मन की पीड़ा

मन की पीड़ा | Kavita Man ki Peeda

मन की पीड़ा

( Man ki Peeda )

मन की पीड़ा मन हि जाने
और न कोई समझ सका है
भीतर ही भीतर दम घुटता है
कहने को तो हर कोई सगा है

अपने हि बने हैं विषधारी सारे
लहू गरल संग घूम रहा है
कच्ची मिट्टी के हुए हैं रिश्ते सारे
मतलब की धुन में सब झूम रहा है

दया, धर्म सब हिये किताबी
साथ सफर का छूट रहा है
रिश्ते नाते हैं कहने की बातें
दिल से दिल का नाता टूट रहा है

छत के नीचे भी तन्हाई है
इक दूजे मे रुस्वाई है
पिता पुत्र भाई बहन तक मे भी
होती रोज लडाई है

मानवता की बात करें क्या हम
मानव हि मानव रहा नहीं
श्वान को हड्डी दिखती जैसे
प्रेम सुधा रस रहा नहीं

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

मन के भाव | Kavita Man ke Bhav

Similar Posts

  • राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी 2024 )

    राष्ट्रीय युवा दिवस (12 जनवरी 2024 ) ( National Youth Day )    आध्यात्म ओज अनुपमा,स्वामी विवेकानंद व्यक्तित्व से वेदांत ज्ञान अद्भुत प्रबोधन, सह्रदय मानवता श्री वंदन । सनातन धर्म ध्वज पताका, वैश्विक पटल अनूप मंडन । युग युगांतर नैतिक उपदेश, युवा प्रेरणा पुंज कृतित्व से । आध्यात्म ओज अनुपमा,स्वामी विवेकानंद व्यक्तित्व से ।। दृढ़…

  • शंकर दयाल सिंह | Shankar Dayal Singh par kavita

    शंकर दयाल सिंह ( Shankar Dayal Singh )   भगवती कृपा प्रसाद पाया शंकर दयाल नाम भवानीपुरा में जन्मे शंकर कीर्तिमान सरनाम साहित्य कमल पंखुड़ी सा सौरभ लुटाता रहा सांसद रहकर सत्ता में परचम लहराता रहा राष्ट्रप्रेम भरा दीवाना देश प्रेम को जीता था जीवन की धूप छांव प्रेम सुधा रस पीता था संस्कृति सनातन…

  • करवा चौथ | Karwa Chauth kavita

    करवा चौथ ( Karwa Chauth ) ( 3 )  मेरे जीवन की चांदनी, तुझको लगता हूं चंद्र प्रिये। रोम रोम में स्नेह रश्मियां, भीगी सुधारस रंध्र प्रिये। दिल से दिल के तार जुड़े, सुरों का संगम भावन हो। मैं मनमौजी बादल हूं, तुम मधुर बरसता सावन हो। सौम्य सुधा सुधाकर पाओ, करती हो उपवास प्रिये।…

  • सनातन धर्म हमारा | Kavita Sanatan Dharm Hamara

    सनातन धर्म हमारा ( Sanatan Dharm Hamara )   चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा ********* सृष्टि संग अवतरण बिंब, अनंत अनुपमा आह्लाद । मानवता श्री वंदन सेतु, आनंदिता परम प्रसाद । वेद आभा अंतर्निहित, अविरल ओजस्विता धारा । चिन्मयी पुंज,सनातन धर्म हमारा ।। नैतिकता दिव्य रंग रुप, अपार आस्था सत्कार । धर्म कर्म पुनीत रश्मियां, जीवन…

  • ऐ दुनियावालों | Aye Duniya Walo

    ऐ ! दुनियावालों ( Aye duniya walo ) खून- खराबा किसी के लिए है खेल-खिलौना, मगर मेरी तहजीब अलग है। कोई बोता है नफरतों का बीज, पर मेरी तहजीब अलग है। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन, पारसी, यहूदी, सभी हैं मेरे अपने, हम हैं एक डाल के फूल, गमकने दो बहारों में, मेरी तहजीब…

  • अनहोनी | Kavita anhoni

    अनहोनी ( Anhoni )   अनहोनी सी घट रही अब दो देशों की लड़ाई में विश्वयुद्ध के कगार पे जग सदी जा रही खाई में   लड़ाकू विमान बमबारी विध्वंसक तबाही लाते महासमर होता तभी आपस में मतभेद हो जाते   जब युद्ध छिड़ा आपस में भीषण नरसंहार हुआ शहर के शहर खत्म हो गए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *