Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • आत्म जागरण का पर्व: गुरु पूर्णिमा
    आलेख

    आत्म जागरण का पर्व: गुरु पूर्णिमा

    ByAdmin July 9, 2025July 9, 2025

    सामान्यतया सभी जीवों का जन्म माता-पिता के सहयोग से होता है वह चाहे पशु पक्षी हो या मानव । परंतु मानव जीवन में ही हम गुरु ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। मां पालन पोषण तो कर सकती हैं ,पिता आवश्यकता की पूर्ति कर सकते हैं परंतु जीवन में व्याप्त ज्ञान रूपी अंधकार से निकाल कर…

    Read More आत्म जागरण का पर्व: गुरु पूर्णिमाContinue

  • Mohini Nari
    आलेख

    नारी शक्ति के नौ रूपों कि आराधना नौरात एवं वर्तमान में भारत में नारी का यथार्थ –

    ByAdmin July 9, 2025July 9, 2025

    किसी भी युग या समाज के अस्तित्व कि कल्पना ही नही की जा सकती है ब्रह्म भी बिना नारी शक्ति के अधूरा है यदि सनातन में ब्रह्मा ,विष्णु ,शंकर देव है तो सरस्वती,लक्ष्मी ,पार्वती त्रिदेवियों नारि शक्ति बिना देव शक्ति संतुलित नही होती चूंकि ब्रह्म सत्ता निरपेक्ष एव विभेद रहित होती है अतः पूर्ण ब्रह्म…

    Read More नारी शक्ति के नौ रूपों कि आराधना नौरात एवं वर्तमान में भारत में नारी का यथार्थ –Continue

  • धर्मांतरण का धंधा: विदेशी फंडिंग और सामाजिक विघटन का षड्यंत्र
    आलेख

    धर्मांतरण का धंधा: विदेशी फंडिंग और सामाजिक विघटन का षड्यंत्र

    ByAdmin July 9, 2025July 9, 2025

    उत्तर प्रदेश में एटीएस ने एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें विदेशी फंडिंग के जरिए करीब 100 करोड़ रुपये 40 खातों में भेजे गए। मुख्य आरोपी ‘छांगरू बाबा’ उर्फ जमशेदुद्दीन के नेतृत्व में यह गिरोह ऊंची जाति की लड़कियों के लिए 15-16 लाख रुपये की दर से धर्मांतरण कराता था। यह मामला…

    Read More धर्मांतरण का धंधा: विदेशी फंडिंग और सामाजिक विघटन का षड्यंत्रContinue

  • पुनरावृत्ति
    कहानियां

    पुनरावृत्ति

    ByAdmin July 8, 2025July 8, 2025

    कक्षा 12 में पढ़ने वाली प्रियांशी अपनी सहपाठी राधा के साथ जनरल स्टोर से कुछ सामान खरीदने के लिए गई। जब प्रियांशी सामान खरीदने और दुकानदार से बातें करने में व्यस्त थी तो राधा ने चुपके से नेल पॉलिश और फेसवाश को चुराकर अपने बैग में छुपा लिया। यह सब करते प्रियांशी ने राधा को…

    Read More पुनरावृत्तिContinue

  • आखिरी रास्ता
    कहानियां

    आखिरी रास्ता

    ByAdmin July 7, 2025July 7, 2025

    अनपढ़ रामू मजदूरी करता था। एक दिन प्रात 8:00 बजे जैसे ही वह काम पर पहुँचा, तो उसके मजदूर साथी सौरभ ने उससे कहा- “रामू भैया, तुम आज काम पर क्यों आए हो? तुम्हारे घर तो मेहमान आए हुए हैं। तुम्हें तो आज उनके साथ होना चाहिए था। एक दिन काम पर ना आते तो…

    Read More आखिरी रास्ताContinue

  • गुनहगार
    कहानियां

    गुनहगार

    ByAdmin July 7, 2025July 7, 2025

    कोतवाली के सामने से गुजरते वक्त… अचानक मेरी नज़र कोतवाली के बाहर गुमसुम, मायूस बैठी चिर परिचित महिला पर पड़ी। ऐसा लगा जैसे कि वह महिला मेरे मित्र राजन की पत्नी सुनीता हो। हालांकि मैं कोतवाली से थोड़ा आगे निकल चुका था, लेकिन मेरे दिल ने कहा… जरूर कोई बात है। तभी वे कोतवाली आयी…

    Read More गुनहगारContinue

  • Sawan ke Jhoole
    आलेख

    सावन मनभावन: भीगते मौसम में साहित्य और संवेदना की हरियाली

    ByAdmin July 7, 2025July 7, 2025

    सावन केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि भारतीय जीवन, साहित्य और संस्कृति में एक गहरी आत्मिक अनुभूति है। यह मौसम न केवल धरती को हरा करता है, बल्कि मन को भी तर करता है। लोकगीतों, झूले, तीज और कविता के माध्यम से सावन स्त्रियों की अभिव्यक्ति, प्रेम की प्रतीक्षा और विरह की पीड़ा का स्वर बन…

    Read More सावन मनभावन: भीगते मौसम में साहित्य और संवेदना की हरियालीContinue

  • पब्लिक स्कूल
    आलेख

    बचपन के दुश्मन बने पब्लिक स्कूल

    ByAdmin July 6, 2025July 6, 2025

    याद आते हैं बचपन के वह दिन जब लोग गांव के बगिया में प्राथमिक ज्ञान प्राप्त करते थे। 5- 6 वर्ष की उम्र में पढ़ने जाया जाना शुरू किया। आराम से सुबह 9:00 बजे घर से निकलते थे । उछलते कूदते मौज मस्ती करते विद्यालय 10:00 बजे पहुंचते । हमें कभी होमवर्क का भी ज्यादा…

    Read More बचपन के दुश्मन बने पब्लिक स्कूलContinue

  • बच्चों को यांत्रिक मानव न बनाएं
    आलेख

    बच्चों को यांत्रिक मानव न बनाएं

    ByAdmin July 6, 2025July 6, 2025

    वर्तमान समय में अभिभावक बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के नाम पर उन्हें महंगे स्कूलों में भर्ती कराना, कोचिंग क्लास लगा देना मात्र अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लिया है। उनको गप्पे लड़ाना तास खेलना , पार्टियों में मौज मस्ती करने का तो समय होता है परंतु बच्चों के साथ बैठकर प्रेम से दो शब्द…

    Read More बच्चों को यांत्रिक मानव न बनाएंContinue

  • चातुर्मास
    विवेचना

    चातुर्मास अस्तित्व का एक सूक्ष्म विराम

    ByAdmin July 6, 2025July 6, 2025

    चातुर्मास — केवल पंचांग के चार मास नहीं, बल्कि मानवीय चेतना के गहरे आरोहण का एक सनातन सूत्र है। यह मात्र एक धार्मिक अवधि नहीं, अपितु जीवन के विराट चक्र में आत्म-अन्वेषण और पुनर्संयोजन का एक दार्शनिक पड़ाव है। आषाढ़ की देवशयनी एकादशी से कार्तिक की प्रबोधिनी एकादशी तक फैला यह काल, समय के प्रवाह…

    Read More चातुर्मास अस्तित्व का एक सूक्ष्म विरामContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 5 6 7 8 9 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search