सवाल

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“हेलो काव्या, मैं विनीता बोल रही हूँ। क्या तुमने एमएससी मैथ एंट्रेंस एग्जाम का फॉर्म भरा है??”

“हां विनीता, मैंने भी फॉर्म भरा है। मैंने सुना है कि इस बार सभी का एग्जाम सेंटर बरेली कॉलेज बरेली को ही बनाया गया है।”

“ठीक कह रही हो, मेरा एग्जाम भी बरेली कॉलेज बरेली में ही है। अच्छा, एक बात बता.. दो दिन बाद एग्जाम है। एग्जाम को लेकर मुझे बड़ी टेंशन हो रही है। तुम एग्जाम देने कैसे जाओगी???”

“मेरी बड़ी बहन मुझे अपने साथ, अपनी गाड़ी से एग्जाम दिलाने लेकर जायेंगी। हम दोनों एक दिन पहले जाएंगे, रात को वहीं रुकेंगे ताकि रात में नींद पूरी लेकर, सुबह उठकर, फ्रेश होकर इत्मीनान से पेपर दे सकें क्योंकि एग्जाम वाले दिन जाने से ट्रैफिक जाम की वजह से पेपर छूटने का डर भी बना रहता है।”

“काव्या, क्या मैं भी तुम्हारे साथ एग्जाम देने जा सकती हूँ??”

“क्यों, क्या हुआ?? तुम्हारे घर से तुम्हें एग्जाम दिलवाने कोई नहीं जा रहा है क्या??”

“पापा चलते, लेकिन पापा को छुट्टी नहीं मिल रही है। वे काम पर जाएंगे। मेरे साथ चलने वाला कोई नहीं है। मैं अकेली एग्जाम देने चली जाती परन्तु मम्मी पापा मुझे अकेला नहीं भेजेंगे। प्लीज, मुझे भी अपने साथ ले चलो काव्या।”

“मुझे इस बारे में दीदी से बात करनी पड़ेगी। एक काम कर विनीता, शाम को अपने पापा जी को अपने साथ लेकर मेरे घर आ जाओ। मेरी बड़ी बहन घर पर ही हैं। तुम्हारे पापा मेरी बड़ी बहन से बात कर लेंगे। दीदी(बड़ी बहन) अगर मान गयीं तो फिर तुम हमारे साथ चलना।”

“ठीक है काव्या, मैं पापा जी से इस संबंध में घर पर बात करती हूँ।”

विनीता पड़ोस के मोहल्ले में रहती थी। दोनों एक दूसरे को जानती थीं, लेकिन उनमें दोस्ती नहीं थी। उनके घर से बरेली की दूरी लगभग 150 किलोमीटर थी।
उस शाम विनीता के पिताजी, काव्या की बड़ी बहन से मिले और उनसे पूरी तरह संतुष्ट होकर, उनका मोबाइल नंबर लेकर चले गए ताकि एक दिन पहले जब विनीता उनके साथ एग्जाम देने जाये तो उन्हें विनीता व एग्जाम के बारे में जानकारी मिल सके।

तय कार्यक्रमानुसार, एग्जाम से एक दिन पहले विनीता, काव्या व उनकी बड़ी बहन के साथ कार में शाम के समय बरेली पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने एक होटल में रूम लिया, जिसमें एक डबल बेड व एक सिंगल बेड था। उन्होंने सिंगल बेड विनीता को दिया और डबल बेड अपने व काव्या के लिए रखा।

कुछ देर उन्होंने आराम किया। फिर शाम को खाना खाकर, जल्दी ही 8:00 बजे तक वे अपने रूम में वापिस आ गये। काव्या की बड़ी बहन तो बेड पर लेटते ही सो गई। उधर काव्या अपना रिवीजन करने लगी। दूसरी तरफ विनीता अपने बेड पर बैठकर इत्मीनान से मोबाइल चलाने लगी।

शायद वो किसी से चैटिंग कर रही थी। रात 11 बजे के लगभग काव्या जब सोने लगी, तो उसने विनीता को भी सोने के लिए कहा। तब भी विनीता मोबाइल पर चैटिंग ही कर रही थी। वह बोली, “तुम सो जाओ। मैं अभी सो जाऊंगी।”

उस रात में काव्या व उनकी बड़ी बहन की जब जब आंख खुली उन्होंने विनीता को मुँह ढककर लेटे हुए मोबाइल पर चैटिंग करते हुए पाया। चादर से बाहर निकलती मोबाइल की रोशनी से पता चल रहा था कि वह चैटिंग कर रही है।

अगले दिन एग्जाम के बाद विनीता ने साथ घर जाने से मना कर दिया।
विनीता बोली, “मैं आज बरेली में अपनी बुआ के घर पर रुकूंगी। मेरी बुआ का लड़का मुझे यहां लेने आ रहा है। वो तो मुझे लेने रात में ही आ रहे थे पर मैंने मना कर दिया था। अब आप चले जाओ।

मैं बुआ जी के घर जा रही हूँ।”
काव्या व उसकी बड़ी बहन ने विनीता से ज्यादा कुछ नहीं पूछा और शाम 6:00 बजे तक वे दोनों अपने घर वापस आ गए। रात 9:00 बजे विनीता के पापा जी का काव्या की बहन के पास फोन आया।
उन्होंने पूछा, “बहन जी, आप कहाँ हो?? विनीता का एग्जाम ठीक से हो गया?? आप कब तक घर वापस आ जाओगे??”

