जिधर देखो लहू बिखरा हुआ है | Ek ghazal
जिधर देखो लहू बिखरा हुआ है ( Jidhar dekho lahoo bikhra hua hai ) जिधर देखो लहूँ बिखरा हुआ है नगर में आज फ़िर दंगा हुआ है लगी है आग नफ़रत की दिलों में यहाँ हर आशियाँ उजड़ा हुआ है बहुत नजदीक था मेरे कभी जो उसी से ख़त्म हर रिश्ता हुआ…


