संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान

संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान | Kavita Sambhal ja re

संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान

 

संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान
संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान

 

गाइडलाइन जारी कर दी
दिल्ली बड़ा-बड़ा फरमान
संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2

 

मुंह पर मास्क दो गज दूरी
बचा लेगी तेरी ज्यान
संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2

 

संकट रो खोटो टाइम है
सोच समझ ले नादान
संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2

 

कोरोना योद्धा बण लड़नो
जण-जण की बचाणी ज्यान
संभऴ ज्या रे मानव सुरज्ञान 2

 

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/kavita-aarzoo/

 

 

Similar Posts

  • औघड़ दानी | Aughad dani par kavita

    औघड़ दानी ( Aughad dani )   जब कोई ना हो सहारा रिश्तो के बंधन से हारा फिरता जब तू मारा मारा देता एक ही साथ तुम्हारा औघड़ दानी बाबा प्यारा जिसने भवसागर को तारा मिले नदी को जैसे किनारा वह हरता है संकट सारा वह जाने कष्ट है हमारा करता जीवन में उजियारा जो…

  • करगिल जंग | Kargil Jung

    करगिल जंग! ( Kargil Jung )   युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे…

  • दिल तो बच्चा है जी | Kavita dil toh baccha hai ji

    दिल तो बच्चा है जी ( Dil toh baccha hai ji )    सुनता कहां किसी की कभी करता रहता ये मनमानियां दिलकश अदाएं इसकी बड़ी चुपचाप रहता संग खामोशियां किसी को बताता बिल्कुल नहीं मनमौजी बहुत करता नादानियां गुमसुम नहीं ये, यह मालूम है मुझे है पता दिल तो मशगूल अपनी ही धुन मैं…

  • सांवरिया मेंह बरसा दे रै | Saawariya marwadi geet

    सांवरिया मेंह बरसा दे रै ( Saawariya : Marwadi geet )   सांवरिया मेंह बरसा दे रै,सांवरिया मेंह बरसा दे रै। पड़े तावड़ो तपै धरती, मन हरसा दे रै। सांवरिया मेंह बरसा दे रै   यो जेठ रो महीनो ठाडो, आग उगळतो तावड़ो। गर्मी से बेहाल होरया, होरयो मिनट बावळो। आषाढ़ रा बादळ बरसा, सावण…

  • क़लम की ताक़त | Poem kalam ki taqat

     क़लम की ताक़त ( Kalam ki taqat )      क़लम चलती ही गई लेकिन स्याही ख़त्म ही नहीं हुई, चेहरे पर झुर्रियां और ऑंसूओं की लाईन सी बन गई। लोगों ने कहा क्या होगा लिखनें से पर हाथ रुकें नहीं, जब रूपए आने लगें तो हमारी तकदीर ही बदल गई।।   अब वही लोग…

  • तमाशा | Kavita Tamasha

    तमाशा ( Tamasha )   कौन कहता है आईने झूठ नहीं बोलते वे चेहरे के पीछे की परतों को कहाँ खोलते हैं दिये गये सम्मान में भी दिली सम्मान कहाँ होता है उसमे तोचापलूसी के पीछे छिपा मतलब हि होता है झंडा उठाने वाले भी लेते हैं अपनी मजदूरी दल से उन्हें किसी हमदर्दी नहीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *