सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़ की ग़ज़लें -2 | Poetry of Sarfraz Husain Faraz
तमाशा यह भी जहां को दिखा दिया मैंने तमाशा यह भी जहां को दिखा दिया मैंने।ख़िज़ां को फ़स्ले-बहारां बना दिया मैंने। किताबे-दिल से भी उसको हटा दिया मैंने।के जिसको अपनी नज़र से गिरा दिया मैंने। कहा था जो भी वो कर के दिखा दिया मैंने।वफ़ा से तेरी जफ़ा को हरा दिया मैंने। परिन्दा प्यार का…
