हम हुए अस्त

हम हुए अस्त | Hum Huye Ast

हम हुए अस्त 

( Hum Huye Ast )

 

” मैं ” की वृत्ति में
” हम” हुए हैं अस्त

बड़ा ही शालीन है
शब्द हम समझो इसे

अपनी जेहन में उतार
वरना तू है बेकार

धरा हुआ है हम
प्रबल दिखा है मै

मैं और हम की
प्रतिस्पर्धा में

पृथ्वी परी है बेसुध
प्रकृति गई है रुठ

मैं की नादानी में
मैं के अहंकार में

टूटा है सारा जहां
बिखरी है मानवता

चराचर है निशाचर
प्रेम है धार कृपाण

पूछता है हम मैं से-
ये नजारे ये मंजर

प्रकट है जो सामने
सामना तू कर पाएगा

Shekhar Kumar Srivastava

शेखर कुमार श्रीवास्तव
दरभंगा( बिहार)

यह भी पढ़ें :- 

https://thesahitya.com/kavita-wah-pani-bechta-hai/

 

Similar Posts

  • मै हिंदी हिंदुस्तान की | Mai Hindi Hindustan ki

    मै हिंदी हिंदुस्तान की ( Mai Hindi Hindustan Ki )    मैं हिंदी हिंदुस्तान की, भारत के सुज्ञान की हिंदु मुस्लिम सिख इसाई, हर भारत के इंसान की। पूरब से पश्चिम की भाषा उत्तर से दक्षिण की भाषा मै हिंदी हिंद निशान की ,मैं हिंदी हिंदुस्तान की। सूर के सुख का सागर हू , भाव…

  • सागर पांव पखारे | Kavita Sagar Paon Pakhare

    सागर पांव पखारे ( Sagar Paon Pakhare )   मस्तक पर है मुकुट हिमालय, सागर पांव पखारे ! गोदी में खेले राम, कृष्ण, अवतार लिए बहु सारे !! भारत मां का रुप सलोना, देख मगन जग वाले ! धन्य धन्य हे आर्य पुत्र, है अनुपम भाग्य तुम्हारे !! निर्झर झरने, मीठी नदियां, शस्य श्यामला धरती…

  • होली ‌पुरानी | Kavita Holi Purani

    होली ‌पुरानी ( Holi Purani )   याद है वो होली मुझको। बीच गांव में एक ताल था, ताल किनारे देवी मन्दिर, मन्दिर से सटी विस्तृत चौपाल, जहां बैठकर बुजुर्ग गांव के, सुलझा देते विवाद गांव के, फिर नाऊठाकुर काका का, आबालवृद्ध के मस्तक पर, पहला अबीर तब लगता था, फिर दौर पान का चलता…

  • पाज़िटिव कविता! | Vyang

    पाज़िटिव कविता! ( Positive Kavita : Vyang )   कोरोना नहीं है कोरोना नहीं है रोना नहीं है रोना नहीं है आॅक्सीजन की कमी नहीं है फैक्ट्रियों में पड़ी हुई हैं बहुत सारी भरी हुई हैं टैंकरों से आ रही है हवाई जहाज भी ला रही है बेड की कमी नहीं है दवाएं भी हैं…

  • शैलपुत्री | Kavita shailputri

    शैलपुत्री ( Shailputri )   गिरिराज घर जन्मी देवी शैलपुत्री कहलाई। कमल सुशोभित कर में शक्ति स्वरूपा माई।   तुम त्रिशूलधारी भवानी हो वृषारूड़ा हो माता। मंगलकारणी दुखहर्ता मां तुम ही हो सुखदाता।   प्रजापति ने यज्ञ किया सब देवन को बुलवाया। विकल हो गई सती मां शिवशंकर नहीं बुलाया।   घर पहुंची मैया स्नेह…

  • प्रतिस्पर्धा | Pratispardha

    प्रतिस्पर्धा ( Pratispardha )    एक स्पर्धा ही तो है जो ले जाती है मुकाम तक लक्ष्य के अभाव मे हर प्रयास सदैव बौना ही रहता है…. कामयाबी की चाहत ही उभरती है आपने ऊर्जा बनकर भटकाव के रास्तों से भी मंजिल ,अपने दिशा का चयन कर ही लेती है… प्रतिस्पर्धा किसी विशेष एक की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *