ग़म में ही ऐसा बिखरा हूँ
ग़म में ही ऐसा बिखरा हूँ ग़म में ही ऐसा बिखरा हूँ ! अंदर से इतना टूटा हूँ दिल से उसका मेरे भुला रब यादों में जिसकी रोता हूँ नफ़रत उगली है उसने ही जब भी कुछ उससे बोला हूँ ग़ैर हुआ वो चेहरा मुझसे उल्फ़त जिससें मैं करता हूँ…
ग़म में ही ऐसा बिखरा हूँ ग़म में ही ऐसा बिखरा हूँ ! अंदर से इतना टूटा हूँ दिल से उसका मेरे भुला रब यादों में जिसकी रोता हूँ नफ़रत उगली है उसने ही जब भी कुछ उससे बोला हूँ ग़ैर हुआ वो चेहरा मुझसे उल्फ़त जिससें मैं करता हूँ…