पार्वती के महामहि सुनु

पार्वती के महामहि सुनु

पार्वती के महामहि सुनु

विघ्न हर्ता , एक दंता l
शंख बजाता , धुन बनाता ll
वक्रतुंडा महाकाया l
चिन्तामण ही विघ्न काया ll
एक – दो – तीन आया,
लालबाग राजा हां हां l
लालबाग राजा ll

श्वेत , ध्वनि – प्रति ध्वनि l
गली – गली पिल्लैयार आनी ll
शुभ कार्य या पूजा – अर्चना l
जिनकी होती प्रथम आराधना ll
एक दो तीन आया,
लालबाग राजा हां हां l
लालबाग राजा ll

दिया युगोंगा परिचय l
माता – पिता ब्रह्माण्ड चर्या ll
मूशी है जिसका वाहक l
वही है पार्वती के पुत्रक ll
जन्मासुर, तारकासुर कथा अंत ,
एक – दो – तीन आया,
लालबाग राज़ हां हां l
लालबाग राजा ll

शिष्य – शिष्या ,
गुरु – गुरुवाइन ,
साथ प्रबंधक से बना l
लंबोदर तुंगल ए दरबार ll
अलंकृत हुई संप्रदाय से l
वेद , पुराण , श्लोक से ll
नृत्य , गीत , भक्ति से l
एक – दो – तीन आया ,
लालबाग राजा हां हां l
लालबाग राजा ll

शिवपुराण की अवतरण – तिथि l
विष्णुपुराण की मंगलमूर्ति ll
संस्कृतिकोशानुसार सृष्ट ,
गण ” पवित्रक “
पति ” स्वामी “
देखा आज हम सबने l
लंबोदर तुंगल ए दरबार ll
एक – दो – तीन आया ,
लालबाग राजा हां हां l
लालबाग राजा ll

वाहिद खान पेंडारी

( हिंदी : प्राध्यापक ) उपनाम : जय हिंद

Tungal School of Basic & Applied Sciences , Jamkhandi

Karnataka

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • अफसाने तेरे नाम के -hindi poems

    अफसाने तेरे नाम के   मेरी वफा का सिला यही वो मुझपे मरता है  मिलता है जब भी जख्म हरा जरूर करताहै जाने कहां से सीखा जीने का यह सलीका कत्ल मेरा काँटे से नहीं वो फूल से करता है। वक्त को रखता हमेशा अपनी निगेहबानी में वो जिनदगी को बडे गुरुर से जीता है…

  • मधुरिम-बंसत | Madhurim Basant

    मधुरिम-बंसत ( Madhurim-Basant ) तुम आये हो नव-बंसत बन कर मेरे प्रेम – नगर में दुष्यंत बन कर कुंठित हो चुकी थीं वेदनाएँ बिखर गई थीं सम्भावनाएँ आज पथरीली बंजर ह्रदय की धरा को चीर कर फिर फूटा एक प्रेम अंकुर….. पतझड़ की डोली हो गई विदा विदाई के गीत गाने लगी वियोगी हवा अतीत…

  • मुस्कुराना चाहिए | Muskurana chahiye | Life poetry

    मुस्कुराना चाहिए ( Muskurana chahiye ) ****** सदैव मुस्कुराना चाहिए, भूल से भी क्रोध नहीं जताना चाहिए। धर्म, विज्ञान सबने इसे खारिज किया है, धैर्य और मुस्कुराने को ही प्राथमिकता दिया है। मुस्कुराने से सौंदर्य निखरता है, चेहरे पर तनाव आने से भी डरता है। स्वास्थ्यवर्धक भी है मुस्कुराना, सो साथियों सदैव मुस्कुराना । हर…

  • मां का दर्द | Maa ka Dard

    मां का दर्द ( Maa ka dard )   संसार में कोई ऐसी दवा नहीं , जो मां का दर्द दूर कर सके। आठों पहर जो स्वयं को भुलाए, दूसरों के दुख की चिंता करती। उसकी भूख खत्म सी हो गई, बच्चों को पीड़ा से कराहते देख। मातृत्व के समान इस जग में, कोई और…

  • कैनवस के पास | Kavita Canvas ke Paas

    कैनवस के पास ( Canvas ke Paas ) कैनवस पर तस्वीर बनाते समय ‘कैनवस के पास’ सिर्फ़ रंग और ब्रश ही नहीं बिखरे होते और भी बहुत कुछ होता है- तुम्हारी यादें , टूटे सपनों के टुकड़े, गुज़री मुहब्बत पानी की बोतल, नज़दीक का चश्मा, पीले पत्ते… धूप, कुर्सी, घास, बड़ी छतरी , कैप, पैन,…

  • पर्यावरण और पेड़ | Kavita Paryavaran aur Ped

    पर्यावरण और पेड़ ( Paryavaran aur ped ) आओ मिलकर पेड़ लगाएं, धरा को फिर से स्वर्ग बनाएं। तेज गर्मी हो या अनावृष्टि, प्रकृति की अनियमितता से बचाएं। बरसों से मानव विकास के नाम पर पेड़ों को है काट रहा। अनजाने में ही वो विनाश का आमंत्रण सबको बांट रहा। पेड़ ही नहीं रहेंगे तो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *