थी। तब से मैं यहां इनको लगातार फोन पर बतियाते ही देख रहा हूँ। जिस तरह की उनकी हरकतें हैं, उनको देखकर यही लगता है कि ये दोनों निश्चित ही अपने-अपने बॉयफ्रेंड से ही बातें कर रही हैं।” उमेश ने कहा।

“लगता तो मुझे भी यही है। क्या जमाना आ गया है? हमारे समय में सब कुछ कितना अच्छा था। इन मोबाइलों की वजह से इंसान कम उम्र में ही बिगड़ रहे हैं, गलत रास्ते पर चल रहे हैं। बच्चें बड़े छोटों की शर्म करना भूल गए हैं। पता नहीं, आने वाले समय में न जाने क्या होगा? क्या देश इन जैसे टीन ऐज के बच्चों की मदद से तरक्की कर सकेगा?… जो हर वक्त मोबाइल में ही लगे रहते हैं। पढ़ाई लिखाई पर, कैरियर बनाने पर कोई ध्यान नहीं। मुझे तो सच में यह सब देखते हुए बड़ी शर्म आती है। भगवान का शुक्र है कि हमारे बच्चें कम से कम अभी तक तो ठीक चल रहे हैं।”

“सही कह रहे हो भाई। मेरी भी दो बेटियां हैं। जब इन बदतमीज लड़कियों को देखता हूँ तो सोचता हूँ कि अपने बच्चों पर अभी से पैनी नजर रखनी पड़ेगी, नहीं तो… मेरे बच्चों को दूसरे बच्चों की देखा देखी बिगड़ने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।” उमेश ने चिंता जताई।

“जी भाई, नजर रखना बेहद जरूरी है। मैं तो यहां हर रोज घूमने आता हूँ। सुबह सुबह यहाँ इस तरह की बदतमीजी नज़र नहीं आती। तभी अपने बच्चों को घुमा लेता हूँ। मैं तो अपने बच्चों को दोपहर या शाम को यहाँ घुमाने से बचता हूँ। दोपहर और शाम में न जाने कितने प्रेमी जोड़े यहाँ हाथों में हाथ डालकर बेशर्म बनकर… घूमते नजर आते हैं।

कुछ जोड़े तो यहाँ पेड़-पौधों की आड़ में बदतमीजी करते हैं। अभी कल ही मैंने एक जोड़े को पेड़ की आड़ में गले मिलते देखा था। उनकी उम्र 20 से कम की ही होगी।

उनके पास 10 कदम की दूरी पर 6 बुजुर्ग बैठे ताश खेल रहे थे। उन बुजुर्गों का सारा ध्यान खेलने पर था, जबकि उस जोड़े का ध्यान सिर्फ शारीरिक भूख मिटाने पर था। मेरी तो समझ में नहीं आता कि अगर आपस में इतना ही प्यार है… एक दूसरे के बिन रह नहीं सकते… तो शादी क्यों नहीं कर लेते? फिर खूब मजे करो। या फिर होटल में कमरा लेकर रुको और बंद कमरे में कुछ भी करो.. लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर इस तरह की बदतमीजी कहीं ना कहीं गैंगरेप, हत्या, ऑनर किलिंग इत्यादि की वजह बनती है, ऐसा मेरा मानना है।”
मैंने उमेश से अपना पक्ष रखा।

“आपकी बातों से मैं पूर्णतया सहमत हूँ।” उमेश बोला।

उमेश के दोनों बच्चे खेलने में मग्न थे। उमेश ने जब दोनों बच्चों से घर चलने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया और उमेश से बोले- “पापा जी, बस 20 मिनट और खेलने दो। तब चलेंगे।”

उमेश बोला- “ठीक है बेटा। हम यहीं घूम रहे हैं। तुम इत्मीनान से खेलो। कहीं जाना मत। वैसे मेरी और तुम्हारे अंकल की नजर तुम पर ही रहेगी।”

बच्चों ने कहा- ” ठीक है पापा। खेलने के बाद हम आपको आवाज दे देंगे, तब हम घर चलेंगे।”

इसके बाद, उमेश और मैं बात करते हुए घूमने लगे। हम बमुश्किल 25 कदम भी ना चले होंगे कि हमने देखा एक प्रेमी जोड़ा फुलवारी की आड़ में अश्लील हरकतें कर रहा है। आसपास के लोग मूकदर्शक बनकर आ-जा रहे हैं। कुछ उस जोड़े की हरकतों का आंखों से मजा ले रहे हैं और वे दोनों बेशर्म.. किसी की भी शर्म लिहाज नहीं कर रहे हैं। अपने आप में ही मग्न हैं। उन्हें कोई और नज़र ही न आ रहा था।

खुलेआम बेशर्मी देखकर हम दोनों को बहुत गुस्सा आया। हमने उन दोनों को सबक सिखाने की ठानी। उमेश ने चुपके से अपने मोबाइल से उन दोनों की फोटो खींच ली। फोटो खिंचता देखकर वे दोनों घबरा गए। लड़का गुस्से से उमेश से बोला- “अंकल, आपने हमारी फोटो क्यों ली? किसी की फोटो खींचना गलत बात होती है। क्या आपको नहीं पता।”

“अच्छा, फोटो खींचना गलत बात होती है? ये जो तुम यहाँ कर रहे थे, क्या यह गलत नहीं है? क्या तुम यह नहीं जानते कि यह एक सार्वजनिक स्थल है। यहाँ बच्चें, बड़े-बूढ़े हर तरह के लोग घूमने के लिए आते हैं।
अगर छोटे-छोटे बच्चें तुम्हें इस तरह की हरकतें करते देखेंगे, तो सोचो क्या होगा? क्या तुम्हारे मम्मी पापा और गुरु ने यही सिखाया है?

