कुंठायें जीवन का अवसान | Kuntha par chhand
कुंठायें जीवन का अवसान ( Kunthaye jeevan ka avsan ) चिंता चिता समान है, कुंठायें हैं अवसान। जीवन को आनंद से, जरा भर लीजिए। सब को खुशी बांटिये, नेह मोती अनमोल। घुटन भरे कुंठाएं, थोड़ा प्रेम कीजिए। हर्ष मौज आनंद की, गर चाहो बरसात। ईर्ष्या द्वेष लोभ मद, जरा त्याग दीजिए।…

