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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • रोज़ हर दिल में मुहब्बत ढूंढ़ता हूँ
    शेरो-शायरी

    रोज़ हर दिल में मुहब्बत ढूंढ़ता हूँ

    ByAdmin October 25, 2020December 30, 2020

    रोज़ हर दिल में मुहब्बत ढूंढ़ता हूँ     नफ़रतों में वो नज़ारत ढूंढ़ता हूँ! रोज़ हर दिल में मुहब्बत ढूंढ़ता हूँ   हर गली में ही भटकता हूँ सारा दिन जिंदगी की रोज़ राहत ढूंढ़ता हूँ   पर नहीं मिलती किसी में ही यहां तो हर किसी में अच्छी आदत ढूंढ़ता हूँ   खो…

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  • कर कोई बावफ़ा नहीं होता
    शेरो-शायरी

    कर कोई बावफ़ा नहीं होता

    ByAdmin October 25, 2020December 30, 2020

    कर कोई बावफ़ा नहीं होता     कर कोई बावफ़ा नहीं होता प्यार से हर भरा नहीं होता   मैं नहीं जीता जीवन फ़िर तन्हा वो अगर जो जुदा नहीं होता   चाह  उसकी न दिल फ़िर रखता जीस्त में वो  मिला नहीं होता   आरजू फ़िर न होती मिलनें की शहर उसके गया नहीं…

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  • तस्वीरें भी कुछ कहती हैं
    कविताएँ

    तस्वीरें भी कुछ कहती हैं

    ByAdmin October 24, 2020December 30, 2020

    तस्वीरें भी कुछ कहती हैं   आज मेरे सामने एक तस्वीर नहीं , अनेकों तस्वीरें पड़ी हैं  | अपनी – अपनी व्यथा , दुख और दर्द को लेकर खड़ी हैं | ? आज माँ की तस्वीर को देखा , जो नम आँखों से मुझे देख रहीं थीं , आपनी ममता और स्नेह से दुलार रहीं…

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  • सफाई
    कविताएँ

    सफाई

    ByAdmin October 24, 2020December 30, 2020

    सफाई   आज तक ये बात मेरी समझ में न आई। तुम करो गन्दगी और मैं करूं सफाई।। मानवता खातिर काल ब्याल है यह, तृणवत न लेना बहुत विकराल है यह, अगर नहीं सम्भले पछताओगे भाई।।तुम करो० गांव गली कस्बा संसद तक फैली, स्वच्छ रखो चादर न होजाये मैली, तन और मन की अब रखो…

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  • अब कलम लिखे किसकी जयगान
    कविताएँ

    अब कलम लिखे किसकी जयगान

    ByAdmin October 24, 2020December 30, 2020

    अब कलम लिखे किसकी जयगान जब हुआ सबेरा खून खराबा इसी में रहता है जग सारा, वेद मंत्र सब धरे धरा पर नहीं करे कोई गुणगान | अब कलम लिखे ———–! रक्षक, भक्षक बनकर जीता अरमानों के अश्क़ को पीता, माली रौंदे अपनी बगिया गा गाकर पूरबी तान | अब कलम लिखे———! एक चमन है…

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  • सभ्य समाज की गाली हूँ
    कविताएँ

    सभ्य समाज की गाली हूँ | Sabhya Samaj ki Gaali

    ByAdmin October 24, 2020April 11, 2023

    सभ्य समाज की गाली हूँ  ( Sabhya samaj ki gaali hoon )   सांस रूकी तो मुर्दाबाद , सांस चली तो जिन्दाबाद ! चढ़ता नित नित सूली हूँ , मैं किस खेत की मूली हूँ  ! !   बंजारों की बस्ती में रहता हूँ , अपनी मस्ती में बहता हूँ ! जीवन की एक पहेली…

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  • जागल बिहारी : निकलल नेताजी के होशियारी
    कविताएँ

    जागल बिहारी : निकलल नेताजी के होशियारी

    ByAdmin October 24, 2020December 30, 2020

    जागल बिहारी : निकलल नेताजी के होशियारी *********** बिहार के जनता- भूल गईल बा मंदिर मस्जिद, आ भूल गईल बा जाति मजहब; भैया हो ! अबकी चुनाव में- बिहारी कइले बा गजब! जनता के मांग अबकी नेता के नइखे पचत, जेने जाईं ओन्ने बेरोजगार बाड़े पूछत। कहां बा# रोजगार? हे सरकार! वोटवा लेवे खातिर बानी…

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  • भरोसा क्या बहारों का
    शेरो-शायरी

    Ghazal | भरोसा क्या बहारों का

    ByAdmin October 24, 2020March 18, 2021

    भरोसा क्या बहारों का ( Bharosa Kya Baharon Ka )     गुलों को खुद खिला लेना भरोसा क्या बहारों का। खुदी से दोस्ती करना भरोसा क्या है यारों का।।   नहीं रौशन फिजा होती कभी भी आजमा लेना। है चंदा आसमां में तो नज़ारा क्या सितारों का।।   करो उम्मीद जब भी तुम हमेशा…

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  • लग रहा जैसे हो सजा जीवन
    शेरो-शायरी

    लग रहा जैसे हो सजा जीवन

    ByAdmin October 24, 2020December 30, 2020

    लग रहा जैसे हो सजा जीवन     लग रहा जैसे हो सजा जीवन! इस कदर ग़म से भर गया जीवन   जी न पाया कभी ख़ुशी के पल ग़म की भट्टी में यूँ जला जीवन   एक पल की ख़ुशी की चाहत में बस भटकता रहा मेरा जीवन   ग़म ही ग़म हैं मेरी…

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  • कृपा करो माँ पार्वती
    कविताएँ

    कृपा करो माँ पार्वती

    ByAdmin October 24, 2020December 30, 2020

    कृपा करो माँ पार्वती   (दुर्गा-अष्टमी पर विशेष)   कृपा करो माँ पार्वती। संहार , पालन, रचने वाली, तुम्ही तो हो आदिशक्ति।।   लाल चुनरिया ओढ सिंह पर, चढी भक्तों का मन हरती। खङग, चक्र , त्रिशूल, गदा ले, दुष्टों का मर्दन करती।।   सिद्धि मोक्ष-सुख देने वाली, भक्त-वत्सल ममता की मूर्ति। बिना तुम्हारे शिव…

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