• दे मॉं सरस्वती ऐसा वरदान

    मेरे को वह हम सबको माँ सरस्वती ऐसा वरदान दे कि हम सबके जीवन में सदैव विद्या के संग विनय का ज्ञान होता रहे । वह माँ सरस्वती मेरे को ऐसा आशीर्वाद प्रदान करती रहना की मैं सदैव अपने लेखन को उत्कृष्टता पर लिख आध्यात्मिक संतुष्टि प्राप्त करता रहूँ। मेरे दिवंगत आध्यात्मिक शिक्षक शासन श्री…

  • समझदारी

    2005 की बात है। रामपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में मुकुल गुरु जी की पोस्टिंग हेड मास्टर के पद पर हुई। मुकुल बच्चों के प्रति बहुत संवेदनशील थे और बच्चों से विशेष लगाव व स्नेह रखते थे। मुकुल जी का व्यवहार बच्चों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण, समझदार और प्रेरक था। वे बच्चों की जरूरतों और समस्याओं…

  • आनंदा आसवले की कविताएं | Ananad Asawle Poetry

    बढ़ना सीखो लिखते लिखते चलना सीखो,चलते चलते बढ़ना सीखो।रुकना मत तूम राहों में अब,हर मुश्किल से लड़ना सीखो।।धृ।। काग़ज़ पे उतरे ख्वाब जो तेरे,उन्हें हकीकत बनाना सीखो।हर गिरने को सीढ़ी समझकर,मंज़िल तक जाना सीखो।।१।। लिखते लिखते चलना सीखो,चलते चलते बढ़ना सीखो….. थोड़ा दर्द, थोड़ा सुख होगा,हर रंग में जीना सीखो।आंधी आए या हो तूफ़ाँ,जैसे दीपक,…

  • निशाना

    तीव्र बुद्धि की सानिया एक गरीब लड़की थी। वह कक्षा 5 में पढ़ती थी। उसको जो भी सिखाओ या पढ़ाओ वह तुरंत सीख जाती थी और याद कर लेती थी। उसकी मैडम संध्या उसको बहुत प्यार करती थी। सानिया के पिता मजदूरी करते थे। पिछले 6 माह से सानिया विद्यालय बेहद कम आने लगी थी…

  • प्रभात सनातनी “राज” गोंडवी की कविताएं | Prabhat Sanatani Poetry

    वादे पे वादा अब वो वादा तो करती है पर भूल जाती है,अब उसे मैं नहीं कोई और याद आता है।उसकी मुस्कान अब हम पर मुस्कराने लगी है,उसके मुस्कान में अब और कोई नजर आता है।। अब वो बात नहीं रही हमारे और उसके बीच में,जो हमेशा मुझे ही हर पल याद किया करती थी।उसकी…

  • विवाह संस्कार

    विवाह संस्कार सात फेरे लेकर हम दोनों मिले,एक दूसरे के साथ जीवन का संगम बनाएं,और साथ में जीवन की यात्रा पर निकले। विवाह के बंधन में बंधने से ना डरें,एक दूसरे के साथ जीवन की यात्रा पर चलने का वचन दें,और साथ में जीवन की यात्रा पर निकलने का वचन दें। सात फेरे लेकर हम…

  • विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें | Vinay Sagar Jaiswal Poetry

    मुक़द्दर फूट गया उनके आने का वादा जब टूट गयादिल बोला के आज मुक़द्दर फूट गया इस दर्जा मदहोश किया उन आँखों नेदिल की दौलत पल भर में ही लूट गया कैसे बोझ सहे इतने सदमों का दिलशीशे का बर्तन था आखिर टूट गया वक़्त की आँधी होश कहाँ रहने देतीकौन मुसाफ़िर कितना पीछे छूट…

  • मीना भट्ट सिद्धार्थ की ग़ज़लें | Meena Bhatt Siddharth Poetry

    मुझको यारब न लाल-ओ- गुहर दीजिए मुझको यारब न लाल-ओ- गुहर दीजिएजो वतन पे हो कुर्बां वो सर दीजिए नफ़रतों का जहाँ पर बसेरा न होइक मुहब्बत का ऐसा नगर दीजिए जो गुज़रती हो दर से तुम्हारे सनमउस डगर का पता कुछ ख़बर दीजिए घर में वालिद से ही रौशनी है सदाउनकी छाया हमें उम्र…

  • भयमुक्त समाज बने

    आज पूरा समाज डरा हुआ है। पहले रास्ते चलते यदि कोई साथी मिल जाता था तो सोचते थे कि कोई साथी मिल गया है परन्तु आज उल्टा हो गया है। अब लोग जानवरों से अधिक मनुष्य से डरने लगा है। मनुष्य को हर समय यह भय सताता रहा है कि अकेला पड़ने पर कही कोई…

  • प्रकृति का मानवीकरण

    प्रकृति का मानवीकरण प्रकृति की गोद में हम रहते हैं,उसकी सुंदरता से हमें प्रेरणा मिलती है,की उसकी शक्ति से हमें जीवन मिलता है। प्रकृति की हरियाली में हम खो जाते हैं,उसकी ध्वनियों में हमें शांति मिलती है,की उसकी सुंदरता में हमें आनंद मिलता है। प्रकृति की शक्ति से हमें प्रेरणा मिलती है,उसकी सुंदरता से हमें…