Tag: Ghazal
न जाने क्यों साथ वो छोड़ते रहे मेरा | Ghazal
न जाने क्यों साथ वो छोड़ते रहे मेरा ( Na jane kyon sath wo chhodte rahe mera ) न जाने क्यों साथ वो छोड़ते रहे मेरा मुहब्बत से दिल भरा तोड़ते रहे मेरा नहीं पूछा हाले दिल भी मगर मेरा उसनें वो पास फ़ोन बैठे छेड़ते रहे मेरा गुलाब देते रहे प्यार…
किसी जादू टोने का ही असर है | Ghazal
किसी जादू टोने का ही असर है ( Kisi Jadoo tone ka asar hai ) किसी जादू टोने का ही असर है! परेशां इसलिए जीवन मगर है बहुत भेजे उसके कासीद घर को नहीं आयी कोई उसकी ख़बर है नजर आया नहीं मुझको कहीं भी उसी को ढूंढ़ती मेरी नजर है …
कैसे ए आज़म कहूँ अपना भला | Ghazal
कैसे ए आज़म कहूँ अपना भला! ( Kaise E Aazam Kahun Apna Bhala ) कैसे ए आज़म कहूँ अपना भला! जब यकीं में वो दग़ा करता भला कहता है जब दोस्त हूँ सच्चा तेरा क्यों दिखाता ग़ैर वो चेहरा भला एक क़ातिल है वफ़ाओ का मेरी शक्ल से ही जो मगर…
रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे | Shayari On Relations
रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे ( Rishton ke dhage sab torte wo rahe ) रिश्तों के धागे सब तोड़ते वो रहे और हम प्यार से जोड़ते वो रहे रह गये है हम आवाज देते यूं ही और मुंह हमसे तो मोड़ते वो रहे प्यार के भेजते ही रहे फ़ूल हम…
मेरा दिल रो पड़ा देखते देखते | Udasi shayari
मेरा दिल रो पड़ा देखते देखते ( Mera Dil Ro Para Dekhte Dekhte ) मेरा दिल रो पड़ा देखते देखते वो जुदा जब हुआ देखते देखते कह सका बात दिल की नहीं उससे कुछ वो जुदा हो गया देखते देखते खा गया हूँ ठोकर पत्थर से नफ़रत की राह मैं तो चला …
आज अपना हबीब है देखा | Ghazal
आज अपना हबीब है देखा ( Aaj apna habib hai dekha ) आज अपना हबीब है देखा पास किसी के करीब है देखा मत कर इतना गरूर ख़ुद पे तू हाँ बिगड़ते नसीब है देखा बोलते हक़ में सच के मैंनें तो आज मैंनें रकीब है देखा है परेशां यहां तो…
यार दिल की ही मगर ऐसी दवा मां | Mother’s Day Special
यार दिल की ही मगर ऐसी दवा मां ( Yaar dil ki hi magar aisi dawa maa ) यार दिल की ही मगर ऐसी दवा मां ! जिंदगी भर करती है देखो वफ़ा मां हर वादा दिल से निभाती है हमेशा जीस्त की वो एक सच्ची आशना मां जिंदगी तेरे बिना कुछ…
दर्दे दिल की नहीं दवा भेजी | Darde Dil Shayari
दर्दे दिल की नहीं दवा भेजी ( Darde dil ki nahi dawa bheji ) दर्दे दिल की नहीं दवा भेजी ! उसनें ऐसी कहा वफ़ा भेजी ख़त्म जिसकी न प्यार की हो ये बू इधर को कहा भला भेजी बेवफ़ाई की भेजी बू उसनें कब मुझे ख़ुशबू बावफ़ा भेजी बू …
अपनें ही हुस्न पे उसको गरूर है| Husn Shayari
अपनें ही हुस्न पे उसको गरूर है ( Apne hi husn pe usko guroor hai ) अपनें ही हुस्न पे उसको गरूर है ! उल्टा दिमाग़ में उसके फ़ितूर है मत दो सजा इसे झूठी बेवजह मासूम ए लोगों ये बेक़सूर है है आरजू ये ही अपना बनाना उसे की मांग का…
Judai Shayari | उम्र भर के लिए अजनबी हो गये
उम्र भर के लिए अजनबी हो गये ( Umar bhar ke liye ajnabi ho gaye ) उम्रभर के लिए अजनबी हो गये! हम जुदा जीवन भर ऐसे की हो गये मैं देखूँ चैन उसको नहीं मिलता है वो मेरे दिल के ही दिलकशी हो गये बजते है साज उल्फ़त के…