Shuhani Shaam Kavita

  • सुहानी शाम | Suhani shaam shayari

    सुहानी शाम ( Suhani shaam )   दृश्य मनोरम सुंदर नजारा सुहानी शाम हो जाए उर उमंगे ले हिलोरे प्रीत पुरानी आम हो जाए   ठंडी ठंडी पुरवाई हो खुशियों की बरसात हो जाए सुहानी सी प्रीत बरसे झड़ी सावन के नाम हो जाए   महक जाए गुलशन सारा चेहरे पर मुस्कान मधुर नैनों में…