Kisan par kavita

  • किसान | Kisan par Kavita

    किसान! ( Kisaan ) ( 3 ) हर तरफ होता किसान हि किसान है फिर भी किसान हि क्यों बेपहचान है गर्मी हो या ठंडी गुजर रही सब खेतों में हर मौसम में जूझ रहा वही नादान है दाना दाना चुगकर करता जीवन यापन तब हि हर महलों में पहुँच रहा राशन है जीवन प्यासा…

  • किसान | Kisan par kavita

     किसान  ( Kisan )   क्या करें मजबूर किसान….|| 1.बैलों को हल मे नह दिया, पसीना बहाये किसान | सून-सान पड़ी जमीन पर, हल रहा चलाये किसान | बीज डाल पानी सींचा, अब चौंकीदारी होने लगी | भरपूर फसल का सपना ले, खुशिहाली होने लगी | क्या करें मजबूर किसान….|| 2.दिन दोपहरी रात-दिन, मेहनत कड़ी…