Category: मुक्तक
महेन्द्र सिंह प्रखर के मुक्तक | Mahendra Singh Prakhar ke Muktak
( 13 ) माँ के हाथों का खाना कब कच्चा लगता है । साठ साल का बेटा उसको बच्चा लगता है । कोई कितना भी प्रेम करे जग में मुझसे – बस माँ का ही प्यार जगत में सच्चा लगता है ।। ( 12 ) हमें तो बोलना भी माँ सिखाती है सुनों हिंदी ।…
जिंदगी किरदार से ज्यादा कुछ नहीं | Zindagi Kirdar
जिंदगी किरदार से ज्यादा कुछ नहीं ( Zindagi Kirdar se jyada kuchh nahin ) जिंदगी किरदार से ज्यादा कुछ नहीं। बंदगी प्रभु प्यार से ज्यादा कुछ नहीं। रंगमंच यह दुनिया का भव सागर है। झूठा है यह संसार ज्यादा कुछ नहीं। नश्वर यह तन काया ज्यादा कुछ नहीं। झूठी है ये मोह माया ज्यादा…
बंजारा के मुक्तक | Banjara ke Muktak
तुम क्यों जाते नहीं सब सहेलियां जाती हैं मंदिर, तुम क्यों जाते नहींखुशगवार मौसम को देख जरा भी मुस्कुराते नहींछत पर ही हिरणी की तरह कुलांचे भरते हो तुमकभी सीढ़ियों से उतर कर, गली तक आते नहीं.. जैसे देखा ही नहीं वह ऐसे देखता था मुझे, जैसे देखा ही नहींमैंने भी उसके बारे में, ज्यादा…
जो ना मचले जवानी जवानी नहीं | Jawani
जो ना मचले जवानी जवानी नहीं ( Jo na machle jawani jawani nahi ) जो ना मचले जवानी जवानी नहीं। कह ना सके कहानी कहानी नहीं। दिल का दर्द उभर लब तक आया। गले ना पत्थर आंख का पानी नहीं। याद ना दिलाए निशानी निशानी नहीं। उड़ानें भर ना सके भाई वो रवानी नहीं।…
खुशनसीब | Khushnaseeb
खुशनसीब ( Khushnaseeb ) खुशनसीब होते वो लोग जो हंसकर जी लिया करते हैं। भोली मुस्कान रख चेहरे पर दिल जीत लिया करते हैं। जवानी के मद में अंधा बिल्कुल भी नहीं होते कभी वो। शुभ कर्म और व्यवहार से जीवन गुजार लिया करते जवानी ( Jawani ) जवानी के मद में…
बसंत | Basant par Muktak
बसंत ( Basant ) आ गया मधुमास सुहाना चली मस्त बयार। सर्दी को अलविदा कहने लगे सब नर नार। फागुन महीना आया खिलने लगी धूप भी। लगे पुष्प सारे महकने चमन महकी बयार। कोहरा ओस सारे अब मधुरम चली पुरवाई। खुशबू फैली बागानों में महक उठी अमराई। मस्तानों की टोली आई गीत मस्त गाते…
परवरिश | Parvarish Par Muktak
परवरिश ( Parvarish ) पालते लाड प्यार से, ममता दुलार से। खुशियों बहार से, मीठी पुचकार से। रखे औलाद को, दुनिया में मां बाप। आंखों का तारा हमे, दिलों के तार से। शिक्षा संस्कार से, अपनापन प्यार से। रिश्तो में प्रेम घोले, मधुर व्यवहार से। चलना सिखाते हैं, जीवन की राहों पे। मंजिलें दिखाते…
उमंगों की पतंगे उड़ाओ | Umang par kavita
उमंगों की पतंगे उड़ाओ ( Umangon ki patang udao ) उमंगों की पतंगे लेकर आओ मचाए हम भी शोर। गली गली घूमते गाते चले आई है सुहानी भोर। जीवन में उड़ानें भर आओ चले खुशियों की ओर प्यार के तरानो से सुलझा लेंगे हम रिश्तो की डोर। नई आशाएं जोश जज्बा हृदय में भरकर…
आरजू | Aarzoo par muktak
आरजू ( Aarzoo ) एक आरजू एक तमन्ना एक मेरी अभिलाषा। अटल रहूं सीमा पे धर रण कौशल की भाषा। जोश जज्बा रग-रग में हौसला है भरपूर मेरा। तिरंगा की शान में झुका ले हम शीश जरा सा। अरि दल से लोहा लेने को भीड़ जाते तूफां से। तपन धरा की ओज भरती बतियाती…
पदांत आंसू | Aansoo par muktak
पदांत आंसू ( Padant aansoo ) सारे पापों को धो देते हैं वो प्रायश्चित के आंसू। प्रेम का उमडता सागर नैन छलक आते आंसू। महकते फूल प्यारे अब खिलते कहां बागानों में। राज भले छुपा लो दिल में सब कह जाते आंसू। अपना बनाके हमें वो फिर रूला गए आंसू। आशाओं का चिराग…