• नारी की वेदनाएं

    भारत को पुरुष प्रधान देश माना जाता है। प्राचीन काल से ही भारत में महिलाओं को दोयम दर्जे का माना जाता रहा है। उनके साथ हमेशा भेदभाव किया जाता है. महिलाओं के साथ हमेशा दुर्व्यवहार किया जाता है। यह पुरुष प्रधान संस्कृति के कारण हुआ है। इसके साथ ही, पारंपरिक पुरुष-प्रधान संस्कृति के प्रभाव में…

  • अविश्वासी

    राजू बहुत कंजूस और लालची प्रवृत्ति का व्यक्ति था। वह किसी पर आसानी से विश्वास नहीं करता था। एक दिन बाइक से घर जाते समय उसका एक्सीडेंट हो गया। उसके सीधे पैर में फ्रैक्चर हो गया। डॉक्टर ने उसकी हड्डी जोड़कर, प्लास्टर करके आराम करने की सलाह दी। दो दिन अस्पताल में रहने के बाद…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) सप्तम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) सप्तम दिवस हिल – मिल नवरात्रि पर्व का उत्सव मनाएं ।भुवाल – माता के सब मिल मंगल गीत गाएं।श्रद्धा और समर्पण का ले संबल चरण बढ़ायें।भुवाल माता के स्मरण से अध्यात्म दीप जलायें ।सागर में लहरें ज्यों अहं भावना का विलय करें ।आत्म – पक्ष के सही लक्ष्य को अपनायें…

  • कृष्ण कुमार निर्माण की कविताएं | Krishan Kumar Nirman Poetry

    बस,अब और नहीं बस,अब और नहीं,,तुम छिप जाओ,जाकर कहीं…बादलों की ओट में,,,क्योंकि….मुझसे सहन नहीं होताये व्यवहार तुम्हाराऔर तुम हो कि…प्यार के नाम परमुखौटे पर मुखौटे लगाकरप्रतिपल छल रहे हो मुझेऔर…साबित कर रहे होकि… तुम बेवफा होआखिर क्यों कर रहे हो तुम ऐसा…जाओ,छिप जाओकहीं बादलों की ओट में… उल्लू के पठ्ठे जी हाँ,,सबके पठ्ठे होते हैंजैसे…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) षष्ठ दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) षष्ठ दिवस भुवाल माता का नाम स्मरण कर लेबिरामी – बिरामी की पावन धराका अदभुत इतिहास हैंचिन्मय विश्वास हैंनभ से निरुपमरवि यान उतरागूँज रही हैं चपे – चपे परकल्याणी भुवाल – माता ।आपण अक्षत सहनाणी दिल कीतम में अभिनव आलोक बिखरासदैव जागते रहने सेसदा सफलताएं चलतीजागृति के आगे – आगेजीवन…

  • अयोध्या बासी श्री राम

    अयोध्या बासी श्री राम धन्य हुई धरा भारत की,धन्य अयोध्या नगरी है |धन्य हुआ हर जीव यहां,ये इतनी पावन नगरी है | अयोध्या की इन गलियों मे,बचपन बीता आपका |कण-कण श्री राम बसे,सिया बल-रामचन्द्र की जै | सिया बलरामचन्द्र की जै,पवनसुत हनुमान की जै |कहने को चौदह बरस,सहत्र वर्षों दूर रहे घर से | कल…

  • सूनी बगिया

    चारों ओर सामान बिखरा पड़ा है। चद्दर कंबल सब ऐसे पड़े हैं। घर नहीं कबाड़खाना बन चुका है। ऐसा हर समय नहीं रहता था। एक एक सामान बहुत शलीके से रखा रहता था क्या मजाल थी कोई सामान इधर से उधर हो जाए। लेकिन क्या कहा जा सकता है। मौत का ऐसा अनोखा झोंका आया…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) पंचम दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) पंचम दिवस भुवाल माता का स्मरण करदेंगे सपनों को आकारपायेंगे आस्था का आधारमन की आश फलेगीसुरभित सांस मिलेगीआत्मा पर आत्मा केशासन को विकसायेंगेंजीवन में सही से प्रामाणिकव्यवहार को अपनायेंगेअहंकार का सघन विलय करेंगेविनम्र व्यवहार को धारेंगेजीवन में धर्म हैं सहज कसौटीजागरूक – व्यवहार जीवननैया में…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) चतुर्थ दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) चतुर्थ दिवस भुवाल माता को नमन हमारा ।भुवाल माता का स्मरण हमकोनिरन्तर अंतर्दृष्टि की औरप्रेरित करता रहता हैं किकुछ भीतर भी हैं ।शायद बाहर कम हैं औरभीतर अधिक का बोध देता रहता हैं ।बाहर की दृष्टि पदार्थ के चक्रव्यूहमें फंसाते हुए अंतर्ज्ञान कोरीकल्पना का बोध कराते हुएअतृप्ति पैदा करती रहती…

  • नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) द्वितीय / तृतीय दिवस

    नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) द्वितीय / तृतीय दिवस नवरात्रि पर्व ( चैत्र ) द्वितीय / तृतीय दिवस समय का चक्र निरंतर अपनेहिसाब से चलता रहता हैं ।भुवाल माता का स्मरणआश्वासन , विश्वास ,संबंध और सरसता कीसमष्टि कराता रहता हैंवह साथ में समयानुसारआगे अध्यात्म का अवसरभी आता रहता हैं ।जिससे विचार थमजाते हैं और विचारको…