‘एकता’
“भैया, पापा जी और ताऊ जी में झगड़ा हो गया है। बहुत शोर शराबा मचा हुआ है। कोई किसी से कम नहीं है। ताऊ जी घर में रखा डंडा निकालकर ले आए हैं। ताऊ जी पापा को जान से मारने के लिए कह रहे हैं। हमें बहुत डर लग रहा है भैया। आप जल्दी से…
प्रेम की सबसे सच्ची परीक्षा तब होती है जब वह समय, समाज और सत्ता की सख्त दीवारों से टकराता है। ‘राज सर आईपीएस’ केवल एक प्रेम कथा नहीं, बल्कि एक उच्च शिक्षित, भावुक और समर्पित युगल की ऐसी आत्मकथा है, जिसमें प्रेम के बीज अंकुरित होते हैं, पनपते हैं, एक पवित्र रिश्ते में बदलते हैं…
(देश में इतने बड़े-बड़े भविष्य वक्ता… फिर भी किसी बड़े हादसे की ख़बर तक नहीं मिलती?) जब आपदा आई और बाबा ऑफलाइन थे, जो लोग दावा करते हैं कि उनका “ऊपर वाले से सीधा संपर्क” है, वे हर बड़ी आपदा, दुर्घटना या संकट के समय चुप क्यों हो जाते हैं? क्या उनका दिव्य नेटवर्क केवल…
एक दिन हीर रांझे से नाराज हो गई। हुआ यूं कि शाम के वक्त जब हीर और रांझा फोन पर बात कर रहे थे, तब हीर की माताजी और भाई हीर के इर्द-गिर घूम रहे थे। उनकी हीर पर नज़र थी। हीर रांझे को अपनी सहेली बताकर बतिया रही थी। रांझा हीर से खुलकर बात…
पिता, यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी सत्ता है जो हमारे जीवन के ताने-बाने को बुनती है। मातृ दिवस पर जितना भावुक उद्रेक और काव्यमय अभिव्यक्ति होती है, पितृ दिवस पर उतनी सहजता से नहीं दिखती। शायद इसलिए कि पिता का प्रेम अक्सर मौन, अदृश्य और कठोरता की चादर ओढ़े होता है। यह…
छाया है पिता बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोईआँसू छिपाता अन्तर में अपने।तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वोचाहता पूरे हों अपनों के सपने।बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद हैपिता जीवन की इक सौगात है।जिनके सिर पे…
मौर्य भवन जवाहरपुरी बदायूं में स्व.वीरेन्द्र कुमार सक्सेना जी की स्मृति में कविसम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन बरेली के मशहूर उस्ताद शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।काव्यदीप हिन्दी साहित्यिक संस्थान द्वारा यह लगातार चौथा आयोजन है। इस अवसर पर मुख्यातिथि रहे बरेली के मशहूर कवि हिमांशु श्रोत्रिय तथा जानी मानी…