• डूबते को तिनके का सहारा | Kavita Doobte ko Tinke ka Sahara

    डूबते को तिनके का सहारा ( Doobte ko Tinke ka Sahara ) डूबते को तिनके का कोई सहारा मिल जाए। मंझधार में हमको कोई किनारा मिल जाए। रिश्तो में भी प्रेम भरी कोई रसधारा बह जाए। मुश्किलों की क्या बिसात दर्द सारा ढह जाए। तूफानों में कश्तियों को हौसला मिल जाए। ठान ले इंसान गर…

  • आओ मिलकर योग करें | Kavita Aao Milkar Yog Kare

    आओ मिलकर योग करें ( Aao Milkar Yog Kare )   आओ मिलकर योग करें। तन मन से रोगों को दूर करें। स्वास्थ्य हमारा अच्छा सब कुछ अच्छा हो। रोग ग्रसित अब नहीं देश का बच्चा हो। सूर्योदय से पहले उठकर खत्म नित्य क्रिया करें। जिसकी निरोगी काया जीवन वही जिया करें। सांसों को भरना…

  • बहाना | Kavita Bahana

    बहाना ( Bahana ) पूजा बिन नहाए के, स्वीकार करो नाथ, पानी नहीं आए है, हम धोए पाॅव हाॅथ, पूजा खाए पिए की, स्वीकार करो नाथ, लो वीपी के मरीज हम, चकराए हमरा माथ, पूजा कीर्तन भजन की, स्वीकार करो नाथ, हम अकेले रहते हैं, कोई न हमरे साथ, पूजा मेरे भंडारे की, स्वीकार करो…

  • एक स्त्री क्या चाहती है

    ” जानते हो एक स्त्री क्या चाहती है?” सम्मान और स्वाभिमान के साथ, समाज में सर उठाकर जीना…..। उसकी सहमति से उसके तन मन, पर अपना अधिकार जमाना …..। उसके सम्मान को ना ठेस पहुंचाये , उसे केवल भोग की वस्तु न मानें, उसके अस्तित्व को तार तार न करें…..। वह नहीं चाहती कि उसकी…

  • सबल- स्वस्थ हो देश

    सबल- स्वस्थ हो देश।।   योग भगाए रोग सब, करता हमें निरोग। तन-मन में हो ताजगी, सुखद बने संयोग।। योग साधना जो करे, भागे उसके भूत। आलस रहते दूर सब, तन रहता मजबूत।। खुश रहते हर पल सदा, जीवन में वो लोग। आत्म और परमात्म का, सदा कराते योग।। योग करें तो रोग सब, भागे…

  • चाभी | Kavita Chabhi

    चाभी ( Chabhi ) कौन कहता है ताले नहीं खुलते केन कहता है रास्ते नहीं मिलते चाभी खोजकर तो ज़रा देखिये तहखाने मे उतरकर तो देखिये हर चीज है मुहैया आपकी खातिर हर ताज के सिक्के बरामद होंगे कौन सी राजशाही चाहिए आपको आपके पुरे हर मुराद होंगे कम नहीं कुदरत के खजाने में आपको…

  • मुझे मिल गयी माँ

    मुझे मिल गयी माँ किसी को धरती मिली और,किसी को आकाश। मैं तो सबसे छोटा था तो, मुझे मिल गयी माँ। स्याह में भी टिमटिमाती, पूछती हर ख्वाब। शून्य में भी लग रहा था, पूरा था संसार। चमकता उज्जवल सा माथा, और चेहरा लाल। आंखों मे जितना ही ढूंढो, दिखता था बस प्यार। चेहरे की…

  • आधुनिक युग विवाह का चलन | मनहर घनाक्षरी छंद

    आधुनिक युग विवाह का चलन सुनो जी बात राज की व्यथा कहूं मैं आज की शादी वाले घर पर काज करवाते हैं बन्ना देखो हीरो लागे बन्नी जी हीरोइन लागे सौंदर्य घर जाकर साज करवाते हैं शादी के जी रश्म रीत भूले हैं शगुन गीत चूल्हा चौका सारे काम दूजा कर जाते हैं बड़ी शर्म…

  • इंसाफ | Laghu Katha Insaaf

    “आप कहते हैं कि हम अपने इलाके के बड़े जमींदार में से आते हैं, कहाँ तक सच हैॽ” जज ने रामबदन सिंह से पूछा। “लोगों की सांस तक कहती हैं।” रामबदन सिंह ने अपनी मूंछें ऐंठते हुए कहा। “इसका मतलब यह कि आप लोगों में अपना दहशत बनाए रखते हैं और किसी को अपनी मर्जी…

  • चिड़ियों से सीखें | Chidiyon se Sikhen

    चिड़ियों से सीखें चिडियों से सीखे हम वैज्ञानिक युग के विक्षिप्त विकसित कुत्सित मानव प्रेम-प्रीतिकी रीति गीत पेड़ की डाली की महकती चहकती दुनिया बेबस,बंटे,झुलसे,त्रस्त मानव को मुक्ति-मंत्र का संदेश जो हमें देते बहुजन हिताय की नीति बरबस हमें सिखाती द्रोह-भावना को मिटाती पाप,लाभ,लोभ-भोग की परवाह किए बिना सब मिल आशियां बनाते शेखर कुमार श्रीवास्तव…