Tag: शेरो-शायरी
दिल तुझे देख बहल जाता है
दिल तुझे देख बहल जाता है दिल तुझे देख बहल जाता है। साथ तेरा ही अब तो भाता है।। तेरा नज़रें झुका के मुस्काना। मुझको तेरे क़रीब लाता है।। पास आना तेरा बहाने से । दिल में अरमां कई जगाता है।। डूब जाऊँ तेरे तसव्वुर में । रोज ये ही …
तुम जो यूं नज़रें मिला रहे हो
तुम जो यूं नज़रें मिला रहे हो तुम जो यूं नज़रें मिला रहे हो। जिगर पे नश्तर चला रहे हो।। जो जैसा है वैसा ही रहेगा। क्यों अपने दिल को जला रहे हो।। बहुत है अहसान ये तुम्हारा । नज़र से जो मय पिला रहे हो।। हरेक पल तुम यूँ …
किताबों से सदा वो आ रही थी
किताबों से सदा वो आ रही थी किताबों से सदा वो आ रही थी ग़ज़ल यादों की कोई रो पड़ी थी दयारें आ रही थी नफ़रतों की मुहब्बत की कली मुरझा रही थी खबर दिल को नहीं थी बेवफ़ा है वफ़ा की सोचकर राहें चुनी थी वो आंखें देखती है…
आँखों की नमी मुहब्बत को जाहिर कर देता है
आँखों की नमी मुहब्बत को जाहिर कर देता है आँखों की नमी मुहब्बत को जाहिर कर देता है इंसान को मुहब्बत भी ज़रा कायर कर देता है यह नहीं है की में तुझसे बात करना नहीं चाहता बात बात पर तेरी आँखें मुझको बाहिर कर देता है तेरे साथ, तुझ से…
दुख की घङियां सुखों में यूं ढल जाती है
दुख की घङियां सुखों में यूं ढल जाती है दुख की घङियां सुखों में यूं ढल जाती है। जैसे फूलों में कलियां बदल जाती है ।। आँधियों में अग़र वो खुदा चाहे तो। फिर से बुझती हुई लौ भी जल जाती है।। हैं नादां चाहे जो शोहरत को वो । फूल …
सादगी तेरी और तेरी जवानी
सादगी तेरी और तेरी जवानी सादगी तेरी और तेरी जवानी। है दिलों को लगती ये कितनी सुहानी।। यूं ही रूठ जाना खुद ही फिर मान जाना। उम्र होती मासूम सी ये दीवानी ।। ख्वाब यूं ही बुनती किसी की ना सुनती। खूं में है इसके कुछ अज़ब सी रवानी।। अंखियों…
दिल-ए-नादान
दिल-ए-नादान दिले नादान तुझे कहीं का रहने न दिया। ये कौन जाग जाग कर हमें सोने न दिया।। मुद्दतों बाद नज़र आयी थी बहार मुझे, बज्म में राज खुल जाने का डर रोने न दिया।। लोग नहला धुला के कब्र तक पहुंचा आये, मेरे घर में मुझे कुछ देर भी रहने…
हाँ जीस्त ख़ुशी से ही रब आबाद नहीं करता
हाँ जीस्त ख़ुशी से ही रब आबाद नहीं करता हाँ जीस्त ख़ुशी से ही रब आबाद नहीं करता हर रोज़ ख़ुदा से फ़िर फ़रयाद नहीं करता हाँ शहर में होते कितने क़त्ल न जाने फ़िर इक मासूम को वो जो आजाद नहीं करता मैं पेश नहीं आता फ़िर उससे अदावत से…
फूल चाहत
फूल चाहत फूल मैंनें प्यार का भेजा उधर है ! नफ़रत का तेजाब आया वो इधर है हो गया है गुम कहीं ऐसा कहां वो अब मुझे मिलती नहीं उसकी ख़बर है इसलिए बेजार दिल रहता है मेरा जीस्त में मेरी ग़मों का ही असर है ढूंढ़ता ही मैं रहा…
माने से दिल मानता नहीं है!
माने से दिल मानता नहीं है! माने से दिल मानता नहीं है! उसके बिन कुछ चाहता नहीं है सदा इसे प्यार चाहिए दिल ख़ुशी ग़म ये जानता नहीं है हाँ सिर्फ़ आता दिखाना गुस्सा कि प्यार वो बोलता नहीं है कि नफ़रतों से मुझे वो देखें मुहब्बत से देखता नहीं…