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मन की पीड़ा
मन की पीड़ा मन की पीड़ा से जब कांपीं उंगली तो ये शब्द निचोड़ेअक्षर-अक्षर दर्द भरा हो तो प्रस्फुटन कहाँ पर होगा अभिशापों के शब्दबाण लेकर दुर्वासा खड़े हुए हैंकैसे कह दूँ शकुन्तला का फ़िर अनुकरण कहाँ पर होगा नया रूप धर धोबी आए मन में मैल आज भी उनकेईश्वर ही जाने सीता का नव…
मन की पीड़ा | Kavita Man ki Peeda
मन की पीड़ा ( Man ki Peeda ) मन की पीड़ा मन हि जाने और न कोई समझ सका है भीतर ही भीतर दम घुटता है कहने को तो हर कोई सगा है अपने हि बने हैं विषधारी सारे लहू गरल संग घूम रहा है कच्ची मिट्टी के हुए हैं रिश्ते सारे मतलब की धुन…