Zindagi Par Shayari

  • ज़िंदगी | Zindagi par Shayari

    ज़िंदगी ( Zindagi ) ज़िंदगी अब दग़ा रोज़ करने लगी मुफलिसी की यहाँ आह भरने लगी जुल्म का ही मिला है निशाँ ऐसा है आजकल ज़िंदगी रोज़ डरने लगी जो नहीं है नसीब में यहाँ तो लिखा आरजू प्यार की ज़ीस्त करने लगी लौट आ ऐ सनम शहर से गांव को ज़िंदगी रोज़ अब हिज्र…

  • ऐ जिन्दगी | Zindagi Par Shayari

    ऐ जिन्दगी ( Ai Zindagi )     जिंदगी हर दिन एक जंग सी लगती है, कभी पहलू में मेरे तो , कभी तेरे लगती है,   कभी पास आके बैठ, तो बताए हमे कितनी बेरहम लगती है, हर दिन ये मुझसे मेरे ही जवाबो पे एक नया सवाल पूछती है,   की तू तो…