माने से दिल मानता नहीं है

माने से दिल मानता नहीं है!

माने से दिल मानता नहीं है!

 

 

माने से दिल मानता नहीं है!

उसके बिन कुछ चाहता नहीं है

 

सदा इसे प्यार चाहिए दिल

ख़ुशी ग़म ये जानता नहीं है

 

हाँ सिर्फ़ आता दिखाना गुस्सा

कि प्यार वो बोलता नहीं है

 

कि नफ़रतों से मुझे वो देखें

मुहब्बत से देखता नहीं है

 

उसे भुला दे हमेशा दिल से

तुझे वो अब  सोचता नहीं है

 

कि छोड़ दें आस आज़म उसकी

वो रिश्ता जब जोड़ता नहीं है

 

✏

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें : 

उल्फ़त में चोट मिली ऐसी टूटे है

Similar Posts

  • दिल हुआ दीवाना मेरा एक मुखड़ा देखकर

    दिल हुआ दीवाना मेरा एक मुखड़ा देखकर     दिल हुआ दीवाना मेरा एक  मुखड़ा देखकर! राह में पहले न हुआ था दोस्त ऐसा देखकर   प्यार क़ा ऐसा नशा उसका चढ़ा मुझको मगर मैं गवा बैठा किसी को होश अपना देखकर   दिल मचले है उसका ही अपना बनाने को मेरा उस हंसी का…

  • मां

    मां   मां एक अनबूझ पहेली है, मां सबकी सच्ची सहेली है, परिवार में रहती अकेली है, गृहस्थी का गुरुतर भार ले ली है। ऐ मां पहले बेटी,फिर धर्मपत्नी, बाद में मां कहलाती हो। पहली पाठशाला,पहली सेविका तूं घर की मालकिन कहलाती हो।। बुआ,बहन,मामी,मौसी कहलाये, माता,दादी,नानी नाम बुलवाये, परिवार की जन्म दात्री नाम सुहाये, अबला,सबला,…

  • साथ

    साथ * कहते हैं वो हम साथ हैं साथ हैं ? तो कहने की क्या बात है? साथ! एक एहसास है। जो न आपके न मेरे पास है! फिर कहिए कौन किसके साथ है? एहसास ही जज़्बात है जहां जज़्बात है वहीं साथ हैं बाकी सब बात है। और , बात की क्या औकात है?…

  • वक़्त

    वक़्त ** वक़्त ने वक़्त से जो तुझको वक़्त दिया है, हृदय पर रखकर हाथ बोलो- साथ तूने उसके क्या सुलूक किया है? कभी गंवाए हो बेवजह- नहीं कभी सुनी उसकी, ना ही की कभी कद्र ही; यूं ही तेरे पांव से जमीं नहीं खिसकी। पढ़ाई के दौर में लड़ाई में रहे व्यस्त, देखो कहीं…

  • उनकी समझ में थे बहुत से | Ghazal

    उनकी समझ में थे बहुत से ( Unki samajh mein the bahut se )   उनकी समझ में थे  बहुत से  दोस्त और यार अब गिन रहे  कितने बचे हैं  और गमगुसार !!   कासिद ने खत के साथ ही मजमून भी दिया जैसे कि  म्यान से  अलग  से दे  कोई कटार !!   उस …

  • तेरा ये शबाब |Tera ye shabab | Ghazal

    तेरा ये शबाब ( Tera ye shabab )   खिलता हुस्न का तू गुलाब है! ग़जब  का  तेरा  ये शबाब है नशा क्यों न हो इश्क़ का मुझे लब तेरे  सनम  जब शराब है जिसे पढ़ना बाकी कभी जरा तू वो शायरी की क़िताब है उसे देखने को मचलता दिल ढला न वो चेहरे से…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *