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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मेरी कहानी में तुम
    कविताएँ

    मेरी कहानी में तुम

    ByAdmin June 11, 2025June 11, 2025

    मेरी कहानी में तुम पता नहीं, मेरी कहानी में तुम थे भी या नहीं,पर हर पन्ने पर तुम्हारी परछाईं दर्ज थी। कभी कोई बात,कभी कोई लम्हा,तो कभी वो खामोशियाँ,जो अब भी तुम्हारा नाम लेती हैं। मेरी कहानी में तुमसे बिछड़ने की कसक थी,अधूरे ख्वाब थे,अधूरी बातें थीं,और वो एहसास… जिसे मैं चाहकर भी बयां नहीं…

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  • Sant Kabir Das
    निबंध

    कबीर जयंती: भारतीय चेतना के शाश्वत आलोक-स्तंभ

    ByAdmin June 11, 2025June 11, 2025

    आज, जब हम कबीर जयंती का पावन पर्व मना रहे हैं, यह केवल एक ऐतिहासिक तिथि का स्मरण नहीं है, बल्कि भारतीय सामाजिक, दार्शनिक और साहित्यिक चेतना के उस अविचल आलोक-स्तंभ का नमन है, जिसने सदियों के अंधकार को भेदकर सत्य, प्रेम और समता का आलोक फैलाया। कबीर केवल एक संत नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा,…

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  • birsa munda
    निबंध

    बिरसा मुंडा: एक आदिवासी नायक, एक “उलगुलान” का प्रतीक और आधुनिक भारत की चेतना

    ByAdmin June 10, 2025June 10, 2025

    बिरसा मुंडा, भारतीय इतिहास के उन चुनिंदा व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिन्होंने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अहम भूमिका निभाई, बल्कि अपने समुदाय के अधिकारों, संस्कृति और अस्मिता के लिए भी आजीवन संघर्ष किया। उनका नाम सुनते ही ‘उलगुलान’ (महान विप्लव) की गूंज सुनाई देती है, जो ब्रिटिश साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी ज़मींदारों…

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  • Vriksh Sanrakshan
    आलेख

    विश्व पर्यावरण दिवस: एक वैश्विक चेतना और सतत भविष्य की दिशा में एक विस्तृत विश्लेषण

    ByAdmin June 7, 2025June 7, 2025

    विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day – WED) एक ऐसा वार्षिक कार्यक्रम है जो हर साल 5 जून को दुनिया भर में मनाया जाता है। यह दिन पर्यावरण संरक्षण के महत्व, पर्यावरणीय चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर सकारात्मक पर्यावरणीय कार्रवाई को प्रेरित करने के लिए समर्पित है। 1972 में संयुक्त…

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  • पर्यावरण
    आलेख

    पर्यावरण: एक दिन की चिंता नहीं, हर दिन की ज़िम्मेदारी

    ByAdmin June 4, 2025June 4, 2025

    आजकल सोशल मीडिया पर एक आम दृश्य देखने को मिलता है — लोग पौधे लगाते हैं, फोटो खिंचवाते हैं, और फिर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर देते हैं। एक पौधा लगाकर फोटो डालना तो याद रहता है, लेकिन उस पौधे को रोज़ पानी देना, उसकी देखभाल करना अक्सर भुला दिया जाता है। नतीजा यह…

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  • मैने बिरयानी खा ही ली
    संस्मरण

    ओर अंततः मैने बिरयानी खा ही ली..

    ByAdmin June 4, 2025June 4, 2025

    यह मेरे लिए बड़ी परेशानी वाली बात थी कि कोयम्बटूर में शाकाहारी होटल नही के बराबर है.. ईक्का दुक्का होंगी भी तो मेरी नजरो से नही गुजरी.. रेलवे स्टेशन पर ही होटल हरिप्रिया में मेरा मुकाम था और यही एक शाकाहारी होटल थी जहाँ मैं दक्षणी भारत का भोजन करता था।        शुरुआती कुछ दिन…

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  • अहिल्या
    आलेख

    अहिल्या : एक जीवनी – एक दर्शन

    ByAdmin June 3, 2025June 3, 2025

              राष्ट्र सेविका समिति ने  आरंभिक काल में ही देवी अहिल्या बाई होल्कर को कर्तव्य के आदर्शवादी रूप में माना है। गंगाजल की तरह निर्मल, पवित्र, पुण्यश्लोक देवी अहिल्या अपने ऐतिहासिक युग का स्वर्णिम युग रही हैं। उनके प्रति समस्त जनसमुदाय की श्रद्धा, निष्ठाभाव, आदर और अपनेपन की भावनात्मक को अभिव्यक्त, प्रतिबिम्बित करने वाली एक…

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  • सवाल
    कहानियां

    सवाल

    ByAdmin June 2, 2025June 2, 2025

    “हेलो काव्या, मैं विनीता बोल रही हूँ। क्या तुमने एमएससी मैथ एंट्रेंस एग्जाम का फॉर्म भरा है??” “हां विनीता, मैंने भी फॉर्म भरा है। मैंने सुना है कि इस बार सभी का एग्जाम सेंटर बरेली कॉलेज बरेली को ही बनाया गया है।” “ठीक कह रही हो, मेरा एग्जाम भी बरेली कॉलेज बरेली में ही है।…

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  • जानलेवा आदत जो छूटे न
    कहानियां

    जानलेवा आदत जो छूटे न

    ByAdmin June 2, 2025June 2, 2025

    एक दिन अभिषेक अपने सेवानिवृत्त गुरु दिवाकर जी से मिलने उनके घर पहुँचा। गुरुजी को चरण स्पर्श करके उसने उनका हाल-चाल लेना शुरू ही किया था कि इतने में गुरु जी का लड़का आनन्द अपने मुँह को ढ़ककर कमरे में कुछ सामान लेने आता है। इस तरह मुँह को ढका हुआ देखकर अभिषेक ने आनंद…

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  • अंतर्द्वंद्व
    कहानियां

    अंतर्द्वंद्व

    ByAdmin June 1, 2025June 1, 2025

    1996 की बात है। 12 वर्षीय मानव के घर पर गांव से उसके चाचा-चाची जी आये। चाची को समोसे बहुत पसंद थे। चाची ने आते ही समोसे खाने की अपनी इच्छा जाहिर की और बोली, “मुझे चेतराम के यहां के समोसे खाने हैं। बहुत दिनों से यहां आने की सोच रही थी, आज आई हूं…

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