मन की पीड़ा

मन की पीड़ा

मन की पीड़ा

मन की पीड़ा से जब कांपीं उंगली तो ये शब्द निचोड़े
अक्षर-अक्षर दर्द भरा हो तो प्रस्फुटन कहाँ पर होगा

अभिशापों के शब्दबाण लेकर दुर्वासा खड़े हुए हैं
कैसे कह दूँ शकुन्तला का फ़िर अनुकरण कहाँ पर होगा

नया रूप धर धोबी आए मन में मैल आज भी उनके
ईश्वर ही जाने सीता का नव अवतरण कहाँ पर होगा

गली-गली फिरते दु:शासन भीष्म झुकाए सिर बैठे हैं
रजस्वला उन द्रौपदियों का आँचल हरण कहाँ पर होगा

मीठी चुभन कुटिल कुल्टा सी नौंच रही तन के घावों को
नमक छिड़कने हाथ आ गए सद्आचरण कहाँ पर होगा

वह कोमल कलिका कचनारी मैं धतूर का फूल कसैला
वह बगिया में इठलाएगी मेरा खिलन कहाँ पर होगा

देशपाल सिंह राघव ‘वाचाल’
गुरुग्राम महानगर
हरियाणा

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • चूड़ियों की खनक | Chudiyon ki Khanak

    चूड़ियों की खनक ( Chudiyon ki khanak )   चूड़ियों की खनक में,नारीत्व की परिभाषा दिव्य सनातन धर्म संस्कृति, कंगन कर कमल अलंकरण । परम प्रतिष्ठा दांपत्य शोभा, सरित प्रवाह माधुर्य अंतःकरण । हर धर्म पंथ समाज क्षेत्र, महिला शक्ति अनूप अभिलाषा । चूड़ियों की खनक में,नारीत्व की परिभाषा ।। विविध वर्णी अनुपमता, आकृति मोहक…

  • अंधी दौड़ | Kavita andhi daud

    अंधी दौड़ ( Andhi daud )   नशा और उन्माद यह सर्द रात कैसा दौर आज नशा और उन्माद संस्कृति का विनाश प्रश्न पूछने पर बड़े बेतुके जवाब चुप रह जाते आप बिगड़ रहा समाज अंधी दौड़ कैसी भागमभाग बेकाबू गाड़ियां बेखौफ सवार अंधकार चहु ओर नीरसता सन्नाटा मौत का तांडव कहीं कोई दिखाता  …

  • बदली का स्वैग | Badli ka Swag

    बदली का स्वैग ( Badli ka swag )    हवा के परों पर उड़ती हुई सी आई एक बदली- छोड़ सारे राग-रोग जम -ठहर गई रमा के जोग। आंँखों में है आकाश कर में बूँदों का पाश छलकेगी- बरसेगी देगी आज जीवन औ धरा को सांँस- इस उन्मत्त बदली को शायद है पता- उसके यूँ…

  • दिवाली बधाई हो बधाई | Hindi Diwali Kavita

    दिवाली : बधाई हो बधाई   बधाई हो बधाई, दिवाली की शुभ घड़ी आई। बधाई हो बधाई, मेरे घर आंगन खुशियां लाई। बधाई हो…।।1।। फूलों की माला लेकर, नवरंग की रंगोली बनाई। फूलों से सज गए घर, लड्डू और मिठाई खाई। बधाई हो…।।2।। प्रकाश का यह त्यौहार, खुशियों की सौगात है आई। शुभ लाभ का…

  • चतुर्दश मणि रत्न अनूप | Chaturdash Mani Ratna Anup

    चतुर्दश मणि रत्न अनूप ( Chaturdash Mani Ratna Anup )    स्वर्गलोक वैभव ऐश्वर्य हीन, महर्षि दुर्वासा ऋषि शाप । संकट समाधान देव अनुनय, विष्णु सानिध्य विमुक्त संताप । परम सुझाव नीर निधि विलोड़न, श्री हरि दैविक कृपा स्पंदन से । चतुर्दश मणि रत्न अनूप,जलधि सुधा मंथन से ।। देवगण असुर वासुकि नाग संग, मंदार…

  • पुष्प की अभिलाषा | Pushp par Kavita

    पुष्प की अभिलाषा ( Pushp ki abhilasha )    मै हूँ एक छोटा सा यह फूल, निकल आता पौधे पर फूल। पहले होता में बाग व बग़ीचे, आज लगाते घर गमले बग़ीचे।। मैं एक फूल अकेला हूँ ऐसा, खिलते तोड़ लिया मुझे जाता। वन माली मुझको पानी है देता, खाद और रखवाली भी करता।। कभी-कभी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *