हुई पस्त मैं

हुई पस्त मैं | Past Hui Main

हुई पस्त मैं

( Past Hui Main )

आज शोर कोई कहीं जरा नहीं करो,
मेरे दिल में भयंकर तूफान आया है।
देखो अतीत की प्रीत चादर उड़ गई,
याद बनकर प्रेमिल मेहमान आया है।

किया पहले-पहल निगाहों पर वार,
दूसरा चातुर्य करता बात व्यवहार।
धक-धक की आवाज निरंतर सुनती,
जब-जब होती आँखों से आँखें चार।

सबकुछ अस्त व्यस्त और हुई पस्त मैं,
उसी में रहती हमेशा, होती शिकस्त मैं।
ख्वाब, ख्याल, खुमार, खुद को खोकर,
पल-पल रमती, यादों में धूनती मस्त मैं।

स्वीकार कर हस्ताक्षर कर दो प्रिये,
दिल दास्तान मंजर में प्रेम भर दो प्रिये।
रूप कमाल, व्यक्तित्व आकर्षित आचरण,
क्षीरसागर बनाकर हमको तर दो प्रिये।

रूकना जरा होश में आ तो जाए पहले,
धड़कन तेज अंगार, प्रेम पाने को दहले।
तुम बिन जीवन उदास लगता न जाने क्यूँ,
जो कुछ जज्बात है आज खुलकर कहले ।

बावरी सा मन बेहाल रोता रहता निरंतर,
जिस भी रूप में आओ, कर दो बस तर ।
प्यासी दृग दर्शन, दर्द में कराह निकलती,
कृष्ण मेरे ह्दय-पटल में बस कृष्ण प्रेम भर ।।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

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