• कर्म का फल

    प्राचीन काल में एक छोटे से गाँव में एक युवक रहता था जिसका नाम आर्यन था। आर्यन एक बहुत ही धार्मिक और नेक दिल व्यक्ति था। वह हमेशा अपने आस पास के लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। आर्यन के पिता का नाम विक्रांत था और वह एक बहुत ही मेहनती और…

  • काश!

    काश! कर्म न जाने ,धर्म न जाने फिर सोचे यही बातकाश ! ये करता ,काश! वो करताकाश ! ये होता, काश ! वो होताकाश -काश कश्मकश में उलझा है इंसान ,माया के इस चक्रव्यूह में फंसा हुआ है नादान। सत्य ना बोले ,नित्य ना होवे,फिर सोचे यही बातकाश ये सुनता ,काश वो सुनताकाश ये होता,…

  • जब मैं खुद को ठीक कर रही थी

    रात का अंधेरा घना था, लेकिन अंदर का अंधेरा उससे भी ज्यादा। मैं आईने के सामने खड़ी थी, अपनी ही आँखों में झाँकने की कोशिश कर रही थी। वहाँ एक थकी हुई स्त्री खड़ी थी—जिसने दूसरों को खुश रखने में खुद को खो दिया था। लेकिन उस रात, कुछ बदल गया। मैं अपने भीतर उठती…

  • एक दिन का सम्मान

    महिला दिवस पर सोशल मीडिया पर बधाइयों की बौछार थी। हर ओर से संदेश आ रहे थे—“नारी शक्ति को प्रणाम,”“बिना महिलाओं के ये दुनिया अधूरी है,”“हर नारी का सम्मान करें,”और न जाने क्या-क्या! रिया के फोन पर भी बधाइयों का तांता लगा हुआ था। उसके दफ्तर के पुरुष सहकर्मी, मोहल्ले के लोग, रिश्तेदार—सबने महिला दिवस…

  • चेतावनी गीत

    चेतावनी गीत सही चिकित्सा करनी होगी ,बहसी और दरिन्दों की ।शीघ्र व्यवस्था करनी होगी ,बस, फांसी के फन्दों की ॥ अभी अधखिली कली ,फूल बनने की थी तैयारी में ।अपनी खुशबू से गुलशन को ,महकाने की बारी में ।किन्तु खिलने से पहले ही ,बेरहमी से मसल दिया ।बनना था उसको प्रसून ,पर कैसे रूप में…

  • ये मछलियां

    ये मछलियां ! मछलियां अक्सर ज़िन्दा रह जाती हैंअपने गिल्स फड़फड़ाते,छिपा जाती है लिंब। स्त्री भी ज़िंदा रह जाती हैपलकें फड़फड़ाती अपने श्वसन तंत्र में।धरती को ही तो देख पाती है,अपने ही किसी चाँद में तैरते हुएऔरछिपा लेती है अपना स्त्री लिंग। अपने माथे की बिंदी को मानती है,मछलियों का चूमना।ये भी एक शगुन हैक्योंकि…

  • नारी शक्ति

    नारी शक्ति (अबला नहीं) नारी हूं मैं नारायणी,शक्ति का अवतार।।अबला नहीं समझो मुझको,नहीं समझो लाचार।। सबला हूॅ॑ लक्ष्मीबाई सी,सती सीता कहलाऊं।।प्रेम सरिता राधारानी,ज्योति स्वरुपा बन जाऊं।। मुझसे ही है सृष्टि सारी,जगति का आधार।।मुझसे से ही चले गृहस्थी,फूले-फले घर-द्वार।। नारी रूप है नारायणी का,इसके रूप हैं हजार।।माॅ॑ बेटी बहन पत्नी रूप में,इसी से चलता ये संसार।।…

  • पल दो पल का शायर

    पल दो पल का शायर साहिर;वह लफ़्ज़ों का जादूगरपल दो पल का शायरउसने सहेवक़्त के सितमयहीं से बन गया उसका विद्रोही क़लम कौन भूल सकता हैउसकी ज़िन्दगी की “तल्ख़ियाँ”कौन भूल सकता हैउसके तसव्वर से उभरती “परछाइयाँ” हालांकि;लुधियाना शहर नेउसे कुछ न दियारुसवाई और बेरुख़ी के सिवाफिर भी;उसने लगा रखा अपने सीने सेइस दयार का नाम……

  • होली का त्यौहार

    होली का त्यौहार होली पर्व पर हमारा बस एक ध्यान हों ।हर पल हमारे प्रभुवर का नाम हों ।जब तक इस तन में प्राण हैं तब तक नाम हों ।हम मूर्च्छा को तोड़े प्रभुवर का नाम हों ।खाते – पीते सोते जागते प्रभुवर का नाम हों ।जग की माया से पग – पग पर हमने…

  • शबरी से द्रौपदी मुर्मू तक का सफर : महिला दिवस विशेष

    अपनी मंज़िल के लिए अपनी राहें चुनती महिलाएँ।(महिलाएँ सिर्फ़ घर की रोशनी ही नहीं हैं, बल्कि उस रोशनी को जलाने वाली लौ भी हैं।) आज, लड़कियाँ उच्च शिक्षा और कौशल विकास में लड़कों के बराबर शैक्षिक उपलब्धियाँ हासिल कर रही हैं, 50% से अधिक युवतियाँ कक्षा 12 तक की पढ़ाई पूरी कर रही हैं और…