“हमें तो घर आये हुए 3 घंटे से भी ज्यादा का समय हो गया है। विनीता तो बरेली में अपनी बुआ जी के यहां रुक गई है। वह बता रही थी कि उसकी बुआ का लड़का उसको लेने आ रहा है। आप एक काम करो, आप सीधे विनीता के नंबर पर ही फोन करके पता कर लो कि वह कहाँ है?? आप चाहो तो अपनी बहन मतलब विनीता की बुआ से भी बात करके देख सकते हो। हमें विनीता के बारे में कुछ नहीं पता।”

“कैसी बातें कर रही हो, बहन जी?? विनीता के पास तो फोन है ही नहीं?? अगर विनीता के पास फोन होता तो क्या मैं आपसे आपका फोन नंबर मांगता?? उसी से बात ना कर लेता??

उनके मुंह से फोन वाली बात सुनकर काव्या की बड़ी बहन अचंभे में पड़ गई। उन्होंने विनीता के पिताजी से कहा, आप कैसे पिता है?? आपको यह भी ना पता कि आपकी लड़की के पास मोबाइल है?? वह पूरे रास्ते मोबाइल पर चैटिंग करते हुए बरेली गई और रात भर चैटिंग ही करती रही।
उन्होंने सारी बातें विनीता के पिताजी को बताई।

विनीता के पिताजी ने बताया, “उनकी तो कोई बहन भी नहीं है। क्या आपके पास विनीता का फोन नंबर है?? अगर है तो मुझे दीजिए, मैं उससे बात करता हूँ।”
विनीता के पिताजी ने विनीता को बहुत बार फोन किया लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। एक घंटे बाद फिर से विनीता के पिताजी का फोन आया और बोलने लगे, “बहनजी, उस नंबर पर रिंग तो जा रही है, लेकिन कोई फोन नहीं उठा रहा। तबसे लगातार सम्पर्क कर रहा हूँ। अब मुझे घबराहट होने लगी है।”

काव्या की बड़ी बहन ने भी उस नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन उनका भी फोन नहीं उठा। बाद में खुद ही उधर से कॉल बैक आई। विनीता बोल रही थी, “दीदी, आपने कैसे फोन किया??”
काव्या की बड़ी बहन ने विनीता को डांटते हुए कहा, “तुमसे ज्यादा बदतमीज लड़की मैंने नहीं देखी। इधर तुम्हारे पिताजी तुम्हें लगातार फोन कर रहे हैं लेकिन तुम उनका फोन रिसीव नहीं कर रही हो। वैसे तुम हो कहां?? तुम्हारे पिताजी व तुम्हारे घर के सभी लोग बहुत परेशान हो रहे हैं। तुम अभी उनसे बात करो।”

विनीता बोली, “मैं अभी पापा से बात करती हूँ।” उसी समय काव्या की बहन ने विनीता के पिताजी को फोन पर बताया कि बिल्कुल अभी अभी विनीता से उसी नम्बर पर बात हो गई है जो नम्बर आपको दिया था। आप चाहो तो अभी उससे बात कर सकते हो। विनीता के पापा ने उस नंबर पर कॉल की। पहली बार तो रिंग गयी अगली कॉल करने पर वह नंबर स्विच ऑफ आया।
विनीता के पापा फिर से घबरा गए। उन्होंने फिर से काव्या की बहन को फोन करके बताया कि वह नंबर तो अब बंद जा रहा है।

कुछ समय बाद, अन्य नंबर से विनीता के पापा के पास फोन आया तो विनीता बोल रही थी। “मैं अपनी सहेली के साथ यहां बरेली में रुक गई हूँ। मैं सुबह आ जाऊंगी।”

सुनीता के पापा बहुत गुस्से में थे। उन्होंने कहा, “सीधी तरह घर आती है या नहीं। या हम गाड़ी लेकर सीधे वही आयें?? अगर अभी सीधे घर नहीं आयी तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।”

पिताजी की धमकी या डर की वजह से सुबह 5 बजे, सबकी रात काली करके विनीता घर वापस आ तो गई थी लेकिन उसने लड़कियों को लेकर, अनेकों सवाल खड़े कर दिये थे।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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