हम से

  • हम से | Ghazal Hum Se

    हम से ( Hum Se ) मुदावा इस ग़म-ए-दिल का किया जाता नहीं हम से। तुम्हारे बिन किसी सूरत जिया जाता नहीं हम से। दबे लफ़्ज़ों में ले लेते हैं अक्सर ग़मज़दा हो कर। तुम्हारा नाम भी खुल कर लिया जाता नहीं हम से। जो तुम आकर पिलाओ तो ख़ुशी से पी के मर जाएं।…