एक सो ग्यारह उपवास : बाल योगी क्षुल्लक श्री तारण सागर जी महाराज साहेब रचने जा रहे हैं एक अदभुत, अनोखा इतिहास
आचार्य श्री कुंथुसागर जी और आचार्य श्री गुणधर सागर जी महाराज साहेब के गुणी, प्रिय और तपस्वी, शिष्य, सलूम्बर गौरव बाल योगी 105 क्षुल्लक श्री तारण सागर जी महाराज साहेब ने एक बड़ा ही अदभुत संकल्प लिया है.. एक सो ग्यारह उपवास का.. आगे बढ़ने से पहले मैं बता दु की जैन मुनि अपने गृहस्थ जीवन मे मेरे छोटे भाई विनोद के ससुराल पक्ष से वास्ता रखते थे.. मगर अब उनकी दुनिया सिर्फ और सिर्फ जैन दर्शन, जैन तत्व और परमार्थ की राह है।
बाल योगी श्री तारण सागर जी महाराज साहेब के आज तक पचपन उपवास सफलता पूर्वक पूरे हो चुके हैं.. उनके तप की शक्ति इतनी अनोखी है कि पिछले पचपन दिनों से अन्न का एक दाना तक ग्रहण नही करने के बावजूद भी वे स्वस्थ हैं. मस्त है.. जिनेन्द्र आराधना में व्यस्त हैं।
मुनि श्री ने इस के पहले भी कई बड़े बड़े उपवास किये हैं.. जहा हम एक घण्टा तक भोजन के लिए नही रुक सकते हैं वे महीनों भूखे रहते हैं.. उनका तप अदभुत है.. अनोखा है.. दुनिया को हैरान कर देने वाला है।
मैंने मुनिराज से तप और उपवास के बारे में जानना चाहा कि यह जैन दर्शन में है भी या नही तो उन्होंने बताया कि बाहुबली, आदिनाथ जी आदि के उपवास के किस्से शास्त्रो में है.. वे सिक्का मर्तब करते हैं कि जैन धर्म मे उपवास की स्वीकार्यता है ।
एक सो ग्यारह उपवास ही क्यो पूछने पर आप ने बताया कि एक सो आठ उपवास तो आचार्य, उपाध्याय और मुनि और तीन उपवास सम्यक रत्न, सम्यक ज्ञान और सम्यक दर्शन की आराधना के लिए होते हैं ।
पूर्व में तो बाल योगी मुनिराज ने कई कई दिनों तक एक ही जगह पर खड़े खड़े उपवास किये हैं.. अभी एक सो ग्यारह उपवास के उनके संकल्प से पूरे जैन समाज मे हर्ष और आनंद का माहौल है.. महाराज जी अभी हस्तिनापुर जी मे बिराजमान है और 24 अक्टूबर 2025 को उनके उपवास की समाप्ति की तारीख है ।
इस तारीख पर महाराज जी के पास उपस्थित रहने के लिए पूरे देश भर के जैन बन्धुओ ने अभी से योजनाएं बनानी शुरू कर दी है.. कई लोगो ने अपनी अपनी टिकटे सुरक्षित कर ली है.. कुछ लोगो ने दीपावली वही मनाने का मानस भी बना लिया है और उसी हिसाब से वे अपने कार्यक्रमो का नियोजन भी कर रहे हैं ।
मुनिश्री बहुत ही सरल स्वभावी है.. धर्म प्रेमियों की जिज्ञासा का शांति से निराकरण करते हैं.. मैं आशा करता हु की उनका यह तप सिर्फ उनके ही नही बल्कि समस्त मानव जाति और धरती पर रहने वाले समस्त छोटे बड़े जीव जन्तुओं के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेंगा ।
मुनिश्री के शेष तप शांति से पूरे हो वीर प्रभु से यही प्रार्थना करता हु.. आप सभी भी अपनी पूजाओं में मुनिराज को याद करे और वे आंतरिक ओर बाहरी शक्तियों से ओतप्रोत हो यह भावनाये भाए.. आप सभी भी उनके पारणे के कार्यक्रम में उपस्थित रह कर धर्म लाभ लेवे.. आप सभी के लिए समुचित व्यवस्था हस्तिनापुर जी मे की गई है.. मैं तो इस पलो का साक्षी जरूर बनूँगा.. आप भी इन गौरवमयी पलो का अहसास जरूर करे.. अनेक अनेक धन्यवाद ।

रमेश तोरावत जैन
अकोला
मोब 9028371436
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