Tag: urdu poetry
अब रहा है कौन अपना गांव में | Ghazal
अब रहा है कौन अपना गांव में ( Ab raha hai kaun apne gaon mein ) अब रहा है कौन अपना गांव में रह गया हूँ देखो तन्हा गांव में! वो नहीं आया नगर से लौटकर रस्ता उसका रोज़ देखा गांव में छोड़ आया हूँ नगर मैं इसलिए है मकां ए…
चमन में अब निखार है शायद | Ghazal
चमन में अब निखार है शायद ( Chaman me ab nikhar hai shayad ) चमन में अब निखार है शायद। आने वाली बहार है शायद ।। वो मर गया मगर हैं आंखें खुली, किसी का इंतजार है शायद।। गर्ज पूरी हुई मुंह मोड़ लिया, बहुत मतलबी यार है शायद।। पांव में…
देख लूँ जी भर के आपको एक पल| Romantic Ghazal
देख लूँ जी भर के आपको एक पल ( Dekh loon jee bhar ke aapko ek pal ) देख लूँ जी भरके आपको एक पल! ए सनम पास बैठे रहो एक पल चैन दिल को मिलेगा चले जाने फ़िर प्यार की आओ बातें करो एक पल गीत उल्फ़त के ही गायेगे…
प्यार की मेरे अधूरी सी कहानी रह गयी | Love Shayari
प्यार की मेरे अधूरी सी कहानी रह गयी ( Pyar ki meri adhuri si kahani rah gai ) प्यार की मेरे अधूरी सी कहानी रह गयी! आँखों में आंसू दिल में ग़म की रवानी रह गयी आज दिल से लुट गयी है वो मुहब्बत की ख़ुशी ग़म भरी ही रोज़ अपनी जिंदगानी…
रक्खी जिससे यहां दोस्ती ख़ूब है | Ghazal
रक्खी जिससे यहां दोस्ती ख़ूब है ( Rakhee jisse yahan dosti khoob hai ) रक्खी जिससे यहां दोस्ती ख़ूब है ! कर गया आज वो दुश्मनी ख़ूब है जिंदगी की बुझे प्यास अब ए ख़ुदा प्यार की उठ रही बेकली ख़ूब है रात दिन आँखों में ही नमी ख़ूब है यादों…
देर तक प्यार की गुफ्तगू खूब की | Ghazal
देर तक प्यार की गुफ्तगू खूब की ( Der tak pyar ki guftagu khoob ki ) देर तक प्यार की गुफ़्तगू ख़ूब की उसने सूरत मेरे रू-ब-रू ख़ूब की ख़ा गया हूँ दग़ा उसकी इस बात से प्यार की उसने बातें शुरु ख़ूब की दोस्ती जब से तेरी मेरी हो गयी लोगों…
किन सोचो में गुम हो फ़ैसल | Ghazal
किन सोचो में गुम हो फ़ैसल ( Kin sochon mein gum ho faisal ) किन सोचो में गुम हो फ़ैसल! इतने क्यूँ गुमसुम हो फ़ैसल औरो की गलती भी क्या है गुनहगार तो तुम हो फ़ैसल झूम उठे जो मन का सावन बारिश वो रिमझिम हो फ़ैसल बाहर निकलें मेरा…
समझें गर जो दोस्ती दुश्मनी नहीं होती
समझें गर जो दोस्ती दुश्मनी नहीं होती ( Samajhen gar jo dosti dushmani nahi hoti ) समझें गर जो दोस्ती दुश्मनी नहीं होती! मुहब्बत के ही बिना जिंदगी नहीं होती करे चुगली हर घड़ी जो सदा आपकी ही उसको जीवन में कभी फ़िर ख़ुशी नहीं होती ख़िलाफ़ वो गर न होता अपना…
रोज़ रब से मैं यारों ख़ुशी मांगता हूँ | Ghazal
रोज़ रब से मैं यारों ख़ुशी मांगता हूँ ( Roz rab se main yaron khushi mangata hoon ) रोज़ रब से मैं यारों ख़ुशी मांगता हूँ! दूर हो दुख अच्छी जिंदगी मांगता हूँ उम्रभर साथ मेरा निभाये वफ़ा एक ऐसी रब से दोस्ती मांगता हूँ प्यार हो वावफ़ा से भरी हो…
जिंदगी में हिज्र की ऐसी रवानी हो गयी | Ghazal
जिंदगी में हिज्र की ऐसी रवानी हो गयी ( Zindagi mein hijr ki aisi rawani ho gayi ) जिंदगी में हिज्र की ऐसी रवानी हो गयी अब लबों की ही मुहब्बत इक कहानी हो गयी अब ख़िलाफ़ उसके सभी को होना होगा हाँ मगर यार उसकी अब बहुत देखो मनमानी हो गयी…