क्या तुम्हारे मम्मी पापा को पता है कि तुम कहाँ हो और क्या कर रहे हो? मुझे आज, तुम दोनों के पिताजी से बात करके.. उन्हें तुम्हारी हरकतों और बदतमीजी के बारे में बताना पड़ेगा। तुम ऐसे बाज नहीं आओगे।” उमेश की ऐसी धमकी भरी बातें सुनकर लड़की बहुत घबरा गई और रोने लगी। उसको रोता देखकर लड़का थोड़ा ढ़ीला पड़ा और घबराकर उमेश के पांवों में पड़ गया। गिड़गिड़ा कर बोला-

“अंकल जी, अब गलती नहीं होगी। हम ऐसा कोई भी काम आगे से नहीं करेंगे। प्लीज, हमारे मम्मी-पापा से इस बारे में कुछ भी मत बताना। हम कोचिंग क्लास बंक करके यहाँ आए हैं। अगर उन्हें पता चल गया कि हम कहाँ थे और क्या कर रहे थे… तो वे हमें जान से मार देंगे। प्लीज, आप हम पर रहम करो। अब हम यहाँ पर कभी नहीं आएंगे। आपसे विनती है कि आप वह फ़ोटो डिलीट कर दें।”

“फ़ोटो तो मैं तुम्हारे जाने के बाद डिलीट करूँगा। अगर अभी कर दिया तो तुम फिर से बदतमीजी पर आ जाओगे। यकीन रखो, तुम्हारे मम्मी पापा को नहीं दिखाऊंगा। एक बात और…. हम यहाँ आने को तुमसे मना नहीं कर रहे। यहाँ आओ, घूमो.. लेकिन तमीज के साथ, देश के अच्छे नागरिक बनकर। अच्छा हुआ, मेरी दोनों बेटियाँ वहाँ कुछ दूरी पर खेल रही हैं।

अगर यहाँ होती तो तुम्हें देखकर गलत ही सीखती। मैं तुम्हें एक शर्त पर छोड़ सकता हूँ.. अगर तुम दोंनो मुझे यह वादा करो कि तुम प्यार, मोहब्बत के चक्कर में ना पड़कर सिर्फ अपने कैरियर बनाने पर ध्यान दोगे। इस तरह की बदतमीजी नहीं दिखाओगे।

बेटा, जिस दिन तुम दोनों कामयाब बन गए तो तुम दोनों के लिए लड़के-लड़कियों की कोई कमी ना रहेगी.. चाहो तो कामयाब बनकर आपस में ही शादी कर लेना। तुम्हारा इंतज़ार ही सच्चा प्रेम कहलायेगा न कि इस तरह सार्वजनिक स्थान पर अश्लीलता फैलाना प्रेम कहलाता है। अगर इस समय मौज मस्ती में पड़ गए तो ताउम्र मजदूरी करते फिरोगे और बाद की पूरी जिंदगी दुःखों में, कष्टों में, धन के अभाव में बीतेगी।” उमेश उन्हें ज्ञान देते हुए बोले।

वह प्रेमी युगल उमेश के पैरों में पड़ गया। उन दोनों ने अपनी गलती स्वीकार की और उमेश की बातों पर अमल करने का वायदा किया। उमेश ने उनकी बातों पर विश्वास करके उन दोनों को जाने दिया और फ़ोटो डिलीट करने का आश्वासन दिया।

उस युगल के जाने के बाद मैंनें उमेश से कहा-

‘यार अब उन दोनों का फ़ोटो अपने मोबाइल से तो डिलीट कर दो। परिवार के किसी सदस्य की नज़र उस पर पड़ गयी तो क्या होगा?”

उमेश बोला-

“मैंने तो उनका कोई फोटो खींचा ही नहीं था। बस यूं ही कैमरा क्लिक किया था, डराने के लिए।”

हैरान होकर मैंने उमेश का मोबाइल चेक किया तो देखा… सच में, उमेश के मोबाइल में उनका कोई फोटो नहीं था। मैंनें उमेश से कहा- “यार उमेश, सच में यकीन नहीं होता। तुम बहुत बड़े वाले हो। वैसे, तुमने उन दोनों को अच्छा सबक सिखाया। अब वे सार्वजनिक स्थलों पर बदतमीजी करते हुए हजार बार सोचेंगे।”
मेरे द्वारा ऐसे बोलने पर उमेश अपनी कामयाबी पर मंद मंद मुस्कुराने लगा।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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