Kavita Chakra Samay ka

चक्र समय का चलता रहता | Kavita Chakra Samay ka

चक्र समय का चलता रहता

( chakra samay ka chalta rehta ) 

 

इस समय का यही इतिहास है,
कभी आँधी तूफ़ान बरसात है।
कभी धूप और कभी ये छाॅंव है,
तो कभी पतझड़ गर्मी शीत है।।

ये चक्र समय का चलता रहता,
अपनें ही हाल में यह है रहता।
किसी के रोकने से नही रुकता,
समय का यह पाबंदी है रहता।।

जिसने किया इसका सदुपयोग,
अग्रसर रहा विकास की और।
जीत को हासिल वो करता रहा,
समय अनुसार जो चलता रहा।।

समय ने आज लिया है करवट,
बढ़ रहा है यह कोरोना सरपट।
अपनें आपको आज है बचाना,
मास्क सदा ही लगाकर रखना।।

यह चक्र घुम रहा बनकर काल,
नही छोड़ना आज तुम ये आस।
आग में झुलस रहें सभी ख़्वाब,
रखना दिल में सब तुम विश्वास।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • आरंभ ही अंत है | Aarambh hi Ant Hai

    आरंभ ही अंत है ( Aarambh hi ant hai )    मत सोच ये कि तूने क्या किया है, जो पाया उसमें भी कुछ खोया है, हर हार में भी तेरी जीत है, कितना भी सुलझा ले खुद को तू, तुझे नीचा दिखाना यही दुनियां की रीत है, तू गिरकर संभलने के भरसक प्रयास कर,…

  • बारिश के नाले | Baarish ke Naale

    बारिश के नाले ( Baarish ke naale )   बहुत जोर की ऐसी गर्मी पड़ी, हालत ख़राब फिर सबकी हुई। कुलर एवं पंखो ने दिया जवाब, देखें सभी मानसून के ख़्वाब।। रोड़ और नाले बन रहें थें नए, गाँव-शहर में काम चल रहे नए। अभी पूरा नही हुआ था यें काम, वर्षा ने शुरु किया…

  • संत संगति | Kavita Sant Sangati

    संत संगति ( Sant sangati )    सज्जन साधु संगत कर लो बेड़ा पार हो जाएगा। बिनु सत्संग विवेक नहीं उजियारा कैसे आएगा। संत सुझाए राह प्रेम की हरि मिलन विधि सारी। मंझधार में अटकी नैया हो पतवार पार संसारी। दीप जलाए घट घट में करें ज्ञान ज्योति आलोक। दिव्य प्रभा सुखसागर सी जीवन को…

  • संक्रांति | Sankranti kavita

    संक्रांति ( Sankranti )     उत्तरायण भी कहे सूर्य मकर राशि में पर्व मकर संक्रांति दिवस दान पुण्य का   तिल गुड़ बांट बांट बोले मीठा मीठा बोल पुण्य भरा काज करो शुभ दिवस आज का   पूजा वंदना कर लो तीर्थों का फल मिलता आशीष मात-पिता का वरदान उन्नति का   पावन गंगा…

  • ऐ जिंदगी | Poem ai zindagi

    ऐ जिंदगी ( Ai zindagi )   ऐ जिंदगी… कुछ देर ठहर जा बैठ जा कुछ कह जा कुछ सुन जा वक्त का तकाज़ा है कभी तू गुम है कभी मैं…   हाँफती भागती सी तुझे छूने की होड़ में थकी मांदी सी सुस्ताने के बहाने ढूँढ तलाशती तुझको ही बोझिल कमज़ोर नज़रें मेरी ऐ…

  • संम्भाल अपने होश को | Prerna Dene Wali Kavita In Hindi

    संम्भाल अपने होश को ( Sambhal apne hosh ko )     उत्साह भर कर्मों में अपने जीवन जीना सीख ले, छोड़ अपनों का सहारा खुद भाग्य रेखा खींच ले।   भीड़ में है कौन सीखा जिंदगी के सीख को, हाथ बांधे ना मिला है मांगने से भीख को।   ढाल ले खुद को ही…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *