Nari par kavita

  • नारी हो तुम | Nari par Kavita

    “नारी हो तुम “ ( Nari ho tum )    जगत मैं आई हो तो, संसार का कुछ उद्धार करो! अपने अस्तित्व की एक नई , फिर से तुम शुरुआत करो जो जग में जाने जाते हैं , वही वीर कहलाते हैं तुम नारी हो शक्ति स्वरूपा नारायणी जैसा तुम काम करो ! हो समाज…

  • फूलों सी कोमल नारी | Poem nari

    फूलों सी कोमल नारी ( Phoolon se komal nari ) अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की विशेष प्रस्तुति     सोनू!फूलों सी मासूम हो फूलों में सिक्त शबनम की बूंदे हो देखूँ तुम्हें जी भरके भी जी भरता नहीं बस तेरी तस्वीरों को ही देखता रहता हूँ     पूरी कायनात जैसी हो तुम तुम्हें देख खुदा…

  • स्त्री | Stree Kavita

    स्त्री ( Stree kavita )   स्त्री होकर स्त्री पर उपहास करती हो, हैरानी होती है कि तुम तुच्छ विचारों में वास करती हो। तुम भी उस तरुवर की शाखा हो, जिस डाल कि मैं। तुम भी अपने कार्य में निपुण, मैं भी अपने कार्य में संपूर्ण। स्त्री होकर स्त्री पर उपहास करती हो, हैरानी…