तुम कैसा इंसान हो | Insan par kavita
तुम कैसा इंसान हो ( Tum kaisa insan ho ) बांट बांट कर धरती सागर बांटते आसमान हो, तुम कैसा इंसान हो! जाति धर्म में रंग बटा है अब बांटते इमान हो, पशु भी बांटा पक्षी बांटा क्यूं बांटते श्मशान हो, तुम कैसा इंसान हो! भाषा बोली पुस्तक बांटा बांट रखे परिधान हो प्यार…


