“Kidnap”- एक क्राइम कथा

मेरे तैयार होते ही एक कॉल आया और सामने से आवाज आई! प्लीज मुझे बचा लो यह लोग मुझे मार डालेंगे!

मैं आवाज पहचान नहीं पा रहा था। तभी किसी ने रिसीवर उसके हाथ से छीन लिया और नीचे पटक दिया। मैं बुरी तरह से चौंक गया। मैं समझ गया था किसी लड़की की जान खतरे में है। मैंने वो नंबर ट्रेस किया तो मुझे पता चल गया वह फोन कहाँ से आया है। मैं पुलिस की मदद लिए बगैर अकेला उस लड़की को बचाने निकल पड़ा।

अपनी काली बाइक पर काले कपड़े पहन काला हेल्मेट लगा उनके अड्डे पर गया तब मैं किसी फिल्मी हीरो से कम नहीं लग रहा था! एक खूबसूरत सी लड़की मुझे खंभे से बंधी हुई दिखी।अपनी बाइक से मैंने शीशे का दरवाजा तोड़ा और अन्दर आते ही उन पर टूट पड़ा। बाइक पर बैठे बैठ मैं उन्हें लाते और घूसे मार रहा था।

तभी किसी ने लौहे की रोड मार कर मुझे बाइक से नीचे गिरा दिया। सभी मुझ पर टूट पड़े पर उस दिन मुझ में कुछ अलग ही पावर आ गया था। मैं अकेला सब को मार रहा था। थोड़ी देर में सभी बेहोश हो गए। उनके बॉस को पकड़कर मैं घूसे मारने लगा।

तभी किसी की जबरदस्त चिल्लाने की आवाज आई क्या कर रहे हो तुम? वह बोली आँखें खोल कर देखो तुमने क्या कर दिया? नींद में हाथ पैर चला रहे हो। तुम्हारी लातों से शंभू काका के हाथ से चाय की ट्रे नीचे गिर गई! उन्हें दो मुक्के भी पड़े जिससे उनकी आँखें सूज गई। अब तुमने तकिया भी फाड़ दिया! यह क्या कर रहे हो तुम?

मैं समझ गया प्यारा सा सपना था। मैंने उससे कहा थोड़ी देर बाद में नहीं आ सकती थी? लड़की को उसके घर पर पहुँचा देता। वह बोली कब से फोन की घंटी बज रही है पहले वो उठा लो। ऑफिस से फोन आ रहा था। ऑफिस जाने में लेट हो रहा था। मैं फटाफट तैयार हुआ बिना चाय नाश्ता किये सीधा ऑफिस के लिए निकल गया। वह लड़की अभी भी मेरे ख़यालों से गई नहीं थी!

 

कवि : सुमित मानधना ‘गौरव’

सूरत ( गुजरात )

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