बंजारा के मुक्तक | Banjara ke Muktak
तुम क्यों जाते नहीं सब सहेलियां जाती हैं मंदिर, तुम क्यों जाते नहींखुशगवार मौसम को देख जरा भी मुस्कुराते नहींछत पर ही हिरणी की तरह कुलांचे भरते हो तुमकभी सीढ़ियों से उतर कर, गली तक आते नहीं.. जैसे देखा ही नहीं वह ऐसे देखता था मुझे, जैसे देखा ही नहींमैंने भी उसके बारे में, ज्यादा…

