किसान | Kisan par Kavita
किसान! ( Kisaan ) ( 3 ) हर तरफ होता किसान हि किसान है फिर भी किसान हि क्यों बेपहचान है गर्मी हो या ठंडी गुजर रही सब खेतों में हर मौसम में जूझ रहा वही नादान है दाना दाना चुगकर करता जीवन यापन तब हि हर महलों में पहुँच रहा राशन है जीवन प्यासा…


