उस दर पे कदम मत रखना

उस दर पे कदम मत रखना

जहाँ नहीं मिलता है प्यार तुम्हें।
जहाँ नहीं मिलता सम्मान तुम्हें।।
उस दर पे कदम मत रखना।
उस घर में कदम मत रखना।।
जो नहीं दे सकते तुमको खुशी।
जज्बात तेरे जो समझे नहीं।।
उस दर पे कदम———————।।

तुझमें नहीं है कुछ भी कमी।
क्यों उनकी गुलामी करता है।।
चंद रुपयों के खातिर क्यों।
हस्ती की नीलामी करता है।।
जहाँ तेरी कदर नहीं है कुछ भी।
जहाँ तेरी खबर नहीं है कुछ भी।।
उस दर पे कदम———————।।

गर तू हो अकेला जीवन में।
जीवन से निराश होना नहीं।।
मिलेगी तुम्हें भी मंजिल तेरी।
हिम्मत तू सफर में खोना नहीं।।
जहाँ तेरे लिए दुहा नहीं करते।
जहाँ तारीफ तेरी कुछ होती नहीं।।
उस दर पे कदम——————-।।

अपना लहू उनके लिए मत बहा।
नहीं है मानवता जिन दिलों में।।
अपनी खुशी उनको नहीं लुटा।
जो रहते हैं शीशों के महलों में।।
जहाँ दर्द तेरा कोई समझे नहीं।
जहाँ तुमको सीने से लगाये नहीं।।
उस दर पे कदम———————।।

शिक्षक एवं साहित्यकार
गुरुदीन वर्मा उर्फ़ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

यह भी पढ़ें :-

दलबदल | व्यंग्य रचना

Similar Posts

  • मां कात्यायनी | Maa Katyayani

    मां कात्यायनी ( Maa Katyayani )    पुरुषार्थ सहज सुफलन, मां कात्यायनी आराधना से वर्तमान विज्ञान प्रौद्योगिकी युग, मां दुर्गा षष्ठी छवि पूजन विशेष । शोध अनुसंधान दक्षता मैया, जीवन कृपा दृष्टि अधिशेष । जन्म जन्मांतर पाप मुक्ति, ब्रजमंडल अधिष्ठात्री साधना से । पुरुषार्थ सहज सुफलन, मां कात्यायनी आराधना से ।। केहरी आरूढ़ा मात भवानी,…

  • मन शिवालय हो जाए | Geet Man Shivalay ho Jaye

    मन शिवालय हो जाए ( Man shivalay ho jaye )    ओंकार निकले कंठो से, बम बम भोले शिव आये। मनमंदिर में दीप जलाऊं, घट उजियारा हो जाए। लोटा भर के जल चढ़ाऊं, गजानंद दुख हर जाए। हर हर महादेव कानो में, शिव शंकर शंभू भाए। मन शिवालय हो जाए बाघाम्बर धारी शिव भोले, अगम…

  • बेवफा जमाने को | Bewafa jamane ko

    बेवफा जमाने को ( Bewafa jamane ko )   न गुनगुनाया करो, तुम मेरे फसाने को। याद जब मेरी नहीं ,बेबफा जमाने को।।   अपना बस्ता वो खिलौने, वहीं पे बेच दिए घर से निकला था इकरोज़,जब कमाने को।   है अजीब शहर ,यहाँ पर मत आना यहाँ न राह कोई घर को लौट जाने…

  • मधुर-मधुर मेरे दीपक जल

    मधुर-मधुर मेरे दीपक जल नभ,जल और धरित्री का, अंधियारा छट जाएसदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । पुनि स्नेहिल गंगा पर्वत शिलाओं से निकल जाए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । कभी भटकाव ना किसी की जिन्दगी में आए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे दीपक जल । सत्य-न्याय की हवा, जल,थल,नभ में फैल जाए,सदैव ऐसे मधुर-मधुर मेरे…

  • कितनी दूर तक जाना होगा

    कितनी दूर तक जाना होगा   कितनी दूर तक जाना होगा फासला आज मिटाना होगा। झूठ से बुनियाद हिल जाएगी अपना सच सबसे बताना होगा। काम आए वही है अपना दामन गैरों से बचाना होगा। हम तो चाहत के तलबगार रहें हैं फिर वही धुन बजाना होगा। कुछ भी आसान नहीं है इसमें आग सीने…

  • हे नाथ बचा लो | Kavita

    हे नाथ बचा लो ( He nath bacha lo )   जग के सारे नर नारी रट रहे माधव मुरलीधारी यशोदा नंदन आ जाओ मोहन प्यारे बनवारी   चक्र सुदर्शन लेकर प्रभु नियति चक्र संभालो कहर कोरोना बरस रहा आकर नाथ बचा लो   उठा अंगुली पर गोवर्धन बचा लिया गोकुल को हर लो पीर